पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त झेलने के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहराया अंतर्विरोध अब एक बड़ी राजनीतिक सुनामी में बदल चुका है। विधायक दल में पहले ही हो चुकी बड़ी टूट के बाद अब पार्टी के संसदीय दल में भी विभाजन होना तय माना जा रहा है।
शनिवार को तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी की ओर से बुलाई गई सांसदों और विधायकों की एक बेहद महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक ने पार्टी के अस्तित्व पर ही यक्ष प्रश्न खड़े कर दिए हैं। इस बैठक में नेताओं की बेहद कम और चौंकाने वाली उपस्थिति ने साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े बिखराव के मुहाने पर खड़ी है।
सांसदों और विधायकों की सामूहिक अनुपस्थिति से हड़कंप आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, टीएमसी के कुल 41 लोकसभा और राज्यसभा सांसदों में से महज छह सांसद ही ममता बनर्जी के आवास पर आयोजित इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे। स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब विधायकों के मोर्चे पर भी भारी असंतोष देखने को मिला। हालिया घटनाक्रम में पाला बदलने और विरोधी गुट से दूरी बनाए रखने वाले 21 विधायकों में से सिर्फ 8 विधायकों ने ही अपनी हाजिरी दर्ज कराई।
इस सामूहिक वॉकआउट में चुनाव प्रचार का मुख्य चेहरा रहीं सायानी घोष और महुआ मोइत्रा जैसी कद्दावर महिला नेताओं ने भी बैठक से दूरी बनाए रखी, जिससे यह संकेत साफ मिल रहे हैं कि पार्टी का एक बहुत बड़ा हिस्सा अब पूरी तरह बागी हो चुका है।
फिरहाद हकीम का इस्तीफा और मुस्लिम विधायकों में बड़ी फूट इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा प्रशासनिक और सामाजिक झटका तब लगा जब कोलकाता के मेयर और ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले दिग्गज नेता फिरहाद हकीम ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। दरअसल, ऋतब्रता बनर्जी की अगुवाई वाले विरोधी गुट में जब विधायक दल के भीतर फूट पड़ी थी, तब टीएमसी के टिकट पर जीते 31 मुस्लिम विधायकों में से 17 विधायक सीधे तौर पर बागी गुट के साथ चले गए थे।
शुक्रवार को हुई इस बैठक में बचे हुए 14 मुस्लिम विधायकों में से फिरहाद हकीम ही उपस्थित होने वाले इकलौते विधायक थे, जिन्होंने बैठक के तुरंत बाद अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। सभी मुस्लिम सांसदों की अनुपस्थिति ने पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में भी बड़ी सेंधमारी का इशारा कर दिया है।
दिल्ली पहुंचे सीएम शुभेंदु अधिकारी, भाजपा में मंथन तृणमूल कांग्रेस में मची इस भारी उथल-पुथल और मंत्रियों के विभागों में फेरबदल के बीच पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अचानक शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गए। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने भाजपा के शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर बंगाल के भावी राजनीतिक घटनाक्रम और कूटनीति पर विस्तृत चर्चा की है। दरअसल, टीएमसी के बागी गुट को लेकर भाजपा के भीतर इस समय भारी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
रणनीति यह है कि महाराष्ट्र में एनसीपी और शिवसेना की तर्ज पर तृणमूल का बागी गुट ही असली पार्टी पर अपना दावा ठोके। हालांकि, भाजपा के एक धड़े को डर है कि अगर टीएमसी पूरी तरह खत्म होती है या उसका भाजपा में विलय होता है, तो राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में वाम मोर्चा का दोबारा उभार हो सकता है, जो भविष्य में उनके लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
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