Narendra Modi ने Independence Day पर 2047 तक विकसित भारत का संकल्प दोहराया
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर शनिवार को देश को 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने नई रफ्तार पकड़ी है और अब 140 करोड़ देशवासियों के संकल्प और सामर्थ्य को रोकना नामुमकिन है। ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन मोदी ने कहा कि भारत को अब छोटे सपनों के साथ आगे बढ़ने के बजाय बड़े सपने देखने और ऊंचे संकल्प लेने होंगे। उन्होंने कहा कि बड़े सपने सोच का विस्तार करते हैं और दृढ़ संकल्प होने पर कठिनाइयों तथा आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप सामने आता है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘भारत ने 2047 में, जब देश की आजादी के 100 वर्ष पूरे होंगे, विकसित राष्ट्र बनने का बड़ा सपना देखा है और 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ से इस लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश विकसित होने का संकल्प लेता है, तो यह दुनिया की नजरों में हमारे साहस का परिचय बन जाता है। दुनिया हमारी तरफ देखने का नजरिया बदलने के लिए मजबूर हो जाती है।’’ मोदी ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश के करोड़ों नागरिकों ने, चाहे वे दलित, पीड़ित, वंचित, आदिवासी, गांव या शहर में रहने वाले, गरीब या मध्यम वर्ग के हों और देश के किसी भी हिस्से से आते हों, एक संकल्प और समर्पण के साथ देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए योगदान दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया, ‘‘इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि इतनी कम समय में 25 करोड़ देशवासी गरीबी से बाहर निकले हैं।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पहले ‘फ्रैजाइल फाइव’ देशों में गिना जाता था, लेकिन पिछले 12 वर्षों में देश दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है।
मोदी ने कहा कि आजादी के समय देश ने बहुत से सपने देखे थे, लेकिन अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश ने रफ्तार पकड़ी है और तेज गति से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के संकल्प पर जोर देते हुए कहा कि भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है।
उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में बहुत कुछ सस्ता और जल्दी मिल सकता है, लेकिन इससे देश की अपनी क्षमता विकसित नहीं होती।’’ उन्होंने कहा कि अपने हितों की सुरक्षा भारत को खुद करनी होगी और इसी उद्देश्य से ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ तथा ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे अभियानों को आगे बढ़ाया जा रहा है। सेमीकंडक्टर क्षेत्र का उदाहरण देते हुए मोदी ने कहा कि आजादी के बाद लंबे समय तक भारत में इसका कोई बड़ा संयंत्र नहीं बन पाया, लेकिन अब देश में तीन सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू हो चुके हैं और उनमें उत्पादित सेमीकंडक्टर का निर्यात भी शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले सात-आठ वर्षों में कई और सेमीकंडक्टर संयंत्र शुरू होने वाले हैं और यह विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ने का महत्वपूर्ण मार्ग है।
मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए महात्मा गांधी समेत सभी स्वतंत्रता सेनानियों और महान क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद पहली बार 15 अगस्त को लाल किले पर ‘वंदे मातरम्’ गूंज रहा है और इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर यह ऐतिहासिक पल है। उन्होंने हाल में देश के कुछ हिस्सों में आई बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि पूरा देश उनके साथ खड़ा है।
80th Independence Day: Red Fort से पहली बार गूंजा राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्'
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक लाल किले पर आयोजित होने वाले समारोह में पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गाया गया। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ की विरासत के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस भव्य समारोह में लाल किले की प्राचीर पर की गई पुष्प सज्जा के केंद्र में राष्ट्रीय ध्वज और उसके दोनों ओर हिंदी में ‘वंदे मातरम्’ लिखा हुआ था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशभक्ति के जोश और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच लाल किले से 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह का नेतृत्व किया।
समारोह में मौजूद अतिथियों के साथ सेना के बैंड ने ‘वंदे मातरम्’ की धुन बजाई और सभी ने राष्ट्रीय गीत गाया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और राष्ट्रगान हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम्’ गूंज रहा है और जब देश ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष मनाया जा रहा है, तब इससे बेहतर अवसर कुछ नहीं हो सकता।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशभक्ति का उद्घोष बन गया था। संविधान सभा ने 1950 में इसे भारत के राष्ट्रीय गीत के रूप में अपनाया था। सरकार ने पिछले नवंबर में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर चलने वाले समारोह की शुरुआत की थी।
‘वंदे मातरम्’ की रचना पहले स्वतंत्र रूप से की गई थी और बाद में इसे चट्टोपाध्याय के उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। इसे पहली बार रवींद्रनाथ टैगोर ने 1896 में कलकत्ता (अब कोलकाता) में कांग्रेस के अधिवेशन में गाया था। ‘वंदे मातरम्’ पहली बार सात नवंबर 1875 को साहित्यिक पत्रिका ‘बंगदर्शन’ में प्रकाशित हुआ था।
बाद में चट्टोपाध्याय ने इसे अपने उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया, जो 1882 में प्रकाशित हुआ।
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