मिलिट्री ट्रक पर लाद कर भारत ने ऐसी मिसाइल दागी है जिसने दुश्मन देशों में इस वक्त हड़कंप मचा कर रख दिया है। भारत ने ऐसा जोरदार धमाका किया है जिसने भारत के खिलाफ साजिश रचने वालों और दिल्ली को आंख दिखाने वालों के पैरों तले से जमीन खिसका के रख दी। आपको बता दें कि ओडिशा के तट से भारत ने अपनी नई लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल यानी कि एलआरएलएसएम का सफल परीक्षण यानी कि टेस्ट किया है। यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं है बल्कि भारत की उस नई ताकत का ऐलान है जो दुश्मन की सीमा के सैकड़ों किलोमीटर अंदर मौजूद सैन्य ठिकानों तक सटीक वार कर सकती है। उड़ीसा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से जैसे ही मिसाइल लॉन्च हुई, कुछ ही पलों में उसने अपने तय रास्ते पर उड़ान भरनी शुरू कर दी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक टेस्ट पूरी तरह से सफल रहा है और मिसाइल ने अपने सभी मिशन उद्देश्यों को हासिल कर लिया है। लेकिन आखिर इस मिसाइल को लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?
दरअसल आपको बता दें कि एलआरएलएसीएम एक क्रूज मिसाइल है। क्रूज मिसाइलें जो हैं यह बैलस्टिक मिसाइलों की तरह आसमान में बहुत ऊंचाई तक नहीं जाती बल्कि जमीन से बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हुए अपने लक्ष्य यानी कि टारगेट तक पहुंचती उन्हें नेहस्तनाबूद कर देती है। और यही वजह है कि दुश्मन के रडार इन्हें आसानी से ट्रैक नहीं कर पाते। इतना ही नहीं यह रास्ते में अपना मार्ग भी यानी कि रास्ता भी बदल सकती है। जिससे एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे रोकना और भी ज्यादा मुश्किल हो जाता है। अब हम ग्राफिक्स के जरिए समझते हैं कि रास्ता बदल सकती है कैसे यह लॉन्ग रेंज लैंड अटैक क्रूज मिसाइल। सबसे पहले लंबी दूरी तक यह मार कर सकती है। जमीन पर बने टारगेट को यह निशाना बनाती है। जीपीएस, आईएएस और दूसरे नेविगेशन सिस्टम से डायरेक्शन यह लेती है। दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए कम ऊंचाई पर यह उड़ सकती है। अब आप यह समझिए कि इस टेस्ट की सबसे बड़ी अहमियत क्या है?
रक्षा एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह मिसाइल भारत की डीप स्ट्राइक क्षमता को एक बहुत बड़ी मजबूती देने वाली है। डीप स्ट्राइक यानी दुश्मन की सीमा के काफी अंदर मौजूद एयरबेस, रडार स्टेशन, मिसाइल लॉन्च साइट, कमान सेंटर और सैन्य मुख्यालय जैसे अहम ठिकानों पर दूर से ही सटीक हमला करने की इसकी क्षमता है। मान लीजिए किसी दुश्मन देश का एयरबेस उसकी सीमा के सैकड़ों किलोमीटर अंदर मौजूद है। सामान्य परिस्थितियों में वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो सकता है। लेकिन एलआरएलएसीएम यानी कि क्रूज मिसाइलें बिना सीमा पार किए भी ऐसे ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखती है। उन्हें नस्तनाबूद कर सकती है और यही वजह है कि आधुनिक युद्ध में डीप स्ट्राइक क्षमता को निर्णायक माना जाता है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह मिसाइल पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित की गई है। इसके विभिन्न सिस्टम जो है यह डीआरडीओ की लैब और भारतीय उद्योगों ने मिलकर इसे तैयार किए हैं। यानी भारत अब इस तरह की रणनीतिक क्षमता के लिए विदेशी तकनीक पर निर्भर नहीं रहेगा और यही वजह है कि एलआरएलएसीएम का यह सफल परीक्षण सिर्फ एक मिसाइल टेस्ट नहीं माना जा रहा है।
यह भारत की बढ़ती डीप स्ट्राइक क्षमता, रक्षा, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक ताकत का एक बहुत बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। ऐसी क्षमता जो किसी भी संभावित दुश्मन को यह संदेश देती है कि अब भारत सिर्फ अपनी सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है। जरूरत पड़ने पर दुश्मन की सीमा के काफी अंदर मौजूद उसके सबसे अहम सैन्य [संगीत] ठिकाने भी भारतीय पहुंच से बाहर नहीं है। और आधुनिक युद्ध के दौर में यही तकनीक किसी भी देश की सबसे बड़ी रणनीतिक बढ़त मानी जाती है। और यह काम, यह टेस्ट, यह सफल परीक्षण अब भारत ने कर लिया है। जिसने भारत के दुश्मन देशों की टेंशन इस वक्त बढ़ा दी है। और लगातार सिर्फ यह एक मिसाइल टेस्ट नहीं डीआरडीओ ने लगातार ऐसे कई धमाके किए हैं पिछले कुछ दिनों में जिसने दुश्मन देशों की चिंता को बढ़ा कर रख दिया है।
Continue reading on the app
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन में G7 समिट के दौरान गर्मजोशी से हाथ मिलाया; यह 16 महीनों में उनकी पहली आमने-सामने की मुलाकात थी। यह मुलाकात तब हुई जब नेता फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की मेज़बानी में हो रहे समिट के लिए इकट्ठा हुए थे। कार्यक्रम स्थल से आई तस्वीरों में पीएम मोदी को ट्रंप का मुस्कुराते हुए अभिवादन करते देखा गया, जिसके बाद दोनों नेता दुनिया के अन्य नेताओं के साथ अपनी-अपनी जगह पर बैठे। हालांकि, मोदी-ट्रंप की मशहूर गले मिलने वाली तस्वीर इस बार देखने को नहीं मिली। पीएम मोदी और ट्रंप के बीच यह मुलाकात, फरवरी 2025 में पीएम की वॉशिंगटन यात्रा के बाद आमने-सामने की पहली बातचीत थी। यह यात्रा ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करने के कुछ ही समय बाद हुई थी। दोनों नेताओं की यह मुलाकात भारत-अमेरिका संबंधों में हालिया तनाव के माहौल में हुई; यह तनाव 'ऑपरेशन सिंदूर' से जुड़ी घटनाओं और भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ के कारण बढ़ा था।
समिट के दौरान अहम कूटनीतिक गतिविधियां
प्रधानमंत्री मोदी समिट में हिस्सा लेने के लिए दो दिन के दौरे पर एवियन पहुंचे। यह G7 समिट में प्रधानमंत्री मोदी की लगातार सातवीं मौजूदगी है, जो वैश्विक चर्चाओं में भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का कार्यक्रम उच्च-स्तरीय कूटनीतिक मुलाकातों से भरा हुआ है। वह कई द्विपक्षीय बैठकें करेंगे, जिनमें कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ बातचीत शामिल है। इन मुलाकातों में संबंधों को मजबूत करने और अहम क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करने पर ध्यान केंद्रित किए जाने की उम्मीद है। शाम को वह फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित गाला डिनर में अन्य विश्व नेताओं के साथ शामिल होंगे।
इस समिट के एजेंडे में ग्लोबल इकोनॉमिक स्टेबिलिटी, एनर्जी सिक्योरिटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्षों और व्यापक जियोपॉलिटिकल घटनाक्रमों पर फोकस किए जाने की उम्मीद है। हालांकि भारत G7 का सदस्य नहीं है, फिर भी वह इस फोरम में नियमित रूप से शामिल होता रहा है। उम्मीद है कि नई दिल्ली इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल 'ग्लोबल साउथ' की चिंताओं को उजागर करने और विकासशील देशों को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर ज़्यादा सहयोग को बढ़ावा देने के लिए करेगी।
Continue reading on the app