Bangladesh Law and Order Situation: बांग्लादेश की सांसद ने बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर जताई चिंता, रहमान सरकार को घेरा
बांग्लादेश की निर्दलीय सांसद रूमीन फरहाना ने तारिक रहमान सरकार में देश की बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है. ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल बांग्लादेश (टीआईबी) के आंकड़ों का हवाला देते हुए, उन्होंने कहा कि तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सरकार के पहले सौ दिनों के कार्यकाल में हत्या, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ गई थीं.
गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर उठाए सवाल
संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद की खाली सीट की ओर ध्यान दिलाया और कहा, “उन्हें आज (सोमवार) मौजूद रहना था, लेकिन उनकी कुर्सी खाली है. मैं क्या कर सकती हूं? मुझे उनकी गैरमौजूदगी में बोलना होगा.”
रूमीन ने कहा कि अर्थव्यवस्था और कानून-व्यवस्था किसी सरकार की सफलता या असफलता तय करने के लिए मुख्य पैमाने हैं. अगर गृह मंत्री मौजूद होते, तो उनकी असफलताओं को बताना आसान होता.
अपराध के चौंकाने वाले आंकड़े: तीन महीनों का लेखा-जोखा
बांग्लादेशी मीडिया 'द डेली स्टार' के अनुसार, रूमीन ने बताया कि अकेले मार्च और अप्रैल में बांग्लादेश में 605 हत्या, 294 लूटपाट, 90 लूट और 196 अपहरण की घटनाएं हुईं. इस दौरान 129 घटनाओं में पुलिस पर हमला हुआ, जबकि 2,214 चोरी के मामले भी दर्ज किए गए.
उन्होंने कहा, "ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि सिर्फ तीन महीनों में कानून-व्यवस्था की स्थिति कितनी नाजुक और चिंताजनक हो गई है."
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ती हिंसा
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ हिंसा पर जोर देते हुए, रूमीन ने बताया कि इस अल्प अवधि में गलत इस्तेमाल के 3,496 मामले रिपोर्ट किए गए. इनमें 78-102 दुष्कर्म, 30-36 सामूहिक दुष्कर्म और 49-71 बच्चों के साथ दुष्कर्म के मामले शामिल हैं, जो समाज की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
एमएसएफ (MSF) की रिपोर्ट: मानवाधिकारों और नागरिक सुरक्षा पर संकट
पिछले हफ्ते, ढाका के मानवाधिकार सांस्कृतिक फाउंडेशन (एमएसएफ) ने भी देश में नागरिक सुरक्षा, कानून के राज और मानवाधिकार की खराब स्थिति पर गंभीर चिंता जताई थी.
स्थानीय मीडिया के अनुसार, एमएसएफ ने अपनी ताजा रिपोर्ट में बताया कि मई में अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 32 लोग मारे गए, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों से 53 अज्ञात शव बरामद किए गए. नतीजों के मुताबिक, कम से कम 69 अलग-अलग घटनाओं में 71 लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जो अप्रैल के मुकाबले काफी ज्यादा है. अप्रैल में 21 मौतें हुई थीं और 49 लोग घायल हुए थे.
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एमएसएफ ने अपनी रिपोर्ट में विशेष रूप से रेखांकित किया, "मई में भीड़ की हिंसा (मॉब लिंचिंग) में मारे गए लोगों की संख्या 21 से बढ़कर 32 हो गई, जो लोगों में कानून अपने हाथ में लेने की खतरनाक प्रवृत्ति में साफ बढ़ोतरी दिखाती है."
आंकड़ों से पता चलता है कि मौतों का यह ग्राफ लगातार बढ़ रहा है; मार्च में 19 मौतें, फरवरी में 18, इस साल जनवरी में 21 और दिसंबर 2025 में 10 मौतें दर्ज की गईं. मई में दर्ज 32 मौतों में से 14 लोग चोरी के आरोपों में भीड़ का शिकार बने, जबकि चार की मौत आपसी झगड़े के बाद हुई. इसके अलावा, डकैती और दुष्कर्म या यौन उत्पीड़न के आरोपों में भी दो-दो लोगों की मौत हुई.
स्रोत--आईएएनएस
केके/एबीएम
डिस्कलेमर- हेडिंग, सबहेड और समरी को छोड़कर पूरी स्टोरी न्यूज एजेंसी IANS की है.
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