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West Bengal Assembly: पश्चिम बंगाल की सियासत में सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण और हंगामेदार होने वाला है. राज्य में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म कर सत्ता में आई भाजपा सरकार अपने सबसे बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील वादों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाने जा रही है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी सोमवार को पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक विधानसभा में चार महत्वपूर्ण बिल पेश करने वाले हैं.
इन विधेयकों में पिछड़ा वर्ग आयोग संशोधन बिल, रंगदारी और गुंडों पर लगाम लगाने से जुड़े दो बिल और ओबीसी आरक्षण संशोधन बिल शामिल हैं. लेकिन इस समय सबसे बड़ी चर्चा और अटकलें इस बात को लेकर लगाई जा रही हैं कि क्या सरकार सोमवार को ही विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी से जुड़ा बिल भी पेश कर देगी. अगर यह बिल सोमवार को बंगाल विधानसभा में पेश होकर पारित हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल देश का चौथा ऐसा राज्य बन जाएगा जहां समान नागरिक संहिता लागू होगी.
भाजपा का बड़ा चुनावी वादा
भाजपा ने विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान इस बात पर सबसे ज्यादा जोर दिया था कि राज्य के सभी नागरिकों पर एक समान सिविल कानून लागू होना चाहिए. चुनावी घोषणापत्र जारी करते समय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बंगाल की जनता से वादा किया था कि भाजपा सरकार बनने के 6 महीने के भीतर राज्य में यूसीसी लागू कर दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि यह कदम धर्म की परवाह किए बिना कानून के सामने सभी की बराबरी पक्का करने के मकसद से उठाया जा रहा है.
यह प्रस्तावित कानून शादी, तलाक, उत्तराधिकार, विरासत और गोद लेने जैसे पारिवारिक मामलों में धर्म पर आधारित पर्सनल लॉ को हटाकर एक समान कानूनी ढांचा तैयार करेगा. हालांकि गृह मंत्री ने इसके लिए 6 महीने की समय सीमा तय की थी, लेकिन मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार अपने कार्यकाल के दो महीने से पहले ही इसे सदन में लाने के लिए तैयार दिख रही है.
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के संकेत
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से मौजूदा सत्र के दौरान ही यूसीसी पेश करने का साफ संकेत दे दिया था. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि जिस तरह से यूसीसी को गुजरात, उत्तराखंड और असम में एक तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करके लागू किया गया था, ठीक उसी तरह इसे पश्चिम बंगाल में भी लागू किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने कहा था कि वह सोमवार को विधानसभा को इस बारे में पूरी जानकारी देंगे. शुभेंदु अधिकारी के इस बयान के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में यह माना जा रहा है कि भाजपा सरकार अपने इस कोर एजेंडे पर बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहती है.
आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा
इस बड़े कानून को लेकर राज्य के आदिवासी समाज में कुछ आशंकाएं थीं, जिन्हें दूर करने के लिए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने स्थिति साफ की है. उन्होंने शनिवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि यूसीसी पर भाजपा का रुख हमेशा से साफ रहा है और यह पार्टी के राजनीतिक कमिटमेंट का हिस्सा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि संविधान के आर्टिकल 366(25) और 342 के तहत मान्यता प्राप्त अनुसूचित जनजातियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखा जाएगा, जिससे उनके पारंपरिक रीति-रिवाजों और खास अधिकारों की पूरी रक्षा होगी. इसके साथ ही उन्होंने उन अफवाहों को भी खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि यह कानून परिवार के आकार या बच्चों की संख्या को कंट्रोल करने से जुड़ा है.
विपक्ष की घेराबंदी और रणनीति
दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों ने इस पूरे मुद्दे पर सरकार को घेरने की बड़ी रणनीति तैयार कर ली है. पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पार्टी विधायकों और वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करके साफ निर्देश दिया है कि वे विधानसभा के अंदर और बाहर इस बिल का पुरजोर विरोध करें. टीएमसी का तर्क है कि यह प्रस्ताव सामाजिक सहमति और भारत के बहुलवादी चरित्र के खिलाफ है. इसके अलावा विपक्ष रंगदारी और गुंडों पर लगाम लगाने से जुड़े दो अन्य बिलों का भी कड़ा विरोध कर रहा है, जिसके तहत किसी भी आरोपी को एक साल तक हिरासत में रखा जा सकता है. टीएमसी ने इसे बेहद सख्त और लोकतंत्र पर प्रहार बताया है.
विधानसभा में एकजुट होता विपक्ष
अगर सोमवार को सदन में यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल पेश होता है, तो विपक्ष एकजुट होकर सरकार को रोकेगा. नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में बागी तृणमूल खेमे के साथ-साथ आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर, माकपा विधायक मुस्तफिजुर रहमान राणा, इंडियन सेक्युलर फ्रंट के नौशाद सिद्दीकी और कांग्रेस के विधायक भी इस बिल के विरोध में खड़े हो गए हैं. विधानसभा के इस सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जोरदार बहस देखने को मिल सकती है.
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