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Why are There Rule For Background Dancer: इंडिया में आज भी सबसे ज्यादा गाने बॉलीवुड फिल्मों के सुने और देखे जाते हैं. हालांकि, जब भी जब बॉलीवुड फिल्म का कोई बड़ा या मेगा बजट गाना देखते हैं तो हमारी नजर सबसे पहले स्टार्स पर जाती है. उनके स्टेप्स, एक्सप्रेशन और स्क्रीन प्रेजेंस ही पूरे गाने की ताकत मानी जाते हैं. लेकिन अगर ध्यान से देखें, तो उनके पीछे बड़ी तादात बैकग्राउंड डांसर्स भी उनके साथ उसी ताल और लय में डांस करते नजर आते हैं. कई बार देखा जाता है कि ये डांसर्स इतना अच्छा डांस करते हैं कि एक्टर और एक्ट्रेस भी ज्यादा साफ और एनर्जेटिक दिखाई देते हैं. फिर भी आपने शायद ही कभी किसी बैकग्राउंड डांसर को हीरो से ज्यादा लाइमलाइट लूटते देखा होगा. इसकी वजह केवल कैमरा नहीं, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के अजीब रूल्स काम करते हैं. अगर कोई बैकग्राउंड डांसर जरूरत से ज्यादा अच्छा डांस करने की कोशिश करता है, तो उसे टोक दिया जाता है. कई बार डांट भी पड़ती है और जरूरत पड़ने पर फ्रेम तक चैंज कर दिया जाता है. आखिर ऐसा क्यों होता है? इसके पीछे सिर्फ स्टारडम नहीं, बल्कि इंडिस्ट्री की सोच और टेक्निक काम करती हैं.
लोगों का ध्यान स्टार्स से न हटे
किसी भी फिल्म में सबसे बड़ा चेहरा हीरो या हीरोइन ही होता है. फिल्म के प्रोड्यूसर और डायरेक्टर करोड़ों रुपये खर्च करके बड़े स्टार्स को इसलिए साइन करते हैं ताकि लोग उन्हें देखने थिएटर तक आएं. ऐसे में अगर गाने के दौरान पीछे खड़ा कोई बैकग्राउंड डांसर ज्यादा चमकने लगे तो लोगों का ध्यान अनजाने में उसकी तरफ चला जाएगा. फिल्म मेकिंग की भाषा में इसे 'फ्रेम चोरी करना' (Stealing the Frame) बोला जाता है. यानी कैमरे में मौजूद होते हुए भी कोई दूसरा आर्टिस्ट मैन कैरेक्टर का फोकस अपनी तरफ खींच ले. यही वजह है कि कोरियोग्राफर हमेशा इस चीज का ख्याल रखते हैं कि बैकग्राउंड डांसर्स की एनर्जी और परफॉर्मेंस मैन कैरेक्टर से आगे न जाए. उनका काम फ्रेम को अच्छा दिखाना होता है, फ्रेम का हीरो बनना नहीं.
कोरियोग्राफर कहते हैं, थोड़ा कम एनर्जी लगाओ
बॉलीवुड के बड़े गानों की शूटिंग से कई दिन पहले से शुरू हो जाती है, इसके लिए रिहर्सल भी होती है. इसी दौरान कोरियोग्राफर हर डांसर को अलग-अलग ऑर्डर देते हैं. बैकग्राउंड डांसर्स को साफ कहा जाता है कि स्टेप्स बिल्कुल सही करने हैं, स्टार्ट से ज्यादा, ज्यादा अच्छे एक्सप्रेशन नहीं दिखाने हैं. इसकी एक बड़ी वजह होती है कि हर सुपरस्टार प्रोफेशनली डांस नहीं जानता है. कई कलाकार अपनी स्टाइल और स्क्रीन प्रेजेंस से फैंस का दिल जीतने की कोशिश करते हैं. अगर उनके पीछे खड़े डांसर्स अपने टैलेंट की बदौलत दिखने लगें, तो स्क्रीन पर हीरो का डांस कमजोर पड़ जाएगा. इसीलिए कई बार कोरियोग्राफर रिहर्सल के दौरान बैकग्राउंड डासर्स को बता देते हैं कि अपनी एनर्जी को थोड़ा कंट्रोल करके रखना. अगर कोई डांसर लगातार अच्छा परफॉर्म करने लगे, तो उसे पीछे कर दिया जाता है या कैमरे की पोजिशन तक चैंज कर दी जाती है. इस रूल्स का मकसद किसी के टैलेंट दबाना नहीं, बल्कि पूरे गाने का विजुअली अच्छा दिखाना होता है.
कहां-कहां लागू होते हैं ये अजीब रूल्स
बॉलीवुड के बड़े गानों की शूटिंग सिर्फ कैमरे के सामने ही नहीं होती बल्कि उसकी तैयारी कई दिनों पहले शुरू हो जाती है. हर सॉन्ग के लिए दर्जनों बैकग्राउंड डांसर्स और स्टार्स घंटों तक डांस का रिहर्सल करते हैं. इस दौरान सिर्फ डांस स्टेप्स का रिहर्सल नहीं होता बल्कि यह भी तय किया जाता है कि कौन कितना और कैसा एक्सप्रेशन देगा, कौन किनती बॉडी लैंग्वेज यूज करेंगा और किस टाइम किसकी नजर कैमरे की तरफ जाएगी. कोरियोग्राफर का सबसे बड़ा काम होता है पूरे सभी डांसर्स को जैसा दिखाना. अगर 30 डांसर्स में से एक बाकी से ज्यादा एनर्जेटिक या अलग दिखाई देता है, तो पूरा फ्रेम का बैलेंस बिगड़ लगने लगता है. इसलिए रिहर्सल के दौरान ही उन्हें कह दिया जाता है कि उनका मकसद अपना टैलेंट दिखाना नहीं, बल्कि स्टार्ट को अच्छा दिखाना होता है. यही वजह है कि कई बार चाह कर भी बेहद टैलेंटेड डांसर्स भी जानबूझकर अपनी पूरी स्किल का यूज करने करते हैं.
डीओपी और कोरियोग्राफर तय करते हैं सबकुछ
बॉलीवुड के गानों में कैमरे का यूज बहुत सोच-समझकर किया जाता है. डीओपी और कोरियोग्राफर पहले से ही तय कर लेते हैं कि किस शॉट में कैमरा किसे फोकस करेगा और लोग की किस पर टिकनी चाहिए. वाइड शॉट में भले ही बैकग्राउंड डांसर्स दिखाई दें, लेकिन कैमरे का विजुअल सेंटर हमेशा मैन कैरेक्टर पर ही होते हैं. अगर इसी दौरान कोई बैकग्राउंड डांसर बहुत जरूरत से ज्यादा मूवमेंट करे या बाकी डांसर्स से अलग एक्सप्रेशन देने लगे, तो ऑडियंस की नजर उसी पर फोकस करती है. इससे गाने का पूरा विजुअल फोकस बदल जाता है. यही वजह है कि अक्सर फिल्मों में बैकग्राउंड डांसर्स के स्टेप्स दोहराव वाले और लिमिटेड रखे जाते हैं, जबकि सबसे अट्रैक्टिव 'हुक स्टेप' हीरो या हीरोइन के लिए तैयार किए जाते हैं. यह स्ट्रेटजी इसलिए बनाई जाती है ताकि लोग में सिर्फ स्टार्स पर फोकस कर सकें.
बैकग्राउंड डांसर्स करते हैं सबसे ज्यादा मेहनत
बॉलीवुड के इन बड़े-बडे़ सॉग्स के पीछे बैकग्राउंड डासर्स की मेहनत बहुत होती है. इसके लिए वे कई-कई घंटों तक लगातार रिहर्सल करते हैं. शूटिंग के दौरान एक ही स्टेप को बार-बार रिहर्स किया जाता है. कई बार तेज धूप, भारी कॉस्ट्यूम और गर्म स्टूडियो लाइट्स के बीच घंटों प्रैक्टिस करते रहते हैं. इतना करने के बावजूद उनकी पहचान कहीं गुम हो जाती है. खास बात यह है कि इनमें से कई डांसर्स नेशनल और इंटरनेशल लेवल के होते हैं. उनके लुक और फिटनेसस कई बारे हीरो-हीरोइन से ज्यादा अच्छे होते हैं. लेकिन इस प्रोफेशन में यही होता है कि अपने टैलेंट को कंट्रोल करना पड़ता है. इंडस्ट्री में लंबे समय तक काम करने वाले कई कोरियोग्राफर्स भी इंटरव्यू में खुलासा कर चुके हैं कि बैकग्राउंड डांसर का सबसे बड़ा टैलेंट यही होता है कि उन्हें अच्छा डांस नहीं करना बल्कि कैमरे के सामने बैसेंस बनाए रखना होता है. यही प्रोफेशनलिज्म उन्हें इंडस्ट्री में टिकाए रखती है.
खुद से ज्यादा स्टार को बड़ा दिखाना होता है
बैकग्राउंड डांसर्स को हीरो से बेहतर न नाचने देने का रूल्स पहली नजर में अजीब लगता है लेकिन कमर्शियल फिल्मों के मुताबिक, यह पूरी तरह एक सोची-समझी स्ट्रैटेजी होती है. फिल्मों में गाना सिर्फ डांस नहीं होता बल्कि यह स्टार की पॉपुलैरिटी को बढ़ाने का भी जरिया होता है. इसलिए पूरी टीम मिलकर ऐसा माहौल फ्रेम तैयार करती है, जिसमें लोगों की नजर बार-बार सिर्फ मैन कैरेक्टर पर जाए. यही वजह है कि ये डांसर्स अपना टैलेंट दिखाने के बजाय उसे कंट्रोल करते हैं. वे जानते हैं कि उनका असली काम खुद चमकना नहीं है बल्कि स्टार को और बड़ा दिखाना है.
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