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राजस्थानी बंधेज से लेकर केसरिया पगड़ी तक, लाल किले पर हर साल कैसे बदलता रहा है PM मोदी का अंदाज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस समारोहों में शामिल होने के दौरान खास तरह की पगड़ियाँ पहनने की एक परंपरा रही है। हर साल उनकी पगड़ी का रंग, पैटर्न या क्षेत्रीय शैली उनके लाल किले वाले लुक में कुछ नयापन लाती है। राजस्थानी बांधनी और लहरिया स्टाइल से लेकर तिरंगे से प्रेरित डिज़ाइनों तक, यहाँ 2014 से 2026 तक पहनी गई उनकी पगड़ियों पर एक नजर डालते हैं। लगातार 13वीं बार स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देने के लिए, प्रधानमंत्री मोदी लाल किले पर पीले और सफ़ेद बंधनी पैटर्न वाली मैरून रंग की पगड़ी पहनकर पहुँचे। उन्होंने इस पारंपरिक पगड़ी के साथ सफ़ेद कुर्ता-पायजामा और भूरे रंग की नेहरू जैकेट पहनी थी। साल 2025 में, लाल किले से लगातार 12वीं बार स्वतंत्रता दिवस पर भाषण देते हुए पीएम मोदी ने एक आकर्षक केसरिया पगड़ी पहनी। इस गहरे रंग ने उनके पारंपरिक सफ़ेद पहनावे को एक खास उत्सव वाला लुक दिया।

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पीएम मोदी ने नारंगी, पीले और हरे रंग वाली शानदार राजस्थानी लहरिया पगड़ी पहनी। उन्होंने इसे सफ़ेद कुर्ते-पायजामे और नीली जैकेट के साथ पहना, जिससे उनके स्वतंत्रता दिवस के लुक में पारंपरिक टेक्सटाइल स्टाइल की झलक दिखी। 2023 के लुक में पीले, नारंगी, बैंगनी, हरे और लाल रंगों वाली राजस्थानी बांधनी पगड़ी शामिल थी। इस पसंद ने राजस्थान की समृद्ध कपड़ा परंपराओं को उजागर किया। पीएम मोदी की 2022 की पगड़ी अपने तिरंगे से प्रेरित डिज़ाइन के कारण खास थी, जिसमें सफ़ेद और हरे रंग की धारियां राष्ट्रीय ध्वज के रंगों को दर्शाती थीं। इस लुक को 'हर घर तिरंगा' पहल के सम्मान के तौर पर भी देखा गया। 2021 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने केसरिया रंग की पगड़ी पहनी थी, जिसमें गुलाबी रंग के कपड़े का एक लंबा सिरा (टेल) भी था। उन्होंने इस पगड़ी के साथ सफ़ेद कुर्ता, नीली जैकेट और सफ़ेद स्कार्फ़ पहना था।

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कोविड-19 महामारी के दौरान, पीएम मोदी ने हल्के केसरिया और क्रीम रंग की पगड़ी चुनी। ये रंग उनके पारंपरिक पहनावे के साथ पहने गए नारंगी और सफ़ेद स्कार्फ़ से मेल खा रहे थे। 2019 के स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए, पीएम मोदी ने एक बहुरंगी पगड़ी पहनी थी, जिसकी परतें एक तरफ़ साफ़ तौर पर इकट्ठा की गई थीं। उन्होंने इसके साथ एक ऐसा स्टोल पहना था जिसके बॉर्डर पर चमकीले और बारीक काम वाला डिज़ाइन बना था। पीएम मोदी की 2018 वाली पगड़ी केसरिया रंग की थी, जिस पर लाल रंग की डिटेलिंग थी और इसे पूरी तरह सफ़ेद कपड़ों के साथ पहना गया था। गहरे रंग के सजावटी बॉर्डर वाले सफ़ेद स्टोल ने इस लुक को पूरा किया। 2017 में, पीएम मोदी ने सुनहरी रेखाओं के मेल से सजी, चमकीले लाल और पीले रंग की पगड़ी पहनी थी। पारंपरिक रंगों और ज्यामितीय डिज़ाइन के मेल ने उनके लुक को उत्सव जैसा बना दिया था। 

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2016 के स्वतंत्रता दिवस के लुक में गुलाबी और पीले रंग की चमकदार बांधेज पगड़ी शामिल थी। लंबी लटकती हुई पूंछ वाली इस पगड़ी ने उनके सफ़ेद हाफ-स्लीव कुर्ते में एक उत्सव जैसा अंदाज़ जोड़ दिया। 2015 के स्वतंत्रता दिवस के लिए, प्रधानमंत्री मोदी ने पीले रंग की पगड़ी चुनी, जिस पर लाल और गहरे हरे रंग के आपस में मिलते-जुलते पैटर्न बने थे। उनके पारंपरिक पहनावे के साथ यह रंग-बिरंगी पगड़ी अलग ही नज़र आ रही थी। 2014 में लाल किले से अपने पहले स्वतंत्रता दिवस भाषण के लिए, पीएम मोदी ने राजस्थानी स्टाइल की एक आकर्षक पगड़ी पहनी थी। लाल रंग की इस पगड़ी में हरे रंग का कंट्रास्टिंग सिरा था और यह पारंपरिक जोधपुरी बंधेज स्टाइल से प्रेरित थी; इसे उन्होंने सादे सफेद कुर्ते और चूड़ीदार के साथ पहना था।

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Independence Day 2026: नारों से नहीं, अपनी आदतों से दिखाएं देशभक्ति, ये छोटी बातें बदल सकती हैं तस्वीर

Independence Day 2026: 15 अगस्त आते ही देशभर में तिरंगा, देशभक्ति के गीत और आजादी के जश्न की तस्वीरें नजर आने लगती हैं। लेकिन देश के प्रति सम्मान सिर्फ तिरंगा फहराने या सोशल मीडिया पर देशभक्ति की पोस्ट लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए।

हमारी रोजमर्रा की छोटी-छोटी जिम्मेदारियां भी बताती हैं कि हम अपने देश प्रति कितने सजग हैं।इस स्वतंत्रता दिवस अगर देश को सच में सम्मान देना है, तो इसकी शुरुआत अपनी आदतों में छोटे बदलाव से की जा सकती है।

तिरंगे के साथ उस जमीन का भी रखें सम्मान
स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे के साथ तस्वीरें लेना और देशभक्ति के कार्यक्रमों में शामिल होना गर्व की बात है। लेकिन कार्यक्रम खत्म होने के बाद अगर सड़क, मैदान या पार्क में कागज, प्लास्टिक की बोतलें और खाने का कचरा छोड़ दिया जाए, तो यह हमारी नागरिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है। 

ट्रैफिक नियमों का पालन भी देश के प्रति जिम्मेदारी
सड़क पर ट्रैफिक नियमों का पालन करना सिर्फ चालान से बचने का तरीका नहीं है। यह हमारी और दूसरे लोगों की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी है। लाल बत्ती पर रुकना, हेलमेट और सीट बेल्ट लगाना, गलत दिशा में वाहन न चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल से दूरी रखना और पैदल यात्रियों को रास्ता देना जैसी आदतें एक जिम्मेदार नागरिक की पहचान हैं। 

तिरंगे के साथ उस जमीन का भी रखें सम्मान

कूड़ा डस्टबिन में डालना छोटी बात नहीं
घर को साफ रखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी अपने आसपास के सार्वजनिक स्थानों को साफ रखना भी है। सड़क, बाजार, पार्क, बस स्टॉप या किसी अन्य सार्वजनिक जगह पर कूड़ा फेंकने से गंदगी बढ़ती है और सफाई की जिम्मेदारी भी बढ़ती है। इस स्वतंत्रता दिवस खुद से एक छोटा वादा करें। कूड़ा सड़क पर नहीं, डस्टबिन में डालेंगे।

पानी-बिजली बचाना भी जिम्मेदार नागरिक की निशानी
देश के संसाधनों की कद्र करना भी नागरिक जिम्मेदारी का हिस्सा है। जरूरत न होने पर लाइट-पंखे बंद करना, पानी की टोंटी खुली न छोड़ना और जरूरत से ज्यादा पानी का इस्तेमाल न करना ऐसी आदतें हैं, जिन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से अपनाया जा सकता है।

सार्वजनिक जगहों पर रखें दूसरों का भी ख्याल

सार्वजनिक जगहों पर रखें दूसरों का भी ख्याल
बस, ट्रेन या मेट्रो में जरूरतमंद व्यक्ति के लिए सीट छोड़ना, लाइन में अपनी बारी का इंतजार करना, सार्वजनिक स्थानों पर तेज आवाज से दूसरों को परेशान न करना और दीवारों या सार्वजनिक संपत्ति पर लिखने से बचना जैसी आदतें समाज को बेहतर बनाती हैं। अच्छा नागरिक वही है जो अपने अधिकारों के साथ दूसरों के अधिकारों और सुविधाओं का भी सम्मान करे।

सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं
सड़क की लाइट, पार्क की बेंच, बस स्टॉप, सार्वजनिक शौचालय, स्कूल और दूसरी सरकारी या सार्वजनिक सुविधाएं किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि समाज की साझा संपत्ति हैं।  इन चीजों को नुकसान पहुंचाना आखिरकार आम लोगों की ही सुविधा को प्रभावित करता है। इसलिए सार्वजनिक संपत्ति को अपना समझकर उसकी देखभाल करना भी देश के प्रति सम्मान का एक तरीका है।

Civic Sense की शुरुआत खुद से करें
हम अक्सर उम्मीद करते हैं कि सड़कें साफ रहें, ट्रैफिक व्यवस्थित हो और सार्वजनिक जगहें बेहतर हों। लेकिन इन बदलावों में नागरिकों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

इस स्वतंत्रता दिवस देश को दें अपनी अच्छी आदतों का तोहफा
देश के लिए हर नागरिक का योगदान अलग हो सकता है, लेकिन शुरुआत बेहद छोटी हो सकती है। सड़क पर कूड़ा न फेंकने से लेकर ट्रैफिक नियम मानने तक, हर जिम्मेदार कदम समाज को बेहतर बनाने में मदद करता है। इस स्वतंत्रता दिवस सिर्फ ‘जय हिंद’ कहें ही नहीं, अपने व्यवहार से भी हिंदुस्तान के प्रति सम्मान दिखाएं।

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'अपनी ही दुनिया में खो गए थे', यशस्वी जायसवाल पर भड़के संजय मांजरेकर, रन आउट में बताई उनकी गलती

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