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Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज पर शिव-पार्वती को लगाएं ये भोग, इस मंत्र के जाप से मिले सुखी दांपत्य का आशीर्वाद

Hariyali Teej 2026: सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। पूजा में सही भोग और मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। ऐसे में अगर आप भी हरियाली तीज पर शिव-पार्वती की पूजा कर रहे हैं तो जानिए कौन-से सात्विक भोग अर्पित करें और किस मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है।

हरियाली तीज के दिन घरों और मंदिरों में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। सुहागिन महिलाएं व्रत रखकर माता पार्वती से सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। इस दिन पूजा के दौरान सात्विक भोग लगाने और मंत्रों का जाप करने की धार्मिक परंपरा भी है।

शिव-पार्वती को लगाएं ये भोग
हरियाली तीज पर माता पार्वती को घेवर और मालपुआ अर्पित करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा चावल की खीर, सूजी का हलवा और पंचामृत भी भोग में शामिल किए जा सकते हैं।

पंचामृत बनाने के लिए दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का इस्तेमाल किया जाता है। मौसम के अनुसार केला, अनार और आम जैसे फल भी भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित किए जा सकते हैं।

मान्यता है कि भगवान को भोग लगाते समय मन में श्रद्धा और भाव होना सबसे महत्वपूर्ण है। भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों में बांटा जा सकता है।

सुखी दांपत्य के लिए करें इस मंत्र का जाप
हरियाली तीज की पूजा में माता पार्वती के मंत्र का जाप भी किया जाता है। अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना से इस मंत्र का जाप करने की धार्मिक मान्यता है:-
“देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥”
पूजा के दौरान शांत मन से मंत्र का जाप करने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। इसके बाद प्रसाद वितरित करें।

पूजा में रखें इन बातों का ध्यान
हरियाली तीज पर पूजा करते समय साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए। पूजा स्थल को स्वच्छ करके शिव-पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद जल, फूल, फल, भोग और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धा के साथ अर्पित करें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार पूजा में दिखावे से ज्यादा श्रद्धा और भाव का महत्व होता है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार ही भोग तैयार करें और पूरे परिवार के साथ शांत मन से पूजा करें।

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Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज व्रत में भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, वरना अधूरी रह सकती है पूजा

सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरियाली तीज का पर्व मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई जगहों पर महिलाएं झूला झूलने, तीज के गीत गाने और सुहाग सामग्री से जुड़े पारंपरिक रीति-रिवाजों में भी हिस्सा लेती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरियाली तीज के व्रत में सिर्फ पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि मन और व्यवहार में संयम रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। कुछ ऐसी बातें हैं, जिन्हें व्रत के दौरान करने से बचने की सलाह दी जाती है।

व्रत के दौरान मन को रखें शांत
हरियाली तीज पर व्रत रखने वाली महिलाओं को पूरे दिन शांत और सकारात्मक रहने की कोशिश करनी चाहिए। किसी से विवाद करना, गुस्सा करना या अपशब्द बोलना धार्मिक दृष्टि से उचित नहीं माना जाता। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण करते हुए मन को शांत रखने की मान्यता है।

पूजा में रखें शुद्धता का ध्यान
पूजन के दौरान साफ और शुद्ध सामग्री का इस्तेमाल करना चाहिए। सुहाग सामग्री अर्पित करते समय टूटी या खराब वस्तुओं से बचने की धार्मिक मान्यता है। पूजा की सामग्री को श्रद्धा के साथ तैयार करना और शिव-पार्वती को विधि-विधान से अर्पित करना चाहिए।

कपड़ों के रंग को लेकर क्या मान्यता है?
हरियाली तीज के दिन हरे और लाल रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। वहीं, कुछ धार्मिक परंपराओं में काले और सफेद रंग के कपड़ों से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि, रंगों से जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में अलग हो सकती हैं।

तीज की कथा अधूरी न छोड़ें
हरियाली तीज की पूजा में व्रत कथा सुनने का भी विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता के अनुसार कथा को श्रद्धापूर्वक पूरा सुनना चाहिए। इसके बाद आरती कर भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण किया जाता है।

घर के बड़ों का सम्मान करें
धार्मिक परंपराओं में बड़ों का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है। इसलिए पूजा के बाद घर के बुजुर्गों का सम्मान करें और उनके चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें। व्रत के दौरान घर में सकारात्मक और शांत वातावरण बनाए रखना बेहतर माना जाता है।

नोट: ऊपर बताए गए नियम धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित हैं। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में हरियाली तीज की पूजा-पद्धति और व्रत के नियम अलग हो सकते हैं।

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