8वें वेतन आयोग पर आई बड़ी अपडेट, केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में होगा बंपर इजाफा, जानें कब मिलेगा एरियर
8th Pay Commission Latest Update: केंद्र सरकार ने आखिरकार आठवें वेतन आयोग के गठन की प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है. इस फैसले से देश के करीब 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनर्स में खुशी की लहर दौड़ गई है. आयोग को अपनी अंतिम सिफारिशें तैयार करने के लिए करीब 18 महीने का समय दिया गया है. इस बीच कर्मचारी यूनियनों और पेंशनर संगठनों से सुझाव मांगने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है. जिसकी अंतिम तारीख 15 जून 2026 तय की गई थी. अब आयोग इन सभी प्रस्तावों का बारीकी से विश्लेषण करने में जुट गया है.
फिटमेंट फैक्टर पर टिकी नजरें
कर्मचारियों की नई सैलरी तय करने में सबसे बड़ी भूमिका फिटमेंट फैक्टर की होती है. सातवें वेतन आयोग में इसे 2.57 रखा गया था, लेकिन इस बार कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर 3.0 से लेकर 3.83 तक करने की पुरजोर मांग कर रहे हैं. अगर सरकार इस मांग को स्वीकार करती है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिलेगा. उदाहरण के तौर पर देखें तो जिस लेवल वन के कर्मचारी की मौजूदा न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये है, वह फिटमेंट फैक्टर बढ़ने के बाद करीब 66,000 रुपये तक पहुंच सकती है.
20 महीने के भारी एरियर की उम्मीद
आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होनी हैं. प्रक्रिया में होने वाली संभावित देरी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा आर्थिक वरदान साबित हो सकती है. नियम के अनुसार, आयोग की रिपोर्ट आने और कैबिनेट की मंजूरी मिलने में जितना समय लगेगा, उतने समय का बढ़ा हुआ पैसा कर्मचारियों को एकमुश्त एरियर के रूप में दिया जाएगा. माना जा रहा है कि यह अंतर करीब 15 से 20 महीने तक का हो सकता है. ऐसे में मिड लेवल और सीनियर लेवल के अधिकारियों को लाखों रुपये का बकाया एरियर मिलेगा, जो उनकी आर्थिक स्थिति को पूरी तरह बदल सकता है.
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तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन में प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा का किया गया उद्घाटन
नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने बुधवार को तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन (टीएपीएस) में प्राथमिक शीतलक पंप परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया और दुनिया के सबसे पुराने कार्यरत जुड़वां रिएक्टरों, टीएपीएस 1 और 2 के हाल ही में स्वीकृत 10 साल के जीवन विस्तार की समीक्षा की।
एईसी के अध्यक्ष अजीत कुमार मोहंती ने न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और कर्मचारियों के साथ बातचीत की और भारत के पहले परमाणु ऊर्जा स्टेशन के सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल संचालन को सुनिश्चित करने के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।
इस अवसर पर बोलते हुए परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग (एईसी) के अध्यक्ष ने कहा, विश्व के सबसे पुराने कार्यरत परमाणु रिएक्टरों, टीएपीएस यूनिट 1 और 2 का निरंतर संचालन, वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और संचालकों की पीढ़ियों के समर्पण और हमारी नियामक एवं तकनीकी क्षमताओं की परिपक्वता का प्रमाण है। एक दशक का जीवनकाल विस्तार प्रौद्योगिकी अधिग्रहण से तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भारत के परिवर्तन को दर्शाता है और एक सतत एवं ऊर्जा-स्वतंत्र विकसित भारत के निर्माण की हमारी क्षमता में विश्वास जगाता है।
1969 में शुरू किए गए टीएपीएस 1 और 2 ने देश में वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा उत्पादन की शुरुआत की और तारापुर को सोवियत ब्लॉक के बाहर एशिया का पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन बना दिया।
पिछले साढ़े पांच दशकों में, इस स्टेशन ने भारत की परमाणु इंजीनियरिंग क्षमताओं, परिचालन प्रथाओं और सुरक्षा संस्कृति को आकार देने में एक मूलभूत भूमिका निभाई है।
एनपीसीआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (अतिरिक्त प्रभार) वी. राजेश ने कहा कि तारापुर परमाणु ऊर्जा स्टेशन की इकाई 1 और 2 परमाणु सुरक्षा और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता के प्रति भारत की अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण हैं। निरंतर उन्नयन, नवाचार और एक मजबूत सुरक्षा संस्कृति के माध्यम से, ये इकाइयां अग्रणी प्रतिष्ठानों से सफलतापूर्वक ऐसे सुदृढ़ परिसंपत्तियों में परिवर्तित हो गई हैं जो राष्ट्र के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों का समर्थन करती हैं।
परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड द्वारा टीएपीएस 1 और 2 के निरंतर संचालन के लिए हाल ही में दी गई मंजूरी, कड़े नियामक निरीक्षण के तहत और सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले मजबूत दर्शन द्वारा निर्देशित एक व्यापक जीवन-विस्तार और आधुनिकीकरण कार्यक्रम के बाद प्राप्त हुई है।
महाराष्ट्र के तारापुर स्थित साइट के निदेशक अजय कुमार भोले ने कहा, टीएपीएस 1 और 2 का सफल जीवनकाल विस्तार और आधुनिकीकरण एनपीसीआईएल की तकनीकी परिपक्वता और सुरक्षा पर उसके अटूट ध्यान को दर्शाता है। शून्य क्षति के सिद्धांत के साथ परियोजना का क्रियान्वयन यह प्रदर्शित करता है कि कैसे पुराने परमाणु संयंत्रों को वर्तमान नियामक और तकनीकी अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए पुनर्जीवित किया जा सकता है।
जीवन विस्तार कार्यक्रम में महत्वपूर्ण प्रणालियों और घटकों का व्यापक निरीक्षण, नवीनीकरण, प्रतिस्थापन और जीर्णोद्धार, रिएक्टर अखंडता मूल्यांकन के लिए उन्नत स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की तैनाती, विद्युत प्रणालियों का आधुनिकीकरण और दीर्घकालिक परिचालन विश्वसनीयता और सुरक्षा को और बढ़ाने के लिए उपायों का कार्यान्वयन शामिल था।
पिछले कुछ वर्षों में, टीएपीएस 1 और 2 ने 100 अरब यूनिट से अधिक स्वच्छ बिजली का उत्पादन किया है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान मिला है और साथ ही 86 मिलियन टन से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड के समकक्ष उत्सर्जन को कम किया गया है।
अजय कुमार भोले ने आगे कहा, जैसे-जैसे भारत विकसित भारत की परिकल्पना की ओर बढ़ रहा है, विश्वसनीय, चौबीसों घंटे और कम कार्बन उत्सर्जन वाली बिजली उपलब्ध कराने में परमाणु ऊर्जा की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जाएगी।
--आईएएनएस
एसएके/डीकेपी
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