Earthquake: इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में भूकंप के तेज झटके, रिक्टर स्केल पर 6.7 मापी गई तीव्रता
Earthquake in Indonesia: इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, भूकंप का केंद्र पालु शहर के पास स्थित है। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 6.7 मापी गई है।
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अमेरिका-ईरान शांति समझौते पर मंडराया संकट: 300 बिलियन डॉलर के 'रिकंस्ट्रक्शन पैकेज' पर मचा घमासान, जानें पूरा विवाद
US Iran peace deal: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए 19 जून को शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने थे, लेकिन अब एक नए विवाद ने पूरी प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। विवाद की जड़ में 300 बिलियन डॉलर का कथित 'रिकंस्ट्रक्शन पैकेज' (पुनर्निर्माण पैकेज) है। ईरान का दावा है कि शांति समझौते के लिए यह आर्थिक मदद अनिवार्य है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।
ट्रम्प ने क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान को 300 बिलियन डॉलर का भुगतान नहीं कर रहा है। ट्रम्प ने इन खबरों को 'फेक न्यूज' करार देते हुए कहा कि ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने पर सहमति जताई है। ट्रम्प के इस कड़े रुख ने इस समझौते की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है कि आखिर दोनों देशों के बीच किस बात पर सहमति बनी है।
ईरान के लिए क्यों जरूरी है यह पैकेज?
तेहरान का मानना है कि यह राशि महज कोई आर्थिक पैकेज नहीं, बल्कि युद्ध से हुए नुकसान की 'क्षतिपूर्ति' है। ईरान का तर्क है कि महीनों के संघर्ष और आर्थिक दबाव के बाद देश को स्थिर करने के लिए यह आर्थिक राहत और पुनर्निर्माण सहयोग एक बुनियादी शर्त है। ईरान इसे समझौते का अहम हिस्सा मानता है, जिसके बिना स्थायी शांति संभव नहीं है।
मुआवजा या निवेश? उलझन में दोनों पक्ष
इस विवाद का एक तकनीकी पहलू यह भी है कि दोनों पक्ष इस पैकेज को अलग-अलग नजरिए से देख रहे हैं। ईरान इसे युद्ध के मुआवजे के तौर पर देख रहा है, जबकि पश्चिमी मीडिया इसे 'निवेश और पुनर्निर्माण कार्यक्रम' के रूप में चित्रित कर रहा है। माना जा रहा है कि अमेरिका सीधे नकद देने के बजाय निजी निवेश और अंतर्राष्ट्रीय परियोजनाओं के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था को सहारा देने की रणनीति अपना सकता है। यह मॉडल ट्रम्प के सलाहकारों के पुराने 'आर्थिक विकास से स्थिरता' के सिद्धांतों जैसा है।
समझौते के भविष्य पर संकट
यह विवाद केवल पैसों का नहीं, बल्कि साख और राजनीतिक शक्ति का परीक्षण बन गया है। यदि ईरान अपनी आर्थिक मांगों पर अड़ा रहता है और वाशिंगटन इसे सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने से इनकार करता है, तो 19 जून को प्रस्तावित यह शांति समझौता विफल हो सकता है। युद्ध के बाद की यह अनिश्चितता न केवल मध्य-पूर्व, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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