राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि बहस, बातचीत, विरोध और प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन लोगों को अपनी ज़िम्मेदारियों का भी ध्यान रखना चाहिए। भागवत ने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और नज़रिए होना स्वाभाविक है, जहाँ लोग अपनी बात रख सकते हैं और दूसरों की बातों का जवाब दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि अलग राय रखना और जनहित में सवाल उठाना ज़रूरी है और ऐसा मज़बूती से किया जाना चाहिए। कस्तूरचंद पार्क में स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए RSS प्रमुख ने कहा, "अलग-अलग विचार होंगे और उन विचारों को व्यक्त करने के अलग-अलग तरीके होंगे। यही लोकतंत्र है। इसलिए, बातचीत, बहस और अपने तर्क रखने और दूसरों के तर्कों का जवाब देने की प्रक्रिया होती है। अलग-अलग दृष्टिकोण स्वाभाविक रूप से सामने आएंगे, और कभी-कभी विरोध भी जरूरी होता है। जब जनहित में सवाल उठाए जाते हैं, तो उन्हें मजबूती से उठाया जाना चाहिए। हमें उनके पीछे अपनी ताकत लगानी चाहिए।"
संविधान निर्माण के दौरान डॉ. बी.आर. अंबेडकर के भाषणों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश इन मुद्दों पर उनके दिखाए रास्ते पर चल सकता है। उन्होंने कहा विरोध और आंदोलन हो सकते हैं... सब कुछ लोकतंत्र का हिस्सा है। लेकिन ऐसा करते समय हमें हमेशा अपनी जिम्मेदारियों का ध्यान रखना चाहिए। जब डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने संविधान निर्माताओं द्वारा देश को संविधान दिए जाने के दौरान बात की थी, तो उन्होंने अपने दो भाषणों में इन सभी पहलुओं को संबोधित किया था। हम उस रास्ते पर चल सकते हैं। भागवत ने भारत के युवाओं को सही ढंग से जोड़ने और उनका मार्गदर्शन करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, यह कहते हुए कि वे देश की "डेमोग्राफिक डिविडेंड" (जनसांख्यिकीय लाभांश) हैं और अगर उन्हें अच्छी तरह से तैयार किया जाए तो वे एक बड़ी संपत्ति बन सकते हैं।
उन्होंने कहा भारत के युवा देश की 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' हैं, और उन्होंने उन्हें सही ढंग से जोड़ने और उनका मार्गदर्शन करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर युवाओं को अच्छी तरह से तैयार किया जाए, तो वे देश के लिए एक संपत्ति बन सकते हैं, लेकिन अगर नहीं, तो वे समाज पर बोझ बन सकते हैं। भागवत ने कहा कि आज के युवा लगभग 30 वर्षों में बुजुर्ग पीढ़ी बन जाएंगे और उन्हें भी अपने बाद आने वाली पीढ़ी का ध्यान रखना होगा और उनके प्रति विचारशील होना होगा। स्वतंत्रता दिवस का 80वां समारोह 'विकसित भारत@2047 के लिए युवा शक्ति' की व्यापक थीम के तहत आयोजित किया जा रहा है, जिसमें भारत के युवाओं को देश की विकास यात्रा के केंद्र में रखा गया है। यह समारोह लाल किले से पीएम मोदी के लगातार 13वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन का भी प्रतीक है, जो देश के राजनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर है।
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