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Railway GDCE Recruitment 2026: रेलवे में 1,421 पदों पर भर्ती शुरू, 14 सितंबर तक करें आवेदन

रेलवे में नौकरी की तैयारी कर रहे कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। ईस्ट कोस्ट रेलवे ने GDCE 2026 के तहत 1,421 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती में सहायक लोको पायलट, स्टेशन मास्टर, मालगाड़ी प्रबंधक, जूनियर इंजीनियर और तकनीशियन समेत कई पद शामिल हैं। पात्र कर्मचारी RRC भुवनेश्वर की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से 14 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

ईस्ट कोस्ट रेलवे ने General Departmental Competitive Examination (GDCE) 2026 के तहत विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस भर्ती अभियान के जरिए कुल 1,421 पद भरे जाएंगे। रेलवे में कार्यरत पात्र कर्मचारी निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

भर्ती में ALP और तकनीशियन, कमर्शियल क्लर्क कम टिकट कलेक्टर, गुड्स ट्रेन मैनेजर, स्टेशन मास्टर और जूनियर इंजीनियर जैसे पद शामिल हैं। पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता और अन्य पात्रता अलग-अलग निर्धारित की गई है।

आयु सीमा
उम्मीदवारों की उम्र की गणना 1 जनवरी 2027 के आधार पर होगी। सामान्य वर्ग के लिए अधिकतम आयु 42 वर्ष है। OBC उम्मीदवारों को 3 वर्ष और SC/ST उम्मीदवारों को 5 वर्ष की छूट दी जाएगी। इस तरह OBC के लिए अधिकतम आयु 45 वर्ष और SC/ST के लिए 47 वर्ष होगी।

किस पद पर कितना वेतन स्तर?
ALP और तकनीशियन: पे लेवल-2
कमर्शियल क्लर्क-कम-टिकट कलेक्टर: पे लेवल-3
गुड्स ट्रेन मैनेजर: पे लेवल-5
स्टेशन मास्टर और जूनियर इंजीनियर: पे लेवल-6

चयनित उम्मीदवारों का वेतन संबंधित पे लेवल और रेलवे के लागू नियमों के अनुसार निर्धारित किया जाएगा।

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Independence Day: ‘वंदे मातरम्’ से ‘इंकलाब जिंदाबाद’ तक, ये 10 नारे सुनकर जाग उठेगा देशभक्ति का जज्बा 

Independence Day 2026: भारत की आजादी की कहानी सिर्फ आंदोलनों, संघर्षों और बलिदानों की कहानी नहीं है, बल्कि उन नारों की भी कहानी है, जिन्होंने लाखों भारतीयों के भीतर आजादी की लौ जगाई। ‘वंदे मातरम्’ से लेकर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ तक, ऐसे कई नारे स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों के लिए जोश और एकजुटता का प्रतीक बने। भारत सरकार के आजादी से जुड़े आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विरोध और राष्ट्रीय एकता की आवाज बन गया था।

15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आइए जानते हैं ऐसे ही 10 ऐतिहासिक नारों के बारे में, जिनकी गूंज आज भी देशभक्ति का जज्बा पैदा करती है।

1. वंदे मातरम्
‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन के सबसे प्रभावशाली राष्ट्रवादी नारों में शामिल रहा। इसे देश और मातृभूमि के प्रति प्रेम और समर्पण की अभिव्यक्ति के तौर पर इस्तेमाल किया गया। 1905 में बंगाल विभाजन के विरोध के दौरान भी इसकी गूंज सुनाई दी। 

2. इंकलाब जिंदाबाद
‘इंकलाब जिंदाबाद’ आजादी के आंदोलन के सबसे चर्चित नारों में से एक है। यह नारा क्रांतिकारी आंदोलन और युवाओं के जोश से गहराई से जुड़ा रहा। आज भी ‘इंकलाब जिंदाबाद’ सुनते ही स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी दौर की याद ताजा हो जाती है। 

3. जय हिंद
‘जय हिंद’ आज देश के सबसे लोकप्रिय अभिवादनों और राष्ट्रभक्ति के नारों में से एक है। यह विशेष रूप से नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज से जुड़ा माना जाता है। आजादी के संघर्ष में इस छोटे लेकिन प्रभावशाली नारे ने राष्ट्रीय एकता और देश के प्रति समर्पण की भावना को मजबूत किया। 

4. करो या मरो
‘करो या मरो’ महात्मा गांधी के नेतृत्व में 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ा ऐतिहासिक आह्वान था। इसने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अंतिम और निर्णायक संघर्ष की भावना को मजबूत किया। भारत छोड़ो आंदोलन ने स्वतंत्रता की लड़ाई को एक नए चरण में पहुंचाया।

5. साइमन गो बैक
‘Simon Go Back’ ब्रिटिश सरकार द्वारा गठित साइमन कमीशन के विरोध में गूंजा था। भारतीयों ने कमीशन में किसी भारतीय प्रतिनिधित्व के न होने का विरोध किया और देशभर में प्रदर्शन हुए। यह नारा ब्रिटिश शासन के प्रति भारतीयों के विरोध की बुलंद आवाज बन गया।

6. सरफरोशी की तमन्ना
‘सरफरोशी की तमन्ना’ देशभक्ति की भावना से जुड़ी बेहद लोकप्रिय पंक्ति है, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान युवाओं में जोश पैदा किया। यह शहादत, साहस और देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने की भावना का प्रतीक बन गई।

7. तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा
‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के सबसे प्रसिद्ध आह्वानों में गिना जाता है। इस संदेश ने आजादी के लिए संघर्ष और बलिदान की भावना को मजबूती दी। नेताजी की विचारधारा और आजाद हिंद फौज की कहानी आज भी स्वतंत्रता संग्राम के साहसिक अध्यायों में शामिल है।

8. पूर्ण स्वराज
‘पूर्ण स्वराज’ का नारा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में पूर्ण स्वतंत्रता की मांग का प्रतीक बना। इसका मतलब था कि भारत को ब्रिटिश शासन से पूरी तरह स्वतंत्र होना चाहिए, न कि केवल सीमित राजनीतिक अधिकार मिलने चाहिए।

9. भारत माता की जय
‘भारत माता की जय’ देश के प्रति सम्मान और मातृभूमि के प्रति समर्पण की भावना व्यक्त करने वाला लोकप्रिय नारा रहा है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आज तक यह नारा राष्ट्रीय आयोजनों और देशभक्ति के अवसरों पर गूंजता रहा है।

10. अंग्रेजों भारत छोड़ो
‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन की भावना को सीधे तौर पर व्यक्त करता था। इस आंदोलन ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ देशव्यापी संघर्ष को नई ऊर्जा दी। आजादी के आंदोलन में इस आह्वान ने भारतीयों के दृढ़ संकल्प और स्वतंत्रता की मांग को स्पष्ट रूप से सामने रखा।

आज भी जिंदा है उन नारों की गूंज
आजादी के 80 साल बाद भी ये नारे सिर्फ इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं हैं। इनके पीछे स्वतंत्रता सेनानियों का संघर्ष, साहस, त्याग और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा छिपा है। ‘वंदे मातरम्’, ‘इंकलाब जिंदाबाद’ और ‘जय हिंद’ जैसे नारे आज भी राष्ट्रीय गौरव और एकता की भावना को मजबूत करते हैं। भारत सरकार भी स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों और उनके बलिदानों को याद करने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचा रही है।

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IND vs SL: पडिक्कल ने शतक से मचाया धमाल, गॉल टेस्ट के पहले दिन भारत का हल्ला बोल, श्रीलंका की हालत खराब

ind vs sl 1st test: देवदत्त पडिक्कल की नाबाद शतकीय पारी से भारत ने श्रीलंका के खिलाफ पहले टेस्ट के शुरुआती दिन शनिवार को 73 ओवर में दो विकेट पर 288 रन बनाए. पडिक्कल 178 गेंदों में 12 चौकों और एक छक्के की मदद से 131 रन बनाकर नाबाद हैं, जबकि ऋषभ पंत 36 गेंदों में दो चौकों की मदद से 27 रन बनाकर उनका साथ दे रहे हैं. Sat, 15 Aug 2026 18:34:00 +0530

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