Baba Ramdev on Mallikarjun Kharge: खड़गे के बयान के बाद हल्द्वानी में 'शुद्धिकरण' हवन पर बोले रामदेव, कहा- राजनीतिक विरोध हो, आपसी दुश्मनी नहीं
Baba Ramdev on Mallikarjun Kharge: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक पब्लिक एड्रेस के बाद उत्तराखंड के हल्द्वानी में कथित तौर पर किए गए शुद्धिकरण हवन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. इस पूरे मामले में अब योग गुरु बाबा रामदेव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राजनीतिक पार्टियों से संयम बरतने और देश में जाति तथा समुदाय के नाम पर नफरत नहीं फैलाने की अपील की है. बाबा रामदेव ने कहा कि राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच दुश्मनी नहीं होनी चाहिए.
क्या बोले बाबा रामदेव?
स्वामी रामदेव ने अपने बयान में सीधे तौर पर उन लोगों पर भी निशाना साधा है, जिन्हें लगता है कि देश में कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि भारत पूरी तरह बर्बाद हो चुका है. रामदेव के मुताबिक, ऐसा सोचने वाले लोग राजनीतिक रूप से खुद को ही बर्बाद कर चुके हैं और अब अचानक से खुद प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने का सपना देख रहे हैं.
प्रधानमंत्री बनने के लिए धैर्य रखना जरूरी है
उन्होंने न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए कहा कि अगर किसी को देश का प्रधानमंत्री बनना है तो उसे धैर्य रखना चाहिए. लोकतांत्रिक व्यवस्था में सत्ता हासिल करने के लिए लोगों का विश्वास जीतना जरूरी है. रामदेव ने मौजूदा राजनीतिक दलों को सलाह देते हुए कहा कि देश में अलग-अलग जातियों को आपस में लड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए और जाति, वर्ग या समुदाय के नाम पर नफरत का माहौल नहीं बनाना चाहिए. इस दौरान आचार्य बालकृष्ण भी उनके साथ मौजूद थे.
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राजनीतिक विरोध स्वाभाविक, लेकिन दुश्मनी नहीं
बाबा रामदेव ने अपने बयान में सत्ता पक्ष और विपक्ष के संबंधों को लेकर भी अहम बात कही है. उन्होंने बोला कि राजनीतिक विरोध होना स्वाभाविक है. लोकतंत्र में सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना और विपक्ष का अपनी नीतियों के साथ जनता के बीच जाना जरूरी होता है. हालांकि, राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत दुश्मनी में बदलना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं होता है.
शुद्धिकरण हवन के बाद आ रही प्रतिक्रियाएं
हल्द्वानी में 'शुद्धिकरण' हवन की घटना ने भी इसी राजनीतिक टकराव को चर्चा का मुख्य केंद्र बना रही है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के संबोधन के बाद हुए इस कार्यक्रम को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. ऐसे में रामदेव का बयान इस विवाद के बीच राजनीतिक दलों को संयम और सामाजिक सौहार्द का संदेश देने के तौर पर देखा जाता है.
जाति और समुदाय के नाम पर नफरत फैलाने से बचने की अपील
आज स्वामी रामदेव ने खास तौर पर राजनीतिक पार्टियों से जाति, वर्ग और समुदाय के आधार पर समाज में विभाजन पैदा करने से बचने की सलाह दी है. उनका कहना है कि देश की एकता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों की मुख्य जिम्मेदारी होनी चाहिए. उन्होंने राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखने वाले नेताओं को भी धैर्य रखने की सलाह दी है. बाबा रामदेव का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी लगातार तेज हो रही है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विचारों का मतभेद हो सकता है, लेकिन इसे दुश्मनी में नहीं बदलना चाहिए.
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