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Ashadh Amavasya 2026: सनातन धर्म में आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को बेहद खास माना जाता है. यह महत्वपूर्ण तिथि भगवान शिव को समर्पित होती है. इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक करना चाहिए. इस वर्ष आषाढ़ अमावस्या की सही तिथि को लेकर असमंजस बना हुआ है. 13 और 14 जुलाई किस दिन मनाई जाएगी अमावस्या. द्रिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई को मनाई जा रही है. मंगलवार के दिन पड़ने से इस दिन को भौमवती अमावस्या भी कहा जा रहा है. इस वजह से इसका महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है. इस दिन पितरों के लिए तर्पण, कालसर्प दोष निवारण, मंगल दोष की शांति और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है.
आषाढ़ अमावस्या की तिथि (Ashadh Amavasya Date 2026)
पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की अमावस्या जिसे आषाढ़ अमावस्या भी कहते हैं, इस साल 13 जुलाई को शाम 6:50 पर शुरू होगी और 14 जुलाई को दोपहर 3:14 तक रहेगी.
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आषाढ़ अमावस्या शुभ मुहूर्त (Ashadha Amavasya 2026 Shubh Muhurat)
यह दिन स्नान और दान के लिए शुभ माना जाता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, सुबह 4 बजकर 30 मिनट से लेकर सुबह के 5:32 तक स्नान और दान करने के लिए शुभ समय माना जाता है.
आषाढ़ अमावस्या पूजन विधि (Ashadha Amavasya Pujan Vidhi)
आषाढ़ अमावस्या पर सुबह सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी में स्नान करें. आप गंगाजल मिलाकर पानी में स्नान भी कर सकते हैं. इसके बाद सूर्य को अर्घ्य दें. इसके बाद तांबे के लोटे में पानी, गंगाजल, काले तिल, दूध और कुशा मिलाकर दक्षिण दिशा में मुख करके अपने पितरों का तर्पण करें. इसके बाद घर के मंदिर में दीया जलाएं. भौमवती अमावस्या के दिन मंगलवार को हनुमान जी और मंगल देव की भी पूजा करनी चाहिए. इस दिन हनुमान चालीसा का पाठ करें. घर में सात्विक भोजन पकाएं. गाय के कंडे जलाकर उसपे घी, गुड़ और भोजन का अग्नि को भोग लगाएं. अमावस्या के दिन भोजन के कुछ हिस्से को गाय, कौए, कुत्ते, चीटियों और ब्राह्मणों को दें.
आषाढ़ अमावस्या पर किन चीजों का दान करें?
आषाढ़ अमावस्या पर आपको गरीबों और जरूरतमंद लोगों को अमावस्या तिथि अन्न जैसे गेंहू, चावल, सत्तू, दालें और मौसमी फलों का दान करना चाहिए. इस दिन जल का दान कर सकते हैं. इस दिन आप छाते, चप्पल और सूती वस्त्रों का भी दान कर सकते हैं.
आषाढ़ अमावस्या का महत्व (Ashadha Amavasya Importance)
आषाढ़ अमावस्या का हिंदू धर्म में अत्यधित महत्व होता है, जो सिर्फ ज्योतिषीय नहीं बल्कि आध्यात्मिक भी होता है. यह दिन विशेष रूप से पितरों को तर्पण, दान-पुण्य और कालसर्प दोष निवारण के लिए खास होता है. जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष होता है, उन्हें आषाढ़ मास की अमावस्या पर पिंड दान, तर्पण और अन्न का दान करना चाहिए. ऐसा करने पितर प्रसन्न होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अमावस्या के दिन के स्वामी शनिदेव होते हैं. ऐसे में ग्रहों की शांति के लिए आपको इस दिन शनि देव की पूजा और हनुमान जी की पूजा विशेष रूप से करनी चाहिए. इनकी पूजा करने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का असर कम होता है. मंगलवार को पड़ने से राहु-केतु और मंगल का प्रभाव भी कम होगा.
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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
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