जरूरत की खबर- क्या कोलेस्ट्रॉल सचमुच हमारा दुश्मन है?:डॉक्टर से समझें गुड-बैड कोलेस्ट्रॉल का साइंस, ये कब जरूरी और कब खतरनाक
कोलेस्ट्रॉल का नाम सुनते ही अक्सर दिमाग में एक ही बात आती है, यह शरीर के लिए नुकसानदायक है। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है। कोलेस्ट्रॉल हमारी कोशिकाओं, हार्मोन और विटामिन D के निर्माण के लिए जरूरी है। परेशानी तब शुरू होती है, जब शरीर में इसका संतुलन बिगड़ जाता है और खासतौर पर LDL यानी बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने लगता है। सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर चुपचाप बढ़ता रहता है। न कोई दर्द होता है, न कोई खास लक्षण दिखाई देता है। कई बार पहली चेतावनी हार्ट अटैक या स्ट्रोक के रूप में सामने आती है। ‘इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च’ (ICMR) की हालिया स्टडी के मुताबिक, देश के 87.3% वयस्कों में लिपिड प्रोफाइल की कोई-न-कोई गड़बड़ी पाई गई। इनमें करीब 35.5 करोड़ लोग ऐसे हैं, जिन्हें न डायबिटीज है, न हाई ब्लड प्रेशर और न ही मोटापा। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि कोलेस्ट्रॉल क्या है और इसके बढ़ने का मतलब क्या है। इसलिए आज 'जरूरत की खबर' में कोलेस्ट्रॉल पर विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- डॉ. अमित सिंह, कंसल्टेंट, कार्डियोलॉजी, कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल, मुंबई सवाल- कोलेस्ट्रॉल क्या है? जवाब- कोलेस्ट्रॉल एक फैटी सब्सटेंस है, जो मोम की तरह होता है। यह शरीर की हर सेल में पाया जाता है। यह हार्मोन, विटामिन D और बाइल एसिड (भोजन पचाने वाला एसिड) प्रोडक्शन के लिए जरूरी होता है। सवाल- गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल में क्या फर्क है? जवाब- कोलेस्ट्रॉल फैट है। यह ब्लड में अकेले नहीं घूम सकता। इसलिए प्रोटीन के साथ मिलकर 'लिपोप्रोटीन' बनाता है। इसी रूप में यह पूरे शरीर में पहुंचता है। लिपोप्रोटीन मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं- 1. LDL (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) 2. HDL (हाई-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) ग्राफिक में गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल का फर्क देखिए- सवाल- शरीर में कोलेस्ट्रॉल आता कहां से है? जवाब- इसके दो मुख्य सोर्स हैं- सवाल- क्या कोलेस्ट्रॉल शरीर का दुश्मन है? जवाब- नहीं, सच इसके उलट है। दिक्कत कोलेस्ट्रॉल से नहीं, बल्कि इसके संतुलन बिगड़ने से होती है। जब ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल जरूरत से ज्यादा बढ़ जाता है तो यह आर्टरीज में जमा होने लगता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- कोलेस्ट्रॉल शरीर में कौन-से जरूरी काम करता है? जवाब- संतुलित मात्रा में कोलेस्ट्रॉल शरीर के कई जरूरी कामों में मदद करता है। ग्राफिक में इसके सभी काम देखिए- सवाल- कोलेस्ट्रॉल कैसे चेक करते हैं? जवाब- इसका पता लगाने के लिए 'लिपिड प्रोफाइल' ब्लड टेस्ट किया जाता है। टेस्ट में ब्लड के 4 मुख्य कंपोनेंट्स मापे जाते हैं- सवाल- लिपिड प्रोफाइल का सामान्य रेंज क्या है? जवाब- कॉडियोलॉजिस्ट डॉ. अमित सिंह के मुताबिक, वयस्कों में लिपिड प्रोफाइल की सामान्य रेंज आमतौर पर इस तरह है- टोटल कोलेस्ट्रॉल: 200 mg/dL (मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर) से कम। LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल): 100 mg/dL से कम। HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल): 40-80 (पुरुष), 50-80 (महिलाएं) ट्राइग्लिसराइड्स: 150 mg/dL से कम। सवाल- कोलेस्ट्रॉल कब खतरा बन जाता है? जवाब- जब ब्लड में कोलेस्ट्रॉल का लेवल लंबे समय तक सामान्य से ज्यादा रहता है, तो यह सेहत के लिए खतरा बन जाता है। शुरुआत में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते। लेकिन धीरे-धीरे आर्टरीज को नुकसान पहुंचता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक का रिस्क बढ़ जाता है। सवाल- हमारी कौन-सी आदतें हाई कोलेस्ट्रॉल का रिस्क बढ़ाती हैं? जवाब- रोजमर्रा की कई खराब आदतें बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकती हैं। जैसेकि- सवाल- कौन-से फूड बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं? जवाब- सैचुरेटेड और ट्रांस फैट वाले फूड्स ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं। पूरी लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- क्या खाने से गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है? जवाब- हां, हेल्दी फैट और फाइबर से भरपूर चीजें खाने से गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसकी लिस्ट ग्राफिक में देखिए- सवाल- कोलेस्ट्रॉल से जुड़े कॉमन मिथ और उनकी सच्चाई क्या है? जवाब- कोलेस्ट्रॉल को लेकर कई गलत धारणाएं हैं। इनकी वजह से कई बार लोग समय पर जांच नहीं कराते या लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव नहीं करते। कोलेस्ट्रॉल से जुड़े कॉमन मिथ और उनकी सच्चाई देखिए- सवाल- अगर कोलेस्ट्रॉल बढ़ जाए तो क्या करें? जवाब- सबसे पहले डॉक्टर से कंसल्ट करें और उन्हें लिपिड प्रोफाइल की रिपोर्ट दिखाएं। साथ ही खानपान और लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करें। अगर इन बदलावों से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल न हो तो डॉक्टर ‘स्टैटिन’ जैसी दवाएं दे सकते हैं। ये दवाएं हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए। सवाल- स्टैटिन ड्रग क्या होता है? जवाब- ये ऐसी दवाएं हैं, जो लिवर में कोलेस्ट्रॉल बनने की प्रक्रिया को कम करती हैं। इससे ब्लड में बैड कोलेस्ट्रॉल घटाने और हार्ट अटैक व स्ट्रोक का खतरा कम करने में मदद मिलती है। इन्हें डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए। सवाल- क्या बिना स्टैटिन के भी कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल हो सकता है? जवाब- हां, कुछ लोगों में हेल्दी डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और वेट कंट्रोल से कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है। सवाल- इसके लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव जरूरी हैं? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- …………………… जरूरत की ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- गले में हमेशा कुछ फंसा-फंसा लगता है: हो सकती है हिडन एसिडिटी, लक्षण नहीं दिखते, पर इलाज जरूरी, बता रहे हैं डॉक्टर कभी-कभी गले में खराश होना या खंखारकर गला साफ करना सामान्य है। लेकिन अगर बिना सर्दी-खांसी के भी बार-बार गला साफ करने का मन करे, गले में कुछ फंसा-फंसा महसूस हो या आवाज बार-बार बैठ जाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इसकी वजह ‘हिडन एसिडिटी’ हो सकती है। पूरी खबर पढ़िए…
आपका पैसा- इंवेस्टमेंट के 7 आसान नियम:एक्सपर्ट से समझें पैसा कब होगा डबल, कितना करें निवेश और कितना रिस्क लेना सही
हर निवेशक चाहता है कि उसका पैसा समय के साथ दोगुना, तीन गुना या चार गुना हो जाए। इसके लिए कुछ लोग जल्दबाजी में बिना प्लानिंग के निवेश शुरू कर देते हैं। इसकी एक वजह यह भी है कि उन्हें अलग-अलग जगहों से अलग-अलग सलाह मिलती है। कोई SIP को बेहतर बताता है, तो कोई शेयर बाजार में पैसा लगाने या गोल्ड में निवेश करने की सलाह देता है। ऐसे में सही फैसला लेना आसान नहीं होता। हालांकि निवेश के कुछ ऐसे नियम हैं, जिन्हें फॉलो करके आप अच्छा रिटर्न पा सकते हैं। इसलिए आज 'आपका पैसा' में निवेश के 7 आसान नियमों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट- कुशाग्र मोहन, फाइनेंशियल एक्सपर्ट, को-फाउंडर, निक्सेपा कैपिटल, लखनऊ सवाल- क्या निवेश का कोई नियम होता है? एक्सपर्ट इस पर क्या कहते हैं? जवाब- फाइनेंशियल एक्सपर्ट कुशाग्र मोहन के मुताबिक, निवेश को आसान बनाने के लिए 7 'रूल ऑफ थंब' हैं। इनसे यह समझने में मदद मिलती है कि- ये नियम निवेश की शुरुआत करने वालों के लिए एक आसान गाइड हैं। ध्यान रहे, हर निवेशक की इनकम, उम्र, फाइनेंशियल गोल और रिस्क लेने की क्षमता अलग होती है। इसलिए निवेश का कोई एक नियम हर व्यक्ति पर लागू नहीं होता है। सवाल- निवेश के 7 पॉपुलर नियम क्या हैं? जवाब- निवेश के 7 नियम अलग-अलग पहलुओं पर आधारित हैं। कुछ नियम निवेश की संभावित ग्रोथ का अनुमान लगाने में मदद करते हैं। जबकि कुछ सेविंग्स, बजट, रिस्क और इमरजेंसी फंड की योजना बनाने पर फोकस करते हैं। ग्राफिक में निवेश के 7 नियम देखिए- अब निवेश के इन सातों नियमों को विस्तार से समझिए- रूल ऑफ 72 इसको ऐसे समझिए- फायदा रूल ऑफ 72 की सीमाएं रूल ऑफ 114 इसको ऐसे समझिए- ध्यान रखें- यह भी ‘रूल ऑफ 72’ की तरह सिर्फ अनुमान है। इसके फायदे और सीमाएं भी लगभग वही हैं। रूल ऑफ 144 उदाहरण ध्यान रखें- यह नियम भी अनुमान पर आधारित है। वास्तविक रिटर्न बाजार और निवेश के परफॉर्मेंस पर निर्भर करता है। 50-30-20 रूल यह नियम कमाई को तीन हिस्सों में बांटने की सलाह देता है। उदाहरण अगर आपकी मंथली इनकम ₹50,000 है तो- ₹25,000 जरूरी खर्च ₹15,000 अन्य खर्च ₹10,000 बचत और निवेश फायदा ध्यान रखें- आय और जरूरतों के हिसाब से इस अनुपात में बदलाव किया जा सकता है। मिनिमम 10% इन्वेस्टमेंट रूल फायदा ध्यान रखें- 10% न्यूनतम सिर्फ सुझाव है। आय बढ़ने पर निवेश की राशि भी बढ़ानी चाहिए। 100 माइनस एज रूल जैसे- अगर आपकी उम्र 30 साल है- 100-30= 70 यानी कुल निवेश का करीब 70% इक्विटी और 30% सेफ ऑप्शन्स में रखना चाहिए। फायदे इमरजेंसी फंड रूल उदाहरण के लिए अगर आपका मासिक खर्च ₹10,000 है तो इमरजेंसी फंड में ₹30,000 से ₹60,000 तक रखने की कोशिश करें। सवाल- निवेश शुरू करने से पहले इमरजेंसी फंड बनाना क्यों जरूरी है? जवाब- इमरजेंसी फंड अचानक आने वाली आर्थिक मुश्किलों में सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। इसलिए निवेश शुरू करने से पहले इसे तैयार करने की सलाह दी जाती है। ग्राफिक में देखिए ये क्यों जरूरी है- सवाल- नए निवेशक इन नियमों को अपनाते समय कौन-सी गलतियां करते हैं? जवाब- नए निवेशक अक्सर कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उनका फाइनेंशिल प्लान प्रभावित हो सकता है। ग्राफिक में देखिए- सवाल- निवेश के किसी रूल को फॉलो करने का सही तरीका क्या है? जवाब- निवेश के नियम दिशा दिखाते हैं, लेकिन हर व्यक्ति की फाइनेंशियल कंडीशन अलग होती है। इसलिए किसी भी नियम को अपनाने से पहले अपनी आय, खर्च, फाइनेंशियल गोल और जोखिम उठाने की क्षमता का आकलन करें। साथ ही कुछ बाताें का ध्यान रखें- ………………………. ये खबर भी पढ़ें… आपका पैसा- ‘फाइनेंशियल मिनिमलिज्म’ का ट्रेंड:कम सामान, आसान जीवन, समझें इसके फायदे, जानें फालतू खर्चों को कैसे कंट्रोल करें महीने की शुरुआत में सैलरी खाते में आते ही लगता है कि इस बार जरूर बचत होगी। लेकिन महीने के आखिर तक अकाउंट फिर खाली होता है। समझ ही नहीं आता कि पैसा आखिर कहां खर्च हो जाता है। कई बार आर्थिक परेशानियों की वजह कोई बड़ी खरीदारी नहीं, बल्कि रोज के अनियोजित खर्च होते हैं। पूरी खबर पढ़ें…
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