ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार मोर्चे पर तैनात कर दिए हैं। दरअसल ऑपरेशन सिंदूर 2 की तैयारी और दुनिया में जंग जैसे हालातों के बीच भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक बेहद ही चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रक्षा क्षेत्र पर नजर रखने वाले एक ग्लोबल रिसर्च इंस्टट्यूट सिपरी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि भारत तेजी से अपने न्यूक्लियर हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि 2014 तक भारत परमाणु हथियारों की संख्या में पाकिस्तान से पीछे था। सोचिए उस वक्त भारत के पास 90 से 110 परमाणु हथियार थे। जबकि पाकिस्तान के पास 100 से 120 परमाणु हथियार थे।
सिप्री की सबसे लेटेस्ट रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार हैं। जबकि पाकिस्तान के पास 170 न्यूक्लियर हथियार हैं। 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास 172 न्यूक्लियर हथियार थे। 2025 में इनकी संख्या 180 पहुंच गई। इसी बीच ऑपरेशन सिंदूर हुआ, जिसके बाद अब भारत के न्यूक्लियर हथियारों की संख्या 190 पहुंच गई है। यह एक बहुत बड़ी छलांग है। जबकि इसी सिपरी रिपोर्ट के मुताबिक 2024, 25 और 26 में पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों की संख्या 170 ही रही। इसी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने पहली बार 12 न्यूक्लियर हथियारों को डिप्लॉय कर दिया है। न्यूक्लियर हथियारों को डिप्लॉय करने का क्या मतलब होता है वो अब हम आपको बताते हैं।
दरअसल एक न्यूक्लियर हथियार के दो सबसे महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। पहला न्यूक्लियर वॉर हेड और दूसरा वेक्टर। वेक्टर अमूमन एक मिसाइल होती है जो न्यूक्लियर वॉर हेड को लेकर दुश्मन के टारगेट पर हमला करती है। न्यूक्लियर वॉर हेड्स और मिसाइलों को अलग-अलग जगह पर स्टोर किया जाता है। जरूरत पड़ने पर ही दोनों को अटैच किया जाता है। जब हमले की नौबत आती है तो मिसाइल पर न्यूक्लियर वॉर हेड को लगा दिया जाता है। मिसाइल पर न्यूक्लियर वॉर हेड लगने के बाद इसे तभी लॉन्च किया जा सकता है जब किसी के पास इसका सीक्रेट कोड हो। दरअसल इसका मतलब यह है कि भारत ने 12 मिसाइलों में न्यूक्लियर वॉर हेड्स को अटैच कर दिया है और इन मिसाइलों को दुश्मन की तरफ मुंह करके बैठा दिया गया है यानी तैनात कर दिया गया है।
छत्रपति शिवाजी महाराज इजराइल ने अपने और भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा ऐलान किया है जिसे सुनकर कुछ मुस्लिम देश बौखला जाएंगे। कई कन्व्टेड मुस्लिम तो समझ ही नहीं पाएंगे कि क्या तहलका मचा है। इजराइल ने ऐलान किया है कि वह मराठा साम्राज्य के महान शासक छत्रपति शिवाजी महाराज की एक भव्य मूर्ति अपने देश में लगाने जा रहा है। आप जानते ही हैं कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने औरंगजेब की सत्ता को चुनौती दी थी। औरंगजेब को तड़पने और मरने के लिए छोड़ दिया था। अब इजराइल उन्हीं महान छत्रपति शिवाजी महाराज को पहली बार अपने देश में लाना चाहता है। इजराइल चाहता है कि उसके देश के लोगों को भी पता चले कि छत्रपति शिवाजी महाराज की ताकत क्या थी।
इजराइल अपने देश के लोगों को यह भी बताना चाहता है कि कैसे यहूदी लोगों ने छत्रपति शिवाजी की सेना में मुगलों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। मुंबई में इजराइल के काउंसिल जनरल यानीव रेवाच ने ऐलान किया है कि हम छत्रपति शिवाजी की एक भव्य मूर्ति बनवा रहे हैं। यह सब कुछ हम भारत या दुनिया के किसी देश को खुश करने के लिए नहीं कर रहे बल्कि हम एक सांस्कृतिक बदलाव लाना चाहते हैं ताकि इजराइल के लोगों को भी भारत के इतिहास के बारे में पता चले। हम छत्रपति शिवाजी पर छपी किताबों को हिब्रू भाषा में ट्रांसलेट करवा रहे हैं ताकि शिवाजी महाराज की महानता और शौर्य की गाथाएं यहूदियों को भी पढ़ने को मिले। जिन शिवाजी महाराज ने मुगलों को विलुप्ति की कगार पर लाकर छोड़ दिया। उनके बारे में वामपंथियों ने कुछ नहीं बताया। बहरहाल आपको बता दें कि जब लगभग पूरी दुनिया में यहूदियों पर अत्याचार हो रहे थे तब भारत ही वह देश था जिसने यहूदियों को संरक्षण दिया। भारत वो इकलौता देश है जहां पर यहूदियों के खिलाफ कभी अत्याचार नहीं हुए। उनसे नफरत नहीं की गई। बताया जाता है कि 175 ईसा पूर्व में प्रताड़ना झेल रहे बेने इजराइल समुदाय के कुछ लोग महाराष्ट्र वाले इलाके में पहुंच गए।
अपनी युद्ध कला की परंपराओं और सैन्य कौशल के लिए पहचाने जाने वाले बेने इजराइल समुदाय के लोगों ने क्षेत्रीय सेनाओं में सेवा की। जिनमें मराठा राज्य से जुड़ी सेनाएं भी शामिल थी। छत्रपति शिवाजी महाराज ने बेने इजराइली लोगों की सैन्य क्षमताओं को पहचाना और उनमें से कुछ को अपनी सेना में शामिल भी कर लिया। जब मराठा शासक मुगलों को चुनौती दे रहे थे। उस समय यहूदी सैनिकों ने भी छत्रपति शिवाजी महाराज की सेना में पूरा योगदान दिया।
क्रिकेट के सबसे मशहूर मैदानों में गिने जाने वाले लॉर्ड्स को पहली बार आईसीसी की नाराजगी का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए पहले टेस्ट के बाद ICC ने यहां की पिच को 'अनसैटिस्फैक्टरी' यानी खराब करार दिया। इसके साथ ही मैदान के खाते में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ा गया।
इंग्लैंड ने यह टेस्ट 115 रन से जीता था, लेकिन मुकाबला उम्मीद से काफी जल्दी खत्म हो गया। बारिश के कारण खेल कई बार रुका, फिर भी मैच चौथे दिन सुबह ही खत्म हो गया। पूरे टेस्ट में 40 विकेट सिर्फ 996 गेंदों में गिर गए। यह करीब 140 साल में लॉर्ड्स पर खेला गया सबसे छोटा पूरा टेस्ट मैच रहा।
आईसीसी मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिच पर गेंद जरूरत से ज्यादा हिल रही थी। कई बार गेंद बहुत नीचे रह गई, जबकि कई बार उछाल अलग-अलग रहा। ऐसे में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना काफी मुश्किल हो गया।
पहले दिन 16 विकेट गिरे जबकि दूसरे दिन 17 बल्लेबाज आउट हुए। पाइक्रॉफ्ट का मानना है कि पिच ने गेंदबाजों को जरूरत से ज्यादा मदद दी और बल्लेबाजों के लिए हालात बहुत कठिन बना दिए। इसी वजह से मैच में गेंद और बल्ले के बीच सही मुकाबला देखने को नहीं मिला।
आईसीसी ने अपनी रिपोर्ट इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड को भेज दी है। बोर्ड चाहे तो 14 दिनों के भीतर इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है। हालांकि लॉर्ड्स का संचालन करने वाले एमसीसी ने माना है कि पिच उम्मीद के मुताबिक नहीं रही।
एमसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रॉब लॉसन ने कहा कि हाल के वर्षों में पिच और आउटफील्ड को बेहतर बनाने के लिए काफी काम किया गया है। लेकिन मई की तेज गर्मी और मैच से पहले हुई बारिश ने मैदानकर्मियों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दीं।
इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स भी पिच से खुश नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट पांच दिन का खेल है और अगर मैच इतनी जल्दी खत्म हो जाए तो यह खेल के लिए अच्छी बात नहीं है। स्टोक्स ने कहा कि ऐसे विकेट टेस्ट क्रिकेट के भविष्य के लिए मददगार नहीं हैं।
न्यूजीलैंड के कप्तान टॉम लैथम ने भी माना कि मैच का इतना जल्दी खत्म होना दुर्भाग्यपूर्ण रहा। इस बीच आईसीसी ने पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए तीसरे वनडे की पिच को भी खराब रेटिंग दी है। वहां की पिच को भी एक डिमेरिट पॉइंट मिला है। आईसीसी का कहना है कि पिच बहुत धीमी थी और स्पिन गेंदबाजों को जरूरत से ज्यादा मदद मिल रही थी। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि लॉर्ड्स और गद्दाफी स्टेडियम भविष्य में अपनी पिचों को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।