Air India Flight: एयर इंडिया की दिल्ली से अमृतसर जाने वाली फ्लाइट संख्या AI479 के साथ 22 जून को एक गंभीर घटना सामने आई है। अमृतसर के श्री गुरु राम दास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने के दौरान, विमान को 'गो-अराउंड' (Go-around) करना पड़ा, जिसके दौरान यह अनजाने में पाकिस्तान की सीमा में प्रवेश कर गया। एयरलाइन ने बुधवार (24 जून) को इस घटना की पुष्टि की है।
क्या है एयरलाइन का पक्ष? एयर इंडिया ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि विमान के चालक दल ने अमृतसर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान 'गो-अराउंड' मैन्यूवर किया था, इसी प्रक्रिया के दौरान विमान गलती से पाकिस्तान के एयरस्पेस में थोड़ा अंदर चला गया। एयरलाइन के प्रवक्ता ने कहा कि इस घटना की जानकारी संबंधित विमानन अधिकारियों को दे दी गई है और मामले की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है। एयर इंडिया ने जोर देकर कहा है कि यात्रियों और चालक दल की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अमृतसर एयरपोर्ट की भौगोलिक स्थिति विशेषज्ञों के अनुसार, अमृतसर का श्री गुरु राम दास जी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत-पाकिस्तान सीमा के काफी नजदीक स्थित है। इस वजह से तकनीकी खामियों या खराब मौसम के चलते किसी भी विमान के लिए हवाई मार्ग से भटकने और सीमा पार करने की संभावना बनी रहती है।
क्या होता है 'गो-अराउंड'? विमानन जगत में 'गो-अराउंड' एक सुरक्षित और सामान्य प्रक्रिया है। इसमें जब पायलट को लगता है कि लैंडिंग के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं, तो वह विमान को रनवे पर उतारने के बजाय उसे वापस हवा में ले जाकर ऊंचाई पर ले जाता है। यह निर्णय खराब दृश्यता, खराब मौसम, रनवे पर किसी बाधा, या एयर ट्रैफिक जैसी समस्याओं के कारण लिया जाता है। यह पूरी तरह से एक मानक सुरक्षा प्रक्रिया है।
यह घटना उस समय हुई है जब दोनों देशों के बीच हवाई सीमाओं को लेकर कड़े प्रतिबंध लागू हैं। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से दोनों परमाणु-संपन्न देशों के बीच स्थिति तनावपूर्ण रही है, जिसके चलते हवाई प्रतिबंधों का सिलसिला शुरू हुआ था।
भारत ने भी पाकिस्तानी विमानों के लिए अपने एयरस्पेस के उपयोग पर इसी तरह के कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। हालांकि सैन्य तनाव में कमी आई है, लेकिन इन प्रतिबंधों के कारण एयरलाइनों को लंबे हवाई मार्ग चुनने पड़ रहे हैं, जिससे संचालन लागत (Operational Cost) बढ़ गई है।
2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत की महत्वाकांक्षी दावेदारी के भाग्य का फैसला 2029 के मध्य में होगा। भारत की प्रतिस्पर्धा मुख्य रूप से कतर से मानी जा रही है, जबकि तुर्की और दक्षिण अफ्रीका की बोली भी संभावित है। Wed, 24 Jun 2026 23:53:44 +0530