डोमिनिकन रिपब्लिक के ला रोमाना एयरपोर्ट पर हुए दर्दनाक प्लेन क्रैश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. वायरल वीडियो में दिख रहा है कि इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान विमान रनवे पर बार-बार उछलता रहा और कुछ सेकेंड बाद भीषण धमाके के साथ आग का गोला बन गया. शुरुआती जांच में लैंडिंग गियर की खराबी, दोबारा टेकऑफ की कोशिश, फुल फ्यूल टैंक और पायलट द्वारा कंट्रोल खोने जैसी बातों को हादसे का कारण माना जा रहा है.
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ऑपरेशन सिंदूर के बाद पहली बार भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक बहुत बड़ा खुलासा हुआ है। भारत ने पहली बार 12 परमाणु हथियार मोर्चे पर तैनात कर दिए हैं। दरअसल ऑपरेशन सिंदूर 2 की तैयारी और दुनिया में जंग जैसे हालातों के बीच भारत के परमाणु हथियारों को लेकर एक बेहद ही चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रक्षा क्षेत्र पर नजर रखने वाले एक ग्लोबल रिसर्च इंस्टट्यूट सिपरी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया है कि भारत तेजी से अपने न्यूक्लियर हथियारों की संख्या बढ़ा रहा है। आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि 2014 तक भारत परमाणु हथियारों की संख्या में पाकिस्तान से पीछे था। सोचिए उस वक्त भारत के पास 90 से 110 परमाणु हथियार थे। जबकि पाकिस्तान के पास 100 से 120 परमाणु हथियार थे।
सिप्री की सबसे लेटेस्ट रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के पास अब 190 परमाणु हथियार हैं। जबकि पाकिस्तान के पास 170 न्यूक्लियर हथियार हैं। 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पास 172 न्यूक्लियर हथियार थे। 2025 में इनकी संख्या 180 पहुंच गई। इसी बीच ऑपरेशन सिंदूर हुआ, जिसके बाद अब भारत के न्यूक्लियर हथियारों की संख्या 190 पहुंच गई है। यह एक बहुत बड़ी छलांग है। जबकि इसी सिपरी रिपोर्ट के मुताबिक 2024, 25 और 26 में पाकिस्तान के न्यूक्लियर हथियारों की संख्या 170 ही रही। इसी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत ने पहली बार 12 न्यूक्लियर हथियारों को डिप्लॉय कर दिया है। न्यूक्लियर हथियारों को डिप्लॉय करने का क्या मतलब होता है वो अब हम आपको बताते हैं।
दरअसल एक न्यूक्लियर हथियार के दो सबसे महत्वपूर्ण हिस्से होते हैं। पहला न्यूक्लियर वॉर हेड और दूसरा वेक्टर। वेक्टर अमूमन एक मिसाइल होती है जो न्यूक्लियर वॉर हेड को लेकर दुश्मन के टारगेट पर हमला करती है। न्यूक्लियर वॉर हेड्स और मिसाइलों को अलग-अलग जगह पर स्टोर किया जाता है। जरूरत पड़ने पर ही दोनों को अटैच किया जाता है। जब हमले की नौबत आती है तो मिसाइल पर न्यूक्लियर वॉर हेड को लगा दिया जाता है। मिसाइल पर न्यूक्लियर वॉर हेड लगने के बाद इसे तभी लॉन्च किया जा सकता है जब किसी के पास इसका सीक्रेट कोड हो। दरअसल इसका मतलब यह है कि भारत ने 12 मिसाइलों में न्यूक्लियर वॉर हेड्स को अटैच कर दिया है और इन मिसाइलों को दुश्मन की तरफ मुंह करके बैठा दिया गया है यानी तैनात कर दिया गया है।
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