अमेरिका-ईरान के बीच हुआ शांति समझौता, क्या इजरायली पीएम नेतन्याहू स्वीकार करेंगे ये डील?
US-Iran Peace Deal: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से शांति लौटने की संभावना बढ़ गई है. क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता हो गया है. ये समझौता 14 शर्तों के साथ हुआ है. अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते पर ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने हस्ताक्षर कर दिए. इस समझौते के होने से क्षेत्र में शांति बहाली की उम्मीद बढ़ गई है. हालांकि अभी भी इजरायल का रुख इस डील को लेकर सकारात्मक नहीं दिख रहा है.
क्योंकि इस डील में ईरान की कुछ ऐसी शर्तें भी शामिल हैं जिन्हें इजरायल और नेतन्याहू कभी स्वीकार करने वाले हैं. जिसे लेकर वे पहले ही आक्रामक तेवर दिखा चुके हैं. 14 शर्तों पर हुए इस शांति समझौते में एक ऐसी शर्त भी शामिल है जिसे इजरायल कभी स्वीकार नहीं करेगा और वो शर्त है लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई.
क्या नेतन्याहू स्वीकार करेंगे अमेरिका-ईरान का शांति समझौता?
इजरायल और ईरान के बीच सबसे बड़ा तनाव का मुद्दा परमाणु कार्यक्रम और लेबनान रहा है. इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना चाहता है साथ ही लेबनान में हिजबुल्लाह को पूरी तरह से समाप्त करना चाहता है. क्योंकि ईरान हिजबुल्लाह के जरिए इजरायल पर लगातार हमले करता रहा है. साथ ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम इजरायल के लिए सबसे बड़ा खतरा है. ऐसे में नेतन्याहू ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध लगाए बिना और लेबनान में सीजफायर की शर्तों पर इस शांति समझौते को कभी स्वीकार नहीं करेगा.
इस मुद्दे पर ट्रंप कभी स्वीकार नहीं करेंगे पीस डील
क्योंकि अमेरिका-ईरान के शांति समझौते में जहां ईरान ने पुष्टि की है कि वह परमाणु हथियारों का विकास या अधिग्रहण नहीं करेगा. साथ ही दोनों पक्ष संवर्धित परमाणु सामग्री के प्रबंधन और निपटान के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में एक पारस्परिक रूप से स्वीकार्य तंत्र विकसित करेंगे. वहीं दूसरी ओर एक शर्त ये भी है कि अमेरिका को ईरान तथा उनके सहयोगी पक्ष यानी लेबनान तत्काल स्थायी युद्धविराम लागू करना होगा.
עם הסכם, בלי הסכם - כל עוד אני ראש ממשלת ישראל, לאיראן לא יהיה נשק גרעיני. pic.twitter.com/CdGChKskph
— Benjamin Netanyahu - בנימין נתניהו (@netanyahu) June 16, 2026
इसके साथ ही दोनों पक्ष भविष्य में एक-दूसरे के विरुद्ध किसी भी सैन्य कार्रवाई, बल प्रयोग या धमकी से भी परहेज करेंगे. यही नहीं लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान भी इस डील में सुनिश्चित करने की बात की गई है.
बता दें कि परमाणु के अलावा लेबनान और हिजबुल्लाह ही एक ऐसा सबसे बड़ा मुद्दा जिस पर नेतन्याहू कभी सहमत नहीं होंगे. नेतन्याहू किसी भी हालत में लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ अपने सैन्य ऑपरेशन को रोकने के लिए सहमत नहीं होंगे लेकिन पीस डीज में लेबनान में स्थायी शांति समझौते की बात कही गई है. जो नेतन्याहू को कभी स्वीकार नहीं होगा.
अमेरिका-ईरान डील पर नाराजगी जता चुके हैं नेतन्याहू
बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर रविवार (14 जून) को ही सहमति बन गई थी. दोनों देश शांति समझौते की शर्तों पर राजी हो गए थे. जैसे ही शांति समझौते की शर्तों सामने आईं इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू भड़क गए और उन्होंने इस शांति समझौते पर कड़ी आपत्ति जताई. नेतन्याहू ने सोमवार (15 जून) को कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे, चाहे कोई समझौता हो या न हो. इसके साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि उनकी और ट्रंप की हर बात पर हमेशा एक जैसी राय नहीं होती. इजरायल और अमेरिका के हित अलग-अलग हैं.
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लेबनान में स्थायी सीजफायर के मुद्दे पर भड़क सकते हैं नेतन्याहू
इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा, "समझौता हो या न हो, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे. न आज और न कल. जब तक मैं इजरायल का प्रधानमंत्री हूं, ऐसा नहीं होने दूंगा." नेतन्याहू ने आगे कहा, "सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमने इजरायल को परमाणु विनाश के खतरे से बचा लिया. और इसका क्या मतलब होता? इसका मतलब यह होता कि लाखों इजरायली नागरिक, जो इस समय मेरी बात सुन रहे हैं, आप सभी बड़े पैमाने पर मौत के भयानक खतरे में होते. हमने इजरायल की आबादी के विनाश के इस खतरे को कई वर्षों के लिए दूर कर दिया है." ऐसे में माना जा रहा है कि इजरायल ईरान के परमाणु हथियार हासिल न करने की शर्तों को मान लेगा लेकिन लेबनान में स्थाई सीजफायर के लिए कभी राजी नहीं होगा.
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