Shivraj Singh Chouhan ने नकारा Punjab के साथ RDF बकाया में भेदभाव का आरोप
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें पंजाब के ग्रामीण विकास कोष (आरडीएफ) की बकाया राशि जारी नहीं करने की बात कही गई थी। चौहान ने कहा कि पंजाब को हमेशा नियमों के अनुसार उसका पूरा हक मिलता रहा है। चंडीगढ़ में पत्रकारों से बातचीत में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पंजाब के साथ कभी किसी तरह का भेदभाव नहीं किया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘ नियमों के अनुसार पंजाब को हमेशा उसकी पूरी बकाया राशि मिलती रही है और भविष्य में भी मिलती रहेगी।’’ आगे सवाल पूछे जाने पर चौहान ने कहा कि अगर पंजाब सरकार को कोई समस्या है तो वह उनसे आकर मुलाकात कर सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं उनके कृषि मंत्री और अन्य मंत्रियों को आमंत्रित करता हूं... कई बार मैं उन्हें बुलाता हूं, लेकिन वे आते नहीं हैं।’’ चौहान चंडीगढ़ में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के तहत केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) आधारित प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना की शुरुआत के लिए पहुंचे थे। चौहान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इसे ‘बेहद गैर-जिम्मेदाराना, भ्रामक और सरासर झूठ’ करार दिया।
चीमा ने आरोप लगाया कि भाजपा नेता झूठ बोलने में माहिर हैं और जनता के सामने पेश करने से पहले तथ्यों को तोड़-मरोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार के सामने हर संभव मंच पर लगातार आरडीएफ कोष का मुद्दा उठाया है। चीमा ने दावा किया कि केंद्र सरकार के पास पंजाब का 9,821 करोड़ रुपये का ग्रामीण विकास कोष (आरडीएफ) बकाया है।
NCSC ने जाति उत्पीड़न शिकायत पर Himachal DGP और ACS को दिल्ली तलब किया
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने पुलिस के एक उप अधीक्षक (डीएसपी) द्वारा लगाए गए जाति आधारित उत्पीड़न के आरोपों के मामले में शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को 20 अगस्त को नयी दिल्ली में उसके समक्ष पेश होने के लिए कहा है। एक आधिकारिक नोटिस के अनुसार, एनसीएससी के सदस्य पार्थ बिस्वास इस मामले की सुनवाई करेंगे। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह एवं सतर्कता) आर डी नजीम और पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी को मामले से जुड़े सभी प्रासंगिक दस्तावेज, रिकॉर्ड, और इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट साथ लाने के निर्देश दिए गए हैं।
आयोग ने यह भी संकेत दिया है कि शिकायतकर्ता उपाधीक्षक (डीएसपी) विजय कुमार रघुवंशी को भी सुनवाई के दौरान उपस्थित रहने के लिए कहा जा सकता है। यह विवाद रघुवंशी का सरकारी वाहन वापस लिए जाने के बाद शुरू हुआ था। एनसीएससी को तीन जून को दी गई अपनी शिकायत में डीएसपी ने आरोप लगाया कि एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को लिफ्ट देने के बाद उनके खिलाफ यह कार्रवाई की गई।
उन्होंने इस घटना को जाति आधारित उत्पीड़न बताया। आयोग ने शिकायत मिलने के बाद 30 जून को तत्कालीन कार्यवाहक डीजीपी तिवारी को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी थी।
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