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Explainer: अमेरिका और ईरान के बीच कई सप्ताह तक चली बातचीत के बाद जून में शांति समझौते को लेकर सहमति बन पाई. उसके बाद 17 जून को दोनों देशों ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए. लेकिन ये शांति समझौता तीन सप्ताह भी नहीं चला और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस शांति समझौते को खत्म करने का एलान कर दिया. अब दोनों देशों के बीच कब और कैसे बातचीत होगी या फिर होगी भी या नहीं. इसे लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं. इस बीच एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इस हफ्ते ईरान पर दो दिन तक हमले करने के बावजूद, वॉशिंगटन तेहरान के साथ बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है और स्थायी शांति समझौते के लिए तकनीकी बातचीत जारी रहेगी.
मंगलवार को फिर शुरु हुए हमले
बता दें कि बीते सप्ताह मंगलवार रात (7 जुलाई) से गुरुवार (9 जुलाई) तक, अमेरिका और ईरान के बीच ताबड़तोड़ हमले हुए. उसके बाद आज यानी रविवार (12 जुलाई) को भी दोनों देशों ने एक दूसरे पर हमले किए. दोनों देशों के बीच यह तनाव 17 जून को हुए उस समझौते (MoU) के बाद पैदा हुआ, जिसके तहत 60 दिनों की बातचीत की प्रक्रिया शुरू हुई थी.
मंगलवार रात और बुधवार सुबह अमेरिका ने ईरान में 85 ठिकानों पर हमले किए. ये हमले तब हुए जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों पर हमला किया. ईरान ने इन हमलों को लेकर सफाई दी कि ये जहाज ईरान द्वारा मंजूर किए गए रास्ते से नहीं गुजर रहे थे.
अमेरिकी हमलों का ईरान ने दिया जवाब
अमेरिकी हमलों का ईरान ने भी जवाब दिया. ईरान ने बुधवार को खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले किए. इसके बाद बुधवार रात अमेरिका ने ईरान के 90 ठिकानों पर और हमले किए. फिर गुरुवार को भी ईरान के दक्षिणी तटीय और पूर्वी प्रांतों पर हमले किए गए. ईरान का दावा है कि इनमें आम नागरिकों के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बनाया गया. इन हमलों से तीन हफ्ते पुराना सीजफायर समझौता और कमजोर हो गया.
ट्रंप ने शांति समझौता खत्म करने का किया एलान
बुधवार को तुर्की के अंकारा में NATO समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि उन्हें लगता है कि MoU "खत्म" हो गया है, जिससे यह डर पैदा हो गया कि सीजफायर खत्म हो गया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी तो वे शांति वार्ता जारी रहने देंगे, लेकिन उनका मानना है कि ये "समय की बर्बादी" हैं. गुस्से में उन्होंने ईरानी नेतृत्व को "घटिया" तक कह डाला.
ट्रंप ने फिर दिए शांति वार्ता के संकेत
हालांकि उसके बाद गुरुवार को ट्रंप का रुख कुछ बदला हुआ लगा. उन्होंने राष्ट्रपति के विमान 'एयर फ़ोर्स वन' में पत्रकारों से कहा कि मकसद पूरी तरह से युद्ध की स्थिति में लौटना नहीं है. उन्होंने कहा कि हालांकि युद्ध का विकल्प अभी भी खुला है, लेकिन तेहरान "समझौता करना चाहता है". लेकिन शुक्रवार की सुबह ईरानी मीडिया ने दक्षिणी ईरान में कई धमाकों की खबर दी. इनमें बुशहर (जहां देश का एक न्यूक्लियर प्लांट है), कोनारक, चोघादक और बंदर अब्बास शामिल थे.
अमेरिका ने इन धमाकों में किसी भी तरह की भूमिका से इनकार किया. शुक्रवार सुबह ऐसा लगा कि आखिरकार गोलीबारी रुक गई है, क्योंकि मध्यस्थता करने वाले देश बातचीत को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे थे. अमेरिका के एक अधिकारी ने बताया कि वॉशिंगटन बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि किसी भी पक्ष ने आधिकारिक तौर पर बातचीत रद्द नहीं की है और न ही MoU (समझौता ज्ञापन) को खत्म करने की घोषणा की है, लेकिन दोनों ने एक-दूसरे पर इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाया है.
कब हो सकती है अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत
ट्रंप के बयान के बात दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की उम्मीद तो जगी है लेकिन ये वार्ता कब होगी कोई नहीं जानता. बता दें कि अमेरिका और ईरान ने 17 जून को एक MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए. इसमें वे लेबनान समेत सभी मोर्चों पर 60 दिनों तक युद्धविराम बनाए रखने पर सहमत हुए, ताकि एक स्थायी शांति समझौते पर बातचीत हो सके.
इस MoU के तहत, ईरान उस अवधि के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही की अनुमति देने पर सहमत हुआ, जबकि अमेरिका ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने पर सहमत हुआ.
इसके बाद स्विट्जरलैंड में बातचीत शुरू होनी थी, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य के भविष्य, ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति, लंबे समय के लिए प्रतिबंधों में ढील और तेहरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर विवरण तय किए जाने थे. हालांकि, इसमें देरी हुई क्योंकि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर बमबारी जारी रखी, जहां उसने देश के लगभग पांचवें हिस्से पर कब्जा कर रखा है.
स्विट्जरलैंड से शुरू हुई शांति वार्ता
इसके बाद दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता की शुरुआत हुई. लेकिन इस महीने की शुरुआत से दोनों पक्ष कतर की राजधानी दोहा में अप्रत्यक्ष "तकनीकी" बातचीत की शुरुआत की. ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों के कारण ये बातचीत कुछ समय के लिए रोक दी गई थी; खामेनेई 28 फरवरी को तेहरान पर हुए अमेरिका-इजरायल के पहले हमले में मारे गए थे. ट्रंप ने यह भी वादा किया था कि अंतिम संस्कार की कार्यवाही के दौरान अमेरिका हमले फिर से शुरू नहीं करेगा.
कब शुरू हो सकती है दोनों देशों के बीच वार्ता?
ईरान में राजकीय अंतिम संस्कार समारोह संपन्न हो चुका है. पहले माना जा रहा था कि दोनों देशों के बीच 11 जुलाई को वार्ता दोबारा शुरू हो सकती है, लेकिन शनिवार से बातचीत शुरू नहीं हो पाई. अभी भी इस शांति वार्ता पर अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं, लेकिन कोई निश्चित तारीख अभी तक पता नहीं चली है. बता दें कि ईरान पहले ही कह चुका है कि बातचीत के दौरान अमेरिका के हमले करने की आदत- जैसा कि उसने पिछले साल इजरायल-ईरान युद्ध के समय और इस साल 28 फरवरी को किया था.
ये भी पढ़ें: Explainer: अमेरिका-ईरान के बीच जून में हुए MoU के बाद होर्मुज से कितने गुजरे जहाज, कैसे रहे इलाके के हालात
इसलिए तेहरान को अमेरिकी नेतृत्व पर भरोसा नहीं रहा. इसके साथ ही ट्रंप ने बुधवार को बातचीत जारी रहने की संभावना पर गंभीर संदेह जताया. उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि ईरान के साथ MoU "खत्म" हो गया है. साथ ही उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य हमलों के बाद ईरानी नेताओं को "बीमार लोग" बताया.
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