दिल्ली पुलिस ने साइबर-हॉक 5.0 के तहत साइबर धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया
नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के सरिता विहार पुलिस ने साइबर-हॉक 5.0 के तहत एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। पुलिस ने बुधवार को कमीशन आधारित धोखाधड़ी से धन निकालने में शामिल एक संगठित साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया और पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के तहत साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त लगभग 9 लाख रुपए की निकासी को सफलतापूर्वक रोका गया।
यह ऑपरेशन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, जसोला के शाखा प्रबंधक से मिली सूचना के बाद शुरू किया गया था और साइबर-हॉक 5.0 के ढांचे के तहत चलाया गया था। इसके बाद, सरिता विहार पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 338, 340(2) और 3(5) के तहत एफआईआर संख्या 297/2026 दर्ज की गई।
जांच के दौरान, पुलिस ने मुंबई में रिपोर्ट किए गए एक बड़े सीईओ/व्हाट्सएप धोखाधड़ी मामले से सीधा संबंध स्थापित किया, जिसमें कथित तौर पर 3 जून से 15 जून के बीच किए गए 63 लेन-देनों के माध्यम से एक निजी कंपनी से 10.40 करोड़ रुपए की हेराफेरी की गई थी। मुंबई का यह मामला मुंबई के क्राइम ब्रांच स्थित साउथ साइबर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज किया गया है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, वर्तमान में जांच के दायरे में मौजूद वित्तीय लेनदेन 10 करोड़ रुपए से अधिक हो सकता है, जो कई राज्यों में सक्रिय एक बड़े संगठित साइबर अपराध नेटवर्क की संभावना को दर्शाता है।
इस मामले में गिरफ्तार किए गए पांच आरोपियों की पहचान विकास (22), वंश (21), फैयाज आलम (22), अमित (28) और बलवीर कुमार (23) के रूप में हुई है, ये सभी दिल्ली निवासी हैं। पुलिस ने बताया कि गिरोह के कुछ अन्य सदस्य अभी भी फरार हैं और उन्हें ढूंढने और गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं।
इंस्पेक्टर युद्धवीर सिंह, सब-इंस्पेक्टर वैभव सिंह, सतीश भाटी, हेड कांस्टेबल नितेश और कांस्टेबल ओम प्रकाश और मनीष के नेतृत्व में यह अभियान एसीपी अनिल शर्मा की देखरेख और दक्षिण-पूर्वी जिले के अतिरिक्त डीसीपी-सेकेंड जसबीर सिंह के समग्र मार्गदर्शन में चलाया गया।
आगे की जांच जारी है ताकि अन्य लाभार्थियों की पहचान की जा सके, धन के स्रोत का पता लगाया जा सके और गिरोह के संचालन की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सके।
साइबर अपराध में अक्सर ईमेल और इंटरनेट धोखाधड़ी, पहचान की चोरी, वित्तीय या कार्ड भुगतान डेटा की साइबर चोरी, कॉर्पोरेट जानकारी की चोरी और बिक्री, साइबर जबरन वसूली और रैंसमवेयर हमले शामिल होते हैं।
हालांकि कई साइबर अपराधी वित्तीय लाभ के लिए काम करते हैं, लेकिन साइबर अपराध राजनीतिक, वैचारिक या व्यक्तिगत कारणों से भी प्रेरित हो सकते हैं। संगठित साइबर अपराध समूह अक्सर परिष्कृत तकनीकों का उपयोग करते हैं और कई अधिकार क्षेत्रों में काम करते हैं, जिससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण चुनौतियां उत्पन्न होती हैं।
--आईएएनएस
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कोटा में राहुल गांधी का छात्र संवाद, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार मॉडल पर उठाए सवाल
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने राजस्थान के कोटा में छात्रों, अभिभावकों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के साथ संवाद किया. कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई. कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों की समस्याएं सुनीं और मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर कई सवाल खड़े किए.
प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव पर जताई चिंता
संवाद के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्र भारी दबाव में जीवन गुजार रहे हैं. उन्होंने मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के साथ-साथ यूपीएससी, एसएससी और रेलवे भर्ती बोर्ड जैसी प्रमुख परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि हर साल करोड़ों युवा इन परीक्षाओं में भाग लेते हैं, लेकिन सफलता का प्रतिशत बेहद कम रहता है.
उनका कहना था कि छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं, लेकिन सीमित अवसरों के कारण अधिकांश युवाओं को निराशा का सामना करना पड़ता है. उन्होंने इस स्थिति को शिक्षा और रोजगार प्रणाली की बड़ी चुनौती बताया.
#WATCH | Kota, Rajasthan: Leader of Opposition in Lok Sabha and Congress MP Rahul Gandhi interacts with students in Kota.
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) June 17, 2026
(Source: Congress) pic.twitter.com/Be1by4KA3R
परिवारों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
राहुल गांधी ने दावा किया कि देश के लाखों परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी पर भारी खर्च कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कोचिंग, हॉस्टल, किताबें और अन्य शैक्षणिक संसाधनों पर होने वाला खर्च कई परिवारों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करता है.
उनके अनुसार, परिवार अपनी जमा पूंजी खर्च कर देते हैं और कई बार कर्ज लेकर बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का प्रयास करते हैं. इसके बावजूद युवाओं को रोजगार की गारंटी नहीं मिलती, जिससे निराशा और असुरक्षा की भावना बढ़ती है.
मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा भी उठा
कार्यक्रम में मौजूद एक अभिभावक ने छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव और आत्महत्या की घटनाओं को लेकर चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों पर सफलता का अत्यधिक दबाव रहता है, जिसका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है.
अभिभावक ने बताया कि कई परिवार अपने बच्चों की मानसिक स्थिति को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं. उन्होंने सरकार और शैक्षणिक संस्थानों से मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली को मजबूत बनाने की मांग की.
रोजगार के अवसरों पर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराना होना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि बड़ी संख्या में पढ़े-लिखे युवा आज भी स्थायी रोजगार से वंचित हैं.
उन्होंने कहा कि कई युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की लंबी तैयारी के बाद भी नौकरी हासिल नहीं कर पाते और अंततः असंगठित क्षेत्र या अस्थायी रोजगार की ओर जाने को मजबूर हो जाते हैं. इससे युवाओं में भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ रही है.
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत
राहुल गांधी ने कार्यक्रम के अंत में कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था को छात्रों के हित में अधिक व्यावहारिक और रोजगारोन्मुख बनाने की आवश्यकता है. उन्होंने शिक्षा, रोजगार और मानसिक स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा हुआ मुद्दा बताते हुए व्यापक सुधारों की जरूरत पर जोर दिया.
कोटा में हुआ यह संवाद केवल छात्रों की समस्याओं को सुनने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने देश की शिक्षा व्यवस्था, रोजगार की चुनौतियों और युवाओं के भविष्य को लेकर एक नई बहस को भी जन्म दिया है. आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा के केंद्र में रह सकता है.
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