Responsive Scrollable Menu

ईंधन पर विंडफॉल टैक्स घटा, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ा असर

ATF Windfall Tax: दुनिया भर में ऊर्जा के मोर्चे पर मची उथल-पुथल के बीच भारत सरकार ने एक अहम फैसला लिया है. सरकार की ओर से फ्यूल निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में कटौती की गई है. इस फैसले के तहत एविएशन टर्बाइन फ्यूल (विमानन ईंधन) और पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर बड़ी राहत दी गई है. वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात इस संबंध में एक अधिसूचना जारी की, जिसके बाद शनिवार से टैक्स की ये नई दरें लागू हो चुकी हैं.

ये भी पढ़ें: 80वें स्वतंत्रता दिवस पर विदेशी राजदूतों ने दी बधाई, भारत से रिश्तों को बताया खास

विंडफॉल टैक्स में कटौती का पूरा गणित

सरकार द्वारा किए गए ताजा बदलावों के मुताबिक, हवाई जहाज में इस्तेमाल होने वाले ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल गेन्स टैक्स को 2.5 रुपये प्रति लीटर घटा दिया गया है. इस कटौती के बाद अब यह दर 19.5 रुपये प्रति लीटर हो गई है. डीजल के निर्यात के मोर्चे पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 24 रुपये प्रति लीटर पर ही बरकरार रखा गया है, लेकिन इसके ऊपर लगने वाले 1.5 रुपये प्रति लीटर के सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर (रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस) को पूरी तरह से हटाकर शून्य कर दिया गया है. इसके साथ ही, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स को भी खत्म करके शून्य कर दिया गया है.

ये भी पढ़ें: रक्षा क्षेत्र में सुधारों का असर, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

 

 

Continue reading on the app

रक्षा क्षेत्र में सुधारों का असर, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

Indian Defence Production: रक्षा क्षेत्र में पिछले एक दशक में किए गए सुधारों का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। भारत ने सैन्य उपकरणों के उत्पादन और निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की है। सरकार के मुताबिक, भारत अब रक्षा क्षेत्र में पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर और मजबूत हुआ है और वैश्विक स्तर पर भी अपनी पहचान बना रहा है।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जारी सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, 2025-26 में भारत का रक्षा उत्पादन बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। 2013-14 में यह आंकड़ा सिर्फ 4,746 करोड़ रुपये था। यानी करीब एक दशक में रक्षा उत्पादन में कई गुना बढ़ोतरी हुई है।

80 से अधिक देशों में मिल रहा बाजार

2025-26 में रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों की हिस्सेदारी 76 प्रतिशत रही, जबकि निजी क्षेत्र ने 24 प्रतिशत योगदान दिया। भारत के रक्षा निर्यात में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। रक्षा निर्यात 2013-14 में 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 38,424 करोड़ रुपये हो गया। भारतीय सैन्य उपकरणों को अब 80 से अधिक देशों में बाजार मिल रहा है।

2029 तक सालाना 3 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य

2025-26 में कुल रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान 17,353 करोड़ रुपये यानी 45.16 प्रतिशत रहा, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने 21,071 करोड़ रुपये यानी 54.84 प्रतिशत का योगदान दिया। केंद्र सरकार ने 2029 तक सालाना 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करने का लक्ष्य तय किया है।

आवंटन में 112 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि

रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास के लिए आवंटन भी बढ़ाया गया है। यह राशि 2014-15 में 13,716.14 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 29,100.25 करोड़ रुपये हो गई है, जो 112 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि है। वर्ष 2022-23 से रक्षा रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए खोला गया है, ताकि नवाचार को बढ़ावा देने के साथ रक्षा उत्पादन को आधुनिक बनाया जा सके।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की 24 प्रयोगशालाओं में उपलब्ध परीक्षण सुविधाओं को डिफेंस टेस्टिंग पोर्टल (डीटीपी) के जरिए उद्योग के लिए सुलभ बनाया गया है। रक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से घरेलू निर्माता, स्टार्टअप और उद्योग सरकारी परीक्षण सुविधाओं का सशुल्क उपयोग करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा 

भारत की सर्वोच्च रक्षा खरीद संस्था रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) भी स्वदेशी खरीद के जरिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बढ़ावा दे रही है। परिषद ने 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक की डीआरडीओ द्वारा डिजाइन और भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित रक्षा प्रणालियों के लिए एओएन को मंजूरी दी है।

स्वदेशी रक्षा खरीद के तहत 97 तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों की करीब 62,000 करोड़ रुपये की खरीद और 156 एलसीएच ‘प्रचंड’ हेलीकॉप्टरों की करीब 62,700 करोड़ रुपये की खरीद को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं से देश की घरेलू एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षमता को मजबूती मिल रही है।

‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाया

रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (डीएपी) 2020 ने स्वदेशी खरीद और घरेलू विनिर्माण को मजबूत किया। इसके साथ ही भारतीय कंपनियों के लिए रक्षा क्षेत्र में डिजाइन, विकास और उत्पादन के अवसर बढ़ाए गए। इससे पहले रक्षा खरीद प्रक्रिया (डीपीपी) 2016 के जरिए रक्षा खरीद व्यवस्था को सरल बनाया गया और ‘मेक इन इंडिया’ को आगे बढ़ाया गया। इसने रक्षा खरीद से जुड़े बाद के सुधारों की नींव तैयार की।

सरकार के अनुसार, रक्षा खरीद मैनुअल (डीपीएम) 2025 ने करीब 1 लाख करोड़ रुपये की राजस्व खरीद प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया। इसके तहत मंजूरियों को तेज किया गया, स्वदेशी परियोजनाओं के लिए दंड प्रावधानों में राहत दी गई और दीर्घकालिक ऑर्डर का आश्वासन दिया गया।

(DISCLAIMER: हेडिंग, समरी और सबहेड के अलावा, पूरी खबर IANS न्यूज फीड से ली गई है. न्यूजनेशन खबर में किए गए किसी भी डेटा और फैक्ट्स की पुष्टि नहीं करता है.)

Continue reading on the app

  Sports

IND vs SL Test Weather: गॉल में फिर बारिश बनेगी टीम इंडिया के लिए रोड़ा? ऐसा रहेगा तीसरे दिन का मौसम

Galle Test Update: टेस्ट सीरीज के इस पहले मैच के शुरुआती दोनों दिन बारिश का दखल देखने को मिला. पहले दिन जहां 73 ओवर ही हुए, वहीं दूसरे दिन तो सिर्फ 43 ओवर का खेल हो सका. Mon, 17 Aug 2026 02:02:56 +0530

  Videos
See all

Pakistan Attack On Balochistan News Live: पाकिस्तानी सेना के हेलीकॉप्टर और ड्रोन तैनात! | Asim Munir #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-17T01:11:35+00:00

LIVE: Desh Ki Pathshala With Sushant Sinha | देश की पाठशाला Episode 60 | PM Modi Foreign Policy #tmktech #vivo #v29pro
2026-08-17T01:10:33+00:00
Editor Choice
See all
Photo Gallery
See all
World News
See all
Top publishers