पीओजेके में भड़की बगावत, प्रदर्शन और हिंसा पर भारत ने उठाए गंभीर सवाल, पाक को किया बेपर्दा.
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में बड़े पैमाने पर बंद और विरोध प्रदर्शनों के चलते हालात तनावपूर्ण हो गए. रावलाकोट, मुजफ्फराबाद, कोटली, भीमबर, डड्याल, पलंदरी और सुधनोती समेत कई शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग की.
इस प्रदर्शन के शुरू होने के साथ हीं पाक सरकार की नींद उड़ गई और इसे दबाने के लिए भरपूर सैन्य बल प्रयोग किया गया जिसमें दो दर्जन से ज्यादा लोगों के मारे जाने और 200 से ज्यादा के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है. पाक रेंजर्स पर आरोप है की उन्होंने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां बरसाईं और मानवाधिकार का खुला उल्लंघन किया.
भारत ने किया पाक को बेपर्दा
पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर में हिंसा, दमन और आम लोगों को सीधे गोली मारे जाने पर भारत ने कड़ा विरोध दर्ज किया. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा " इस संदर्भ में, हम पाकिस्तान की ओर से फर्जी खबरों और वीडियो का एक सिलसिला लगातार देख रहे हैं. यह अपनी विफलताओं को छिपाने और अपने मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने का पाकिस्तान का एक हताशा-पूर्ण प्रयास है. पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में भीषण पुलिस बर्बरता की खबरें हैं, जिसमें कई प्रदर्शनकारी मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं. हम उम्मीद करते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके दुष्कर्मों और अत्याचारों के लिए जवाबदेह ठहराएगा."
प्रदर्शन और हिंसा का की खबरें हर तरफ से
रावलाकोट में सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और मुख्य मार्गों को अवरुद्ध कर दिया. रिपोर्टों के अनुसार भीमबर से रावलाकोट की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस, सेना और रेंजर्स ने आंसू गैस, पैलेट गन और गोलीबारी का इस्तेमाल किया, जिसमें कम से कम सात लोग घायल हो गए. कोटली में भी हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया और कई समूह रावलाकोट की ओर मार्च करते दिखाई दिए. डड्याल में भी पाकिस्तान सेना के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए. बंद के कारण मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, कोटली, भीमबर और डड्याल में बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे. पलंदरी में प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों द्वारा छोड़े गए आंसू गैस के गोले मीडिया के सामने प्रदर्शित किए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. वहीं सुधनोती में प्रदर्शनकारियों ने लकड़ी के डंडों के साथ रैली निकालकर पाकिस्तान सरकार और सेना को चेतावनी दी.
मुजफ्फराबाद के नीलम ब्रिज क्षेत्र में भी प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की खबरें सामने आई हैं. इस बीच गोलीबारी के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है.
38 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन
प्रदर्शनकारी संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की 38 सूत्रीय मांगों को लागू करने की मांग कर रहे हैं. इनमें सस्ती बिजली, आटा, चावल और दालों की कीमतों में कमी प्रमुख मांगें हैं. आंदोलनकारियों का कहना है कि मंगला बांध जैसी जलविद्युत परियोजनाएं पीओजेके की भूमि पर स्थित हैं, इसलिए स्थानीय लोगों को बिजली रियायती दरों पर मिलनी चाहिए.
विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों पर विवाद
आंदोलन का एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा पीओजेके विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करने की मांग भी है. प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं जो पीओजेके में नहीं बल्कि पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहते हैं. ऐसे में वे क्षेत्र के लोगों का प्रतिनिधित्व कैसे कर सकते हैं.
प्रदर्शनकारियों और कुछ राजनीतिक समूहों का आरोप है कि इन सीटों के माध्यम से पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियां और सैन्य प्रतिष्ठान विधानसभा की राजनीति को प्रभावित करते हैं और सरकार गठन में अहम भूमिका निभाते हैं.
पिछले वर्ष भी भड़का था आंदोलन
अक्टूबर 2025 में भी इसी तरह के व्यापक विरोध प्रदर्शनों में 31 लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने आंदोलनकारियों की 38 में से 21 मांगें स्वीकार करने का आश्वासन दिया था. हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आठ महीने बाद भी अधिकांश वादे पूरे नहीं हुए, जिसके कारण लोगों में नाराजगी और बढ़ गई है.
बढ़ती सैन्य कार्रवाई पर सवाल
स्थानीय संगठनों का आरोप है कि पिछले कुछ महीनों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और कड़ी हो गई है. उनका दावा है कि पिछले आठ महीनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में दर्जनों नागरिकों की जान जा चुकी है. वहीं प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और हिंसक गतिविधियों को रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है.
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