Shiprocket IPO को अंतिम दिन 99.38 गुना सब्सक्रिप्शन मिला, QIB खंड में सबसे ज्यादा मांग
ई-कॉमर्स समाधान मुहैया कराने वाली कंपनी शिपरॉकेट लिमिटेड के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को बोली के अंतिम दिन शुक्रवार को 99.38 गुना अभिदान मिला। एनएसई के आंकड़ों के अनुसार, शिपरॉकेट के 1,617.5 करोड़ रुपये के आईपीओ में पेश किए गए 9,44,36,030 शेयरों के मुकाबले 9,38,51,66,560 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। पात्र संस्थागत खरीदारों (क्यूआईबी) के लिए आरक्षित खंड में 122.80 गुना बोलियां लगाई गईं जबकि गैर-संस्थागत निवेशकों के खंड को 88.99 गुना बोलियां मिलीं।
वहीं, खुदरा निवेशक खंड को 46.42 गुना बोलियां प्राप्त हुई। इसके पहले, शिपरॉकेट लिमिटेड ने मंगलवार को एंकर निवेशकों से 727.41 करोड़ रुपये जुटाए थे। इस आईपीओ के लिए 92-97 रुपये प्रति शेयर का मूल्य दायरा तय किया गया था।
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इस निर्गम में 885.50 करोड़ रुपये तक के नए इक्विटी शेयरों की पेशकश और 732 करोड़ रुपये तक के शेयरों की बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल है।
PM Narendra Modi ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का किया आह्वान, समुद्री मार्गों पर चेताया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को चेतावनी दी कि कुछ देशों द्वारा संसाधनों और रणनीतिक समुद्री मार्गों का हथियारीकरण, भारत की आर्थिक सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर रहा है। इसके साथ ही उन्होंने विदेशी आपूर्तियों पर देश की निर्भरता को कम करने के लिए ऊर्जा क्षेत्र में अधिक आत्मनिर्भरता का आह्वान किया। मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को ऊर्जा और खनिजों सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में घरेलू क्षमता को मजबूत करने की आवश्यकता है, क्योंकि भू-राजनीतिक तनाव बाहरी स्रोतों पर निर्भरता के जोखिमों को तेजी से उजागर कर रहे हैं।
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किसी देश का नाम लिए बिना, मोदी ने कहा कि ईंधन और दवाओं से लेकर प्रौद्योगिकी तक के संसाधनों का उपयोग तेजी से भू-राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जबकि रणनीतिक भौगोलिक मार्गों का भी हथियारीकरण किया जा रहा है। उनकी यह टिप्पणी ईरान के साथ अमेरिका-इजरायल युद्ध और तेहरान की जवाबी कार्रवाई की पृष्ठभूमि में आई है, जिसने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक प्रमुख मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले नौवहन को गंभीर रूप से बाधित किया है। मोदी ने कहा कि भू-राजनीतिक संघर्षों ने ऊर्जा में आत्मनिर्भर बनने के महत्व को रेखांकित किया है।
उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के व्यापक प्रयास के तहत अपने अप्रयुक्त अपतटीय भंडारों का बड़े पैमाने पर दोहन करना चाहता है। इस संदर्भ में उन्होंने हाल ही में स्वीकृत 84,084 करोड़ रुपये की समुद्र मंथन राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना का उल्लेख किया, जिसका मकसद अगले पांच वर्षों में गहरे पानी और अत्यधिक गहरे पानी के क्षेत्रों में तेल और गैस की खोज में तेजी लाना है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तेल और गैस खोज तथा उत्पादन के लिए भारत के 99 प्रतिशत अवसादी बेसिनों को भी खोल दिया है, जिससे उन क्षेत्रों तक पहुंच का विस्तार हुआ है जो पहले वाणिज्यिक अन्वेषण के लिए काफी हद तक बंद थे।
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इस कदम का उद्देश्य घरेलू हाइड्रोकार्बन संसाधनों का दोहन करना और वैश्विक ऊर्जा मूल्य व आपूर्ति झटकों से भारत के जोखिम को कम करना है। प्रधानमंत्री ने पिछले 12 वर्षों में अपनी सरकार की उपलब्धियों को भी गिनाया और कहा कि पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) का दायरा 70 शहरों से बढ़कर 700 शहरों तक पहुंच गया है, और अब 2014 के 22 लाख घरों के मुकाबले 1.75 करोड़ घरों में इस ईंधन की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा, सौर ऊर्जा से बिजली का उत्पादन एक दशक पहले के दो गीगावाट से बढ़कर 160 गीगावाट हो गया है।
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