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80 साल बाद भी कायम जबलपुर की विरासत, ऐतिहासिक घड़ियां अब नहीं सुनातीं ‘टिक-टॉक’

जबलपुर की सड़कों से गुजरते हुए कई ऐसी इमारतें दिखाई देती हैं, जो शहर के पुराने दौर की याद दिलाती हैं। इन इमारतों पर लगी बड़ी-बड़ी घड़ियां कभी लोगों के लिए समय जानने का सबसे भरोसेमंद जरिया हुआ करती थीं।

घंटी बजती थी तो बाजार में मौजूद लोग अपनी घड़ियां मिला लेते थे। लेकिन आज वही ऐतिहासिक घड़ियां खुद समय से पीछे छूट गई हैं। घंटाघर, कमानिया गेट और गोकुलदास धर्मशाला जैसी जगहों पर लगी पुरानी घड़ियों की सुइयां लंबे समय से थमी हुई हैं।

ब्रिटिश दौर में समय की पाबंदी के लिए लगी थीं ये घड़ियां

आज हमारे मोबाइल फोन में सेकंड तक का सही समय दिखाई देता है। लेकिन करीब सौ साल पहले ऐसा नहीं था। उस दौर में हर व्यक्ति के पास घड़ी होना आम बात नहीं थी। शहर में समय की जानकारी देने के लिए सार्वजनिक जगहों पर बड़ी-बड़ी घड़ियां लगाई जाती थीं। जबलपुर में भी ब्रिटिश शासन के समय ऐसी घड़ियां कई महत्वपूर्ण स्थानों पर लगाई गईं। इनका मकसद केवल समय बताना नहीं था, बल्कि लोगों को समय का पाबंद बनाना भी था।

रेलवे स्टेशन के पास स्थित गोकुलदास धर्मशाला में वर्ष 1910 में घड़ी लगाई गई थी। इसके बाद 1921 में घंटाघर में घड़ी स्थापित की गई। आगे चलकर फुहारा क्षेत्र के पास त्रिपुरी कांग्रेस स्मारक, कमानिया गेट और नगर निगम मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी घड़ियां लगाई गईं। कमानिया गेट पर 1939 में और नगर निगम परिसर में 1942 में घड़ी लगाई गई थी।

घंटाघर की घड़ी से जुड़ी थी शहर की अपनी कहानी

जबलपुर का घंटाघर सिर्फ एक इमारत या घड़ी का नाम नहीं रहा। इससे शहर की पुरानी यादें और किस्से भी जुड़े हुए हैं। घंटाघर को लेकर एक पुरानी कहावत भी सुनने को मिलती है, ‘घंटाघर की चार घड़ी, चारों में जंजीर पड़ी, जब-जब घंटा बजता है, खड़ा मुसाफिर हंसता है।’ यह कहावत बताती है कि कभी घंटाघर की घड़ी और उसकी घंटी शहर के लोगों के जीवन में कितनी खास थी।

लाखों खर्च हुए, फिर भी ऐतिहासिक घड़ियों की सुइयां थमीं

जबलपुर की ऐतिहासिक घड़ियों की हालत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इनकी मरम्मत और धरोहर संरक्षण पर छोटी रकम नहीं, बल्कि लाखों रुपए खर्च किए गए हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट और धरोहर संरक्षण के तहत कई ऐतिहासिक जगहों का जीर्णोद्धार किया गया। कमानिया गेट के जीर्णोद्धार पर करीब 26 लाख रुपए खर्च किए गए। वहीं घंटाघर के काम पर करीब 41 लाख रुपए खर्च होने की जानकारी सामने आई है।

गोकुलदास धर्मशाला के कायाकल्प पर भी करोड़ों रुपए खर्च किए गए। इतना ही नहीं, पुरानी घड़ियों को ठीक करने के लिए बाहर से विशेषज्ञ भी बुलाए गए। दिल्ली की हेरिटेज कंसल्टेंट कंपनी और ओडिशा से घड़ीसाजों की मदद ली गई। पुरानी चाबी से चलने वाली मैकेनिकल घड़ियों को इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में बदलने की कोशिश की गई। उम्मीद थी कि इससे घड़ियां आसानी से चलती रहेंगी और उनकी देखभाल भी आसान होगी। लेकिन समस्या यहीं खत्म नहीं हुई।

कमानिया गेट की घड़ी सिर्फ एक तरफ चल रही

कमानिया गेट की ऐतिहासिक घड़ी की हालत भी शहर की इसी समस्या को दिखाती है। जानकारी के मुताबिक, यहां लगी घड़ी की केवल एक तरफ की सुइयां चल रही हैं। दूसरी तरफ की घड़ी सही तरीके से काम नहीं कर रही। कुछ दिन पहले घड़ीसाज मेहमूद आलम ने कमानिया गेट की घड़ी को ठीक किया था। उनका कहना है कि इसके लिए किए गए काम का भुगतान नगर निगम की ओर से अभी तक नहीं हुआ है।

तीन पीढ़ियों ने संभाली जबलपुर की इन घड़ियों की जिम्मेदारी

इन ऐतिहासिक घड़ियों की कहानी में जबलपुर के एक परिवार की भूमिका भी बेहद खास है। घड़ीसाज छोटू मियां से लेकर उनके बेटे मंजूर आलम और फिर तीसरी पीढ़ी के मेहमूद आलम तक इस परिवार ने लंबे समय तक ऐसी बड़ी और जटिल घड़ियों की देखभाल की।

इन घड़ियों को ठीक करना सामान्य घड़ी की मरम्मत जैसा काम नहीं है। इनके अंदर का सिस्टम काफी बड़ा और पुराना होता है। इसे समझने के लिए अनुभव और खास तरह की जानकारी की जरूरत होती है।

मेहमूद आलम के अनुसार, अंग्रेजों के समय इन घड़ियों में चाबी भरने का सिस्टम था। मशीन में चाबी भरने के बाद घड़ी के अंदर लगा भारी वजन ऊपर चला जाता था। धीरे-धीरे वजन नीचे आता और इसी प्रक्रिया से घड़ी चलती रहती थी।

 

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MP News: भोपाल में राष्ट्रपति पदक समारोह, CM मोहन यादव ने पुलिस-होमगार्ड के वीरों को किया सम्मानित

भोपाल के लाल परेड मैदान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वतंत्रता दिवस समारोह में 47 पुलिस और होमगार्ड अधिकारियों-कर्मचारियों को राष्ट्रपति पदकों से सम्मानित किया।

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  Sports

Hazlewood के 300 Test विकेट के बाद भी संकट में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश जीत के करीब

ऑस्ट्रेलिया के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज फिर से नाकाम रहे जिससे बांग्लादेश शनिवार को यहां पहले टेस्ट क्रिकेट मैच के तीसरे दिन ऐतिहासिक जीत के करीब पहुंच गया। पहली पारी में केवल 198 रन बनाने वाले ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे दिन का खेल समाप्त होने तक अपनी दूसरी पारी में चार विकेट पर 161 रन बनाए थे और वह अब भी बांग्लादेश से 67 रन पीछे है। बांग्लादेश ने अपनी पहली पारी में 426 रन बनाए थे।

ऑस्ट्रेलिया का दारोमदार अब कैमरन ग्रीन (नाबाद 43) और एलेक्स कैरी (नाबाद 19) पर टिका है। ऑस्ट्रेलिया को अगर हार से बचना है तो उसे दूसरी पारी में बड़ा स्कोर खड़ा करना होगा जो अभी नामुमकिन लग रहा है। बांग्लादेश को ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट जीत हासिल करने के लिए छह विकेट चाहिए, जो संभवतः इस प्रारूप में उसकी की सबसे बड़ी जीत होगी।

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बांग्लादेश ने सुबह अपनी पहली पारी छह विकेट पर 351 रन से आगे बढ़ाई और उसमें 75 महत्वपूर्ण रन जोड़े। बांग्लादेश ने इस तरह से पहली पारी में 228 रन की बढ़त हासिल की। मेहदी हसन मिराज ने 65 रन की शानदार पारी खेली।

इसके बाद उन्होंने गेंदबाजी में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए दिन के अंत में स्टीव स्मिथ को आउट किया। मेहदी ने हसन महमूद (14) के साथ 46 रन, ताइजुल इस्लाम (17) के साथ 18 रन और फिर तस्कीन अहमद (14) के साथ 46 रन की उपयोगी साझेदारी की। बांग्लादेश के बल्लेबाजों ने ऑस्ट्रेलिया की खराब फील्डिंग का भी पूरा फायदा उठाया जिसने तीसरे दिन तीन कैच छोड़े।

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जोश हेज़लवुड ने शनिवार को गिरे सभी चार विकेट लिए। उन्होंने 89 रन देकर छह विकेट लिए। इस बीच उन्होंने मेहदी को आउट करके टेस्ट क्रिकेट में 300 विकेट पूरे किए।

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ऑस्ट्रेलिया की दूसरी पारी की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसके दोनों सलामी बल्लेबाज जेक वेदरल्ड (00) और ट्रैविस हेड (17) जल्दी आउट हो गए जिससे स्कोर दो विकेट पर 37 रन हो गया। इन दोनों को तेज गेंदबाज हसन महमूद ने आउट किया जिन्होंने पहली पारी में 55 रन देकर छह विकेट लिए थे। मार्नस लाबुशेन क्रीज पर काफी सक्रिय नजर आए, लेकिन स्पिनर ताइजुल इस्लाम की एक सीधी गेंद को चूक गए और 59 गेंदों में 31 रन बनाकर बोल्ड हो गए।

मैच को बचाने की ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदें स्मिथ के कंधों पर टिकी थीं और इस अनुभवी खिलाड़ी ने धैर्य के साथ बल्लेबाजी की लेकिन तब मैच बांग्लादेश की ओर मुड़ गया, जब मेहदी ने अपनी ही गेंद पर स्मिथ (44) का कैच लपका। इससे ऑस्ट्रेलिया का स्कोर चार विकेट पर 122 रन हो गया।

Sat, 15 Aug 2026 17:21:43 +0530

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