Rajasthan News: राजस्थान में भजनलाल सरकार के खिलाफ शिक्षकों का मोर्चा, फर्स्ट ग्रेड से लेकर थर्ड ग्रेड तक सड़क पर क्यों उतरे शिक्षक?
Rajasthan News: राजस्थान में निकाय और पंचायत चुनाव से पहले थर्ड ग्रेड शिक्षकों ने उग्र आंदोलन का ऐलान कर भजनलाल सरकार की टेंशन बढ़ा दी है. साल 2018 के बाद से राज्य में तबादले नहीं होने से नाराज शिक्षकों ने अब राजधानी जयपुर में आंदोलन शुरू कर दिया है. बुधवार 4 अगस्त को पूरे राज्य से सैकड़ों शिक्षक जयपुर के शहीद स्मारक पर एकत्र हुए थे. उन्होंने तबादला नीति लागू करने के साथ ट्रांसफर प्रक्रिया तत्काल शुरू करने की मांग की है.
फर्स्ट ग्रेड शिक्षकों का भी आंदोलन जारी
भजनलाल सरकार के सामने अब शिक्षकों की नाराजगी भी एक बड़ी चुनौती बनती नजर आ रही है. राज्य में फर्स्ट ग्रेड शिक्षक पदोन्नति, भर्ती और सेवा संबंधी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं, तो वहीं तृतीय श्रेणी के शिक्षकों ने तबादला नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं. एक ही समय में अलग-अलग शिक्षक वर्गों का आंदोलन सरकार की शिक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान को लेकर कई सवाल कर रही है.
फर्स्ट ग्रेड शिक्षकों की मांगों पर सरकार कब लेगी फैसला?
प्रथम श्रेणी के शिक्षक लंबे समय से पदोन्नति, भर्ती और सेवा से जुड़े मुद्दों को लेकर अपनी डिमांड्स को सामने रखा है. इन मांगों को लेकर टीचरों ने धरना करने का फैसला किया है. शिक्षकों का कहना है कि जब विभाग में पदोन्नति और भर्ती जैसी प्रक्रियाएं समय पर पूरी नहीं की जाती है तो इसका असर न सिर्फ शिक्षकों के करियर पर पड़ता है बल्कि स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था भी इससे प्रभावित होती है. ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि यदि शिक्षकों की समस्याएं लंबे समय से विभाग के सामने आ चुकी थी तो उनके समाधान के लिए सरकार की ओर से कोई ठोस पहल क्यों नहीं की गई? क्या सरकार को शिक्षकों के सड़क पर उतरने का इंतजार कर रही थी?
थर्ड ग्रेड शिक्षक भी तबादला नीति को लेकर जता रहे नाराजगी
फर्स्ट ग्रेड शिक्षकों के साथ-साथ थर्ड ग्रेड शिक्षकों की नाराजगी भी सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. तृतीय श्रेणी के शिक्षक भी ट्रांस्फर पॉलिसी लागू करने की मांग को लेकर एजुकेशन कॉम्प्लेक्स का घेराव कर रही है. ट्रांस्फर पॉलिसी शिक्षकों के लिए लंबे समय से एक जरूरी मुद्दा रहा है. अध्यापकों की मांग है कि तबादलों को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी नीति लागू की जाए, ताकि कर्मचारियों को अपने स्थानांतरण को लेकर बार-बार असमंजस का सामना न करना जाएं. खास तौर पर दूर-दराज के इलाकों में कार्यरत शिक्षकों के लिए तबादले का मुद्दा पर्सन और पारिवारिक परिस्थितियों से भी जुड़ा हुआ रहा है.
ऐसे में एक और सवाल खड़ा होता है कि सरकार की तबादला नीति को लेकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं है? अगर नीति बनाने और लागू करने में समय लग रहा है तो सरकार की ओर से शिक्षकों को स्पष्ट रोडमैप क्यों नहीं दिया गया है?
सरकार के सामने शिक्षकों का मुद्दा बढ़ाएगा परेशानी
राजस्थान में शिक्षकों का आंदोलन सिर्फ एक मांग तक सीमित नहीं है. एक तरफ फर्स्ट ग्रेड शिक्षक पदोन्नति, भर्ती और सेवा संबंधी मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर थर्ड ग्रेड शिक्षक ट्रांस्फर पॉलिसी की मांग उठा रहे हैं. यानी शिक्षा विभाग के लोग अलग-अलग स्तरों पर कर्मचारियों में असंतोष दिख रहा है.
आखिर क्या कर रही भजनलाल सरकार?
सरकार लगातार राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने की बात करती आई है. मगर सवाल यह है कि शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले टीचर्स ही अगर अपनी मांगों को लेकर धरने और प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे तो व्यवस्थाओं में सुधार के दावों को कैसे देखा जाएगा?
शिक्षकों के आंदोलन का असर छात्रों पर भी पड़ेगा?
अध्यापकों की समस्याओं का असर सिर्फ उन्हीं तक सीमित नहीं है. स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता, पदोन्नति, भर्ती और स्थानांतरण जैसी प्रक्रियाएं सीधे तौर पर पूरे एजुकेशन सिस्टम से जुड़ी हुई होती हैं. ऐसे में अगर शिक्षक लंबे समय तक आंदोलन करते हैं तो इसका असर छात्रों की पढ़ाई और स्कूलों की नियमित गतिविधियों पर भी पड़ सकता है. ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है. सरकार को चाहिए कि वे इस आंदोलन को टालने के बजाय शिक्षकों से बातचीत करें और उनकी मांगों पर गौर करें.
भजनलाल सरकार कब निकालेगी समाधान?
शिक्षकों के लगातार आंदोलन करने से भजनलाल सरकार के सामने सीधा सवाल खड़ा होता है कि आखिर शिक्षकों की मांगों का समाधान कब होगा? क्या सरकार सिर्फ उन्हें आश्वासन देकर मामले को शांत करेगी या फिर पदोन्नति, भर्ती, सेवा नियम और तबादला नीति जैसे मुद्दों पर समय रहते कोई फैसले लेगी? इस वक्त सरकार के सामने चुनौती सिर्फ आंदोलन खत्म कराने की नहीं है बल्कि राज्य के हर शिक्षक का भरोसा जीतने की भी है.
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बच्चों के कमरे में घुसा 6 फीट लंबा कोबरा, AC की हवा में बेड के नीचे बना रखा था ठिकाना
बाड़मेर के कुड़ला गांव में एक घर के एसी वाले बेडरूम में करीब 6 फीट लंबा कोबरा घुसने से हड़कंप मच गया. हैरानी की बात यह थी कि उसी कमरे में दो मासूम बच्चे सो रहे थे. परिवार ने तुरंत बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला और वन्यजीव प्रेमी नरपतसिंह राजपुरोहित को सूचना दी. मौके पर पहुंचे ग्रीनमैन ने करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ दिया. बताया गया कि कोबरा एसी की ठंडी हवा के कारण बेड के नीचे छिपा था. बरसात के मौसम में सांपों के घरों में घुसने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
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