AI मानव चेतना का विकल्प न बने: प्रयागराज में बोले Justice Ajit Kumar
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अजित कुमार ने शुक्रवार को यहां कहा कि प्रत्येक आविष्कार के दो पहलू होते हैं, एक सकारात्मक और दूसरा नकारात्मक और यही बात कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी लागू होती है। शंख संस्थान के तत्वावधान में चिन्मय मिशन अमृत महोत्सव के अवसर पर ‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में मानव चेतना’ विषय पर आयोजित विशेष संवाद को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति अजित कुमार ने कहा कि जब मानव मन नकारात्मकता के साथ कार्य करता है, तो उसके परिणाम अंधकारमय होते हैं, जबकि सकारात्मक दृष्टिकोण से किए गए प्रयास उज्ज्वल परिणाम देते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम एआई का उपयोग प्रत्येक कार्य और प्रत्येक उद्देश्य के लिए करने लगें और अपने मन को कहीं और लगा दें, तो हम उन मानवीय क्षमताओं को खो सकते हैं, जिनकी मानवता को आवश्यकता है।’’ न्यायमूर्ति अजित कुमार ने कहा, ‘‘आत्म-चेतना मनुष्य के भीतर पहले से ही विद्यमान है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग मानव जीवन को बेहतर बनाने और क्षमताओं के विस्तार के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन इसे मानव चेतना का विकल्प नहीं बनने देना चाहिए।’’ मुख्य वक्ता स्वामी मित्रानंद, आध्यात्मिक मार्गदर्शक, चिन्मय मिशन, चेन्नई ने कहा, ‘‘ भारत ने सत्य को जानने की अपनी खोज को कभी नहीं छोड़ा है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक नए युग के रूप में हमारे सामने आई है, लेकिन इसके आने से सत्य की खोज नहीं रुकेगी। हम अपनी सत्य की खोज में एआई का पूर्ण सहयोग ले सकते हैं।’’ उन्होंने कहा कि एआई अभी एक तकनीक है।
वह कृत्रिम है, मौलिक नहीं। इस पृथ्वी पर बहुत कुछ एआई के माध्यम से हासिल किया जा सकता है, लेकिन ‘मोक्ष’ अथवा अनुभूति को इसके माध्यम से प्राप्त नहीं किया जा सकता। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आचार्य शंतनु महाराज ने कहा, ‘‘ एआई मनुष्य की चेतना का उत्पाद है।
कोई उत्पाद मूल वस्तु का विकल्प नहीं हो सकता और न ही उसका स्थान ले सकता है। एआई से उत्तर प्राप्त किए जा सकते हैं, लेकिन प्रश्न पूछने की क्षमता मनुष्य के भीतर है। यही क्षमता मानव चेतना की विशिष्टता को स्थापित करती है।’’ कार्यक्रम में न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव, सॉलिसिटर जनरल शशि प्रकाश सिंह, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल शिव कुमार पाल, अपर महाधिवक्ता एम.सी. चतुर्वेदी, शंख के संयोजक आलोक परमार सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
Vadodara Court: पत्नी की हत्या में पूर्व Police अधिकारी को उम्रकैद, साथी को 5 साल जेल
गुजरात के वडोदरा जिले की एक अदालत ने शुक्रवार को एक पूर्व पुलिस निरीक्षक को वर्ष 2021 में अपनी पत्नी की हत्या करने के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई। इसी के साथ अदालत ने उसके सहयोगी और स्थानीय कांग्रेस नेता को पांच साल कैद की सजा सुनाई। करजन के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश आर. एस. पुराणी ने वडोदरा ग्रामीण पुलिस थाने के तत्कालीन निरीक्षक अजय देसाई और उनके सहयोगी किरीट सिंह जडेजा पर दो-दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।
जडेजा ने 2020 में कांग्रेस के टिकट पर करजन विधानसभा उपचुनाव लड़ा था, लेकिन वह हार गया था। देसाई फिलहाल जेल में है, जबकि जडेजा जमानत पर बाहर है। अदालत ने कहा कि मुकदमे के दौरान दोनों आरोपियों ने जेल में जितनी अवधि बिताई है, उसे उनकी सजा की अवधि में समायोजित किया जाएगा।
देसाई को जुलाई 2021 में हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इससे करीब डेढ़ महीने पहले करजन में उसकी पत्नी स्वीटी पटेल का अधजला शव मिला था। स्वीटी ने 2014 में अपने पहले पति से तलाक लेने के बाद देसाई से शादी की थी।
दोनों का एक बेटा है। पुलिस के मुताबिक, देसाई ने चार और पांच जून की दरमियानी रात किसी बात को लेकर हुए झगड़े के बाद स्वीटी का गला घोंट दिया। इसके बाद उसने शव को एक चार पहिया वाहन में रखा और पड़ोसी भरूच जिले के दहेज राजमार्ग पर अटाली गांव में जडेजा के निर्माणाधीन होटल ले गया।
पुलिस के अनुसार, देसाई और जडेजा ने होटल के पीछे शव को जलाने और उसे ठिकाने लगाने की कोशिश की थी।
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