जिंदा नास्त्रेदमस की 2 भविष्यवाणियां हुईं सच! अब तीसरी पर टिकीं निगाहें, पूरी दुनिया पर मंडराएगा खतरा
अपनी सटीक भविष्यवाणियों के लिए 'जिंदा नास्त्रेदमस' के नाम से मशहूर एथोस सालोमे ने दावा किया है कि साल 2026 के लिए की गई उनकी दो भविष्यवाणियां सच साबित हुई हैं. जबकि एक और डरावनी चेतावनी सच हो सकती है. सालोमे ने कोविड-19 महामारी और ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के निधन की सही भविष्यवाणी का दावा करते हैं. उन्होंने पिछले साल दिसंबर में 2026 के लिए 10 भविष्यवाणियों की हैं.
FCRA Amendment Bill 2026: FCRA संशोधन बिल 2026 को संयुक्त संसदीय समिति में भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है केंद्र सरकार
विदेशी अंशदान विनियमन कानून (FCRA) में संशोधन को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और विभिन्न संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी फंडिंग को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने के उद्देश्य से लाए जा रहे इस संशोधन विधेयक पर सरकार और विपक्ष पूरी तरह आमने-सामने खड़े हैं।
एक तरफ जहां सरकार इस कानून के जरिए विदेशी धन के संभावित दुरुपयोग को रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का तर्क दे रही है, वहीं विपक्षी दल इसे सामाजिक व धार्मिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सीधा हमला करार दे रहे हैं। इस बढ़ते राजनीतिक गतिरोध को समाप्त करने और संसद के भीतर एक सर्वसम्मत रास्ता निकालने के लिए अब सरकार विधेयक को सीधे पारित कराने के बजाय इसे संसद की संयुक्त समिति (JPC) को सौंपने की रणनीतिक तैयारी में जुट गई है।
FCRA संशोधन बिल 2026 को संयुक्त संसदीय समिति में भेजने के विकल्प पर विचार कर रही है केंद्र सरकार
विदेश से मिलने वाले फंड और अनुदान को नियंत्रित करने वाले विवादित FCRA (Foreign Contribution Regulation Amendment Bill, 2026) पर केंद्र सरकार बैकफुट पर जाने के बजाय आम सहमति का रास्ता तलाशती नजर आ रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सरकार इस विधेयक को संसद में सीधे पेश करने से पहले इसकी विस्तृत जांच और व्यापक समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने पर विचार कर रही है।
इसी सिलसिले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के तुरंत बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा स्पीकर से बंद कमरे में बैठक की। इससे पहले वे गतिरोध खत्म करने और विधेयक पर चर्चा की जमीन तैयार करने के लिए विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं के साथ भी कई दौर की बातचीत कर चुके हैं।
बिल को पूरी तरह वापस लेने और विवादित धारा 15 को हटाने की मांग पर अड़ा हुआ है विपक्ष
दूसरी ओर, विपक्षी खेमा इस विधेयक के मौजूदा स्वरूप को किसी भी कीमत पर स्वीकार करने के मूड में नहीं दिख रहा है। NCP-SP की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले तथा DMK के एक प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
DMK सांसद पी. विल्सन ने गृह मंत्री के समक्ष स्पष्ट मांग रखी कि कानून की सबसे विवादित धारा 15 को हटाया जाए और इस विधेयक को पूरी तरह वापस लिया जाए। इसके साथ ही कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वामपंथी दलों ने भी आरोप लगाया है कि सरकार इस संशोधन के माध्यम से विदेशी फंडिंग पाने वाली सामाजिक संस्थाओं, अस्पतालों और चैरिटेबल ट्रस्टों को अनावश्यक रूप से जांच के घेरे में ला रही है।
BAC की बैठक के एजेंडे से बाहर हुआ बिल, अब JPC के गठन पर टिकीं राजनीतिक गलियारों की निगाहें
सोमवार को आयोजित संसद की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक ने इन अटकलों को और अधिक बल दे दिया है, क्योंकि बैठक के आधिकारिक एजेंडे में FCRA संशोधन बिल और प्रस्तावित परिसीमन बिल दोनों में से किसी को भी शामिल नहीं किया गया था। सरकार द्वारा BAC के एजेंडे में इसे जगह न दिए जाने से मानसून सत्र के बचे हुए दिनों के भीतर इस विधेयक के पेश होने को लेकर अनिश्चितता और गहरा गई है।
अब संसद से लेकर मीडिया के गलियारों तक सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हुई हैं कि क्या सरकार विपक्ष की मांग के आगे कदम बढ़ाते हुए JPC का गठन करती है या फिर सत्र के अंतिम दिनों में कोई नया विधायी दांव खेलती है।
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