रेल यात्रा में दिव्यांग यात्रियों को 25% से 75% तक किराया छूट, आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन
रेलवे के दिव्यांगजन यात्रियों को सम्मानजनक, सुलभ एवं किफायती यात्रा सुविधा देंने के लिए निरंतर प्रयास जारी है। इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाते हुए पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल ने वर्ष 2026 में 17 जून तक 651 दिव्यांग रियायत कार्ड जारी किए हैं।
ONLINE आवेदन
दिव्यांग रियायत कार्ड बनवाने के इच्छुक यात्री ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए जिला चिकित्सा अस्पताल द्वारा जारी दिव्यांग प्रमाणपत्र, पश्चिम मध्य रेलवे के अंतर्गत आने वाले सरकारी अस्पताल द्वारा जारी रेलवे रियायत प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र तथा पासपोर्ट आकार का फोटो आवश्यक है। ये दस्तावेज भारतीय रेलवे की वेबसाइट https://divyangjanid.indianrail.gov.in पर अपलोड करने होते हैं। सत्यापन के उपरांत कार्ड जारी कर दिया जाता है और आवेदक को एसएमएस के माध्यम से सूचित किया जाता है।
रेल्वे देता है राहत
रेलवे द्वारा दृष्टिहीन, मानसिक रूप से अस्वस्थ, श्रवण एवं वाणी बाधित तथा शारीरिक रूप से दिव्यांग (ऑर्थोपेडिकली हैंडिकैप्ड) यात्रियों को 25% से 75% तक किराये में विशेष छूट प्रदान की जाती है। यह रियायत दिव्यांग रियायत कार्ड के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है, जो टिकट बुकिंग के समय काउंटर एवं ऑनलाइन दोनों माध्यमों से उपयोग में लाया जा सकता है। यदि दिव्यांग यात्री के साथ कोई सहयोगी (एस्कॉर्ट) यात्रा करता है, तो उसे भी समान रियायत का लाभ प्राप्त होता है। अधिक जानकारी अथवा सहायता के लिए भोपाल मंडल कार्यालय के दिव्यांग सेल पर कार्य दिवसों में प्रातः 10:00 बजे से सायं 06:00 बजे के मध्य संपर्क कर सकते हैं।
अनिल राजभर ने अखिलेश यादव पर साधा निशाना, बोले – ‘जिन्होंने भैंस चरते देखी, उन्हें विकास…’
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। दरअसल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर सवाल उठाते हुए एक पुस्तक जारी की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने उन पर तीखा पलटवार किया है और अखिलेश यादव की टिप्पणियों को ‘सैफई मानसिकता’ का नतीजा बताया है। अनिल राजभर ने कहा कि समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव आज भी ‘सैफई मानसिकता’ से बाहर नहीं निकल पाए हैं। इसलिए उन्हें उत्तर प्रदेश में हो रहे बड़े बदलाव और तेज रफ्तार विकास दिखाई नहीं देता, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को “उत्तम प्रदेश” बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
दरअसल उन्होंने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि जिनके शासनकाल में परिषदीय विद्यालयों की हालत बहुत खराब थी, जहां बच्चे टाट लेकर स्कूल जाते थे और पेड़ों के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होते थे, वे आज शिक्षा व्यवस्था पर ज्ञान दे रहे हैं, जो हैरानी की बात है। अनिल राजभर ने कहा कि जिन लोगों ने अपने कार्यकाल में स्कूलों में भैंसें चरती देखी हों, उन्हें आज के बदले हुए सरकारी स्कूल कैसे अच्छे लग सकते हैं। आज बच्चों को आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं और अच्छी शिक्षा दी जा रही है, जो पहले कभी नहीं हुआ।
जानिए अनिल राजभर ने क्या कहा?
दरअसल योगी सरकार शिक्षा के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। इसके तहत वर्ष 2024-25 में ही साढ़े सात लाख से अधिक ऐसे बच्चों का स्कूलों में दाखिला कराया गया है, जो किसी कारण से पढ़ाई से दूर हो गए थे। साथ ही हर साल विशेष अभियान चलाकर बच्चों को दोबारा स्कूलों से जोड़ा जा रहा है, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और उसे बेहतर भविष्य का मौका मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि कायाकल्प योजना के तहत प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बड़े स्तर पर सुधार किए गए हैं। इसके चलते आज स्कूलों में बेहतर भवन, साफ शौचालय, सुरक्षित पीने का पानी, पर्याप्त फर्नीचर और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यही वजह है कि गरीब परिवार भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजकर गर्व महसूस कर रहे हैं, जो एक बड़ा सामाजिक बदलाव है।
अखिलेश यादव पर साधा निशाना
वहीं स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर अखिलेश यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अनिल राजभर ने जानकारी दी कि प्रदेश सरकार हर जिले में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। डॉक्टरों के साथ-साथ पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की व्यवस्था भी लगातार मजबूत की जा रही है। इस दिशा में केंद्र की मोदी सरकार का भी पूरा सहयोग मिल रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा मजबूत हो रहा है और आम लोगों को बेहतर इलाज मिल पा रहा है। अनिल राजभर ने अंत में कहा कि प्रदेश का पढ़ा-लिखा वर्ग सब कुछ अच्छी तरह समझता है और उसे यह अच्छे से पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है और “उत्तम प्रदेश” बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो पहले कभी संभव नहीं था।




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