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राजधानी भोपाल आज भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा की भव्य रथयात्रा का साक्षी बनेगी। इस्कॉन पटेल नगर की ओर से आयोजित 13वें रथयात्रा महोत्सव में हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है। धार्मिक उत्साह के बीच शाम 4 बजे भोपाल टॉकीज से रथयात्रा शुरू होगी और शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए प्लेटिनम प्लाजा पहुंचेगी। आयोजन को लेकर पूरे मार्ग पर विशेष तैयारियां की गई हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से इस पर्व में शामिल हो सकें।
रथयात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और भक्ति परंपरा का जीवंत उत्सव मानी जाती है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के रथ को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करने के लिए पहुंचते हैं। आयोजकों का कहना है कि इस बार भी यात्रा में स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आए श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिलेगी।
500 किलो महाप्रसाद रहेगा खास आकर्षण
इस वर्ष की रथयात्रा को खास बनाने के लिए कई विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। आयोजन में भारत के अलग-अलग राज्यों से आई कीर्तन मंडलियां भक्ति संगीत प्रस्तुत करेंगी। वहीं रूस, नीदरलैंड और अन्य यूरोपीय देशों से आए इस्कॉन से जुड़े विदेशी भक्त भी “हरे कृष्ण” महामंत्र का संकीर्तन करते हुए यात्रा में शामिल होंगे। विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप देती है और यह दिखाती है कि भगवान जगन्नाथ की भक्ति अब दुनिया के कई देशों तक पहुंच चुकी है।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए करीब 500 किलो विशेष “खाजा” महाप्रसाद तैयार किया गया है, जिसे भगवान को अर्पित करने के बाद भक्तों में वितरित किया जाएगा। भगवान जगन्नाथ के लिए विशेष पोशाक वृंदावन से मंगवाई गई है, जिससे रथ और विग्रहों की भव्य सजावट की जाएगी। पूरे मार्ग को फूलों, धार्मिक झंडों और रंग-बिरंगी सजावट से आकर्षक बनाया गया है। आयोजन समिति के स्वयंसेवक भीड़ प्रबंधन, प्रसाद वितरण और अन्य व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे।
भोपाल में दो दिन तक रहेगा रथयात्रा का उत्साह
भोपाल में रथयात्रा का उत्सव केवल एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा। इस्कॉन कोलार की ओर से 19 जुलाई को दोपहर 1 बजे सर्वधर्म चौराहा से भी भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली जाएगी। इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण अत्याधुनिक तकनीक से तैयार किया गया रथ होगा, जिसमें रिमोट कंट्रोल और हाइड्रोलिक सिस्टम का उपयोग किया गया है। यह रथ पारंपरिक स्वरूप के साथ आधुनिक तकनीक का अनोखा मेल प्रस्तुत करेगा।
दोनों आयोजनों को लेकर रथों की सजावट, सफाई और सुरक्षा व्यवस्थाओं का काम पहले ही पूरा कर लिया गया है। प्रशासन और आयोजकों के बीच समन्वय बनाकर ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण की विशेष योजना तैयार की गई है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित मार्ग और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
धार्मिक जानकारों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा को सेवा, समानता और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान स्वयं मंदिर से बाहर निकलकर अपने भक्तों के बीच आते हैं, इसलिए इस पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। भोपाल में हर साल इस आयोजन का दायरा बढ़ता जा रहा है और अब यह केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शहर के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में भी अपनी अलग पहचान बना चुका है।
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