US and Iran Agreement Signed Tomorrow: कल से सभी के लिए खुल जाएगा ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज!’.. ख़त्म हो जाएगा दुनियाभर से ऊर्जा का संकट!.. डोनाल्ड ट्रंप ने खुद कह दी ये बड़ी बात
US and Iran Agreement Signed Tomorrow: ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका-ईरान समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य खुल सकता है, ऊर्जा बाजार को राहत मिलेगी।IVF का दर्द, एक परिवार के सामने खड़ा सबसे बड़ा सवाल
गुरुग्राम के रहने वाले राहुल राठौर और मीनू राठौर ने भी बाकी परिवारों की तरह माता-पिता बनने का सपना देखा था. लंबे समय तक इलाज और इंतजार के बाद उन्होंने IVF तकनीक का सहारा लिया. जब उनके घर जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ तो परिवार में खुशियों का माहौल था. दोनों बच्चों के आने से ऐसा लगा कि उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी ख्वाहिश पूरी हो गई है. लेकिन कुछ महीनों बाद ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदलकर रख दिया.
जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि
राहुल और मीनू राठौर का दावा है कि बाद में कराए गए डीएनए परीक्षण में यह सामने आया कि जिन बच्चों को वे अपना समझकर पाल रहे थे, उनका जैविक संबंध उनसे मेल नहीं खाता. यह जानकारी मिलने के बाद परिवार गहरे सदमे में आ गया. जिस खुशी को वे अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि मान रहे थे, उसी के साथ अब कई सवाल जुड़ गए हैं.
कई तरह की शंकाएं पैदा हो गईं
परिवार का आरोप है कि उन्होंने दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित SCI International Hospital में IVF प्रक्रिया कराई थी. उनका कहना है कि इसी प्रक्रिया के बाद बच्चों का जन्म हुआ. लेकिन डीएनए रिपोर्ट सामने आने के बाद उनके मन में कई तरह की शंकाएं पैदा हो गईं. अब वे जानना चाहते हैं कि आखिर ऐसा कैसे हुआ और इसकी वजह क्या है?
सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर रिपोर्ट सही है तो फिर उनके असली बच्चे कहां हैं. परिवार का कहना है कि वे लगातार इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं. उनके मुताबिक यह सिर्फ एक कानूनी मामला नहीं है, बल्कि उनके जीवन और भावनाओं से जुड़ा विषय है. एक मां और पिता के लिए इससे बड़ा दर्द शायद ही कोई दूसरा हो सकता है.
पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी
राहुल और मीनू का कहना है कि उन्होंने इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब जानने की कोशिश की है. वहीं जब अस्पताल का पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई. परिवार का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के जरिए पूरे मामले की सच्चाई सामने आएगी.
वैज्ञानिक जांच के आधार पर ही निष्कर्ष
इस घटना ने IVF जैसी चिकित्सा प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा बढ़ा दी है. देश में हजारों परिवार इस तकनीक के जरिए माता-पिता बनने का सपना पूरा करते हैं. ऐसे में इस तरह का मामला सामने आने के बाद लोगों के मन में स्वाभाविक रूप से कई सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का भी मानना है कि ऐसे मामलों में तथ्यों और वैज्ञानिक जांच के आधार पर ही निष्कर्ष तक पहुंचा जाना चाहिए.
दो मासूम बच्चों का भविष्य भी चर्चा का विषय
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बीच दो मासूम बच्चों का भविष्य भी चर्चा का विषय बना हुआ है. परिवार का कहना है कि बच्चों के प्रति उनका प्यार और जिम्मेदारी आज भी वैसी ही है जैसी पहले थी. लेकिन साथ ही वे अपने उन बच्चों के बारे में भी जानना चाहते हैं, जिनकी तलाश में वे पिछले कई महीनों से जुटे हुए हैं.
राहुल राठौर और मीनू राठौर का कहना है कि वे इस लड़ाई को अंत तक लड़ेंगे. उनका दावा है कि वे अपने असली बच्चों का पता लगाने के लिए हर संभव कानूनी कदम उठाएंगे और जरूरत पड़ी तो देश की सर्वोच्च अदालत तक भी जाएंगे. फिलहाल उनकी जिंदगी एक ही सवाल के इर्द-गिर्द घूम रही है अगर ये बच्चे उनके नहीं हैं, तो उनके असली बच्चे आखिर कहां हैं?
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
IBC24
News Nation





















