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चाय, रसगुल्ला और दही बड़ा… सब कुछ बन रहा मटके में! गोरखपुर का ये नया फूड कॉन्सेप्ट मचा रहा धूम

Street Food Gorakhpur: यूपी का गोरखपुर शहर अब खाने-पीने के शौकीनों के लिए नए-नए स्वादों का गढ़ बनता जा रहा है. इन दिनों शहर के मशहूर पर्यटन स्थल 'नौका विहार' में एक अनोखा फूड स्टॉल लोगों के बीच खूब चर्चा में है, जहां चाय से लेकर रसगुल्ले और दही बड़े तक, सब कुछ मिट्टी के मटके में तैयार और सर्व किया जा रहा है. मात्र 20 से 50 रुपये के बजट में मिलने वाली इस मटके वाली चाय, देसी घी के रसगुल्ले और पनीर के दही बड़े का स्वाद लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि शाम होते ही यहां चटोरों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है.

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'8 दिन अवैध हिरासत में रखा, 2 लाख मुआवजा दो':इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, प्रयागराज में एसीपी की सैलरी से कटेगा जुर्माना

‘नागरिकों की व्‍यक्तिगत आजादी सबसे ऊपर है। किसी भी निर्दोष को बिना वैधानिक प्रक्रिया के जेल नहीं भेजा जा सकता।’ यह बात इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को पुलिस कमिश्‍नरेट प्रणाली में शांति भंग की धाराओं के दुरुपयोग पर कही। न्‍यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्‍यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मंसूर अहमद उर्फ लल्‍लू की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने पाया कि मंसूर को 8 दिन तक अवैध रूप से न्यायिक हिरासत में रखा गया। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन मानते हुए कोर्ट ने यूपी सरकार को पीड़ित को 2 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया। यह राशि राज्य सरकार को 6 सप्ताह के भीतर अदा करनी होगी। हाईकोर्ट ने कहा- एसीपी बारा और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस की धाराओं 170, 126 और 135 का घोर उल्लंघन किया। व्यक्ति को केवल शांति बनाए रखने के लिए व्यक्तिगत बंधपत्र देने का अवसर दिया जाना चाहिए था। लेकिन, उसे सीधे जेल भेज दिया गया। जांच कर जुर्माने की राशि एसीपी वेद व्यास मिश्रा के वेतन से काटी जाए। वेद व्यास अभी भी प्रयागराज में ही तैनात हैं। कोर्ट ने गाजियाबाद मामले का हवाला दिया हाईकोर्ट ने अपने हालिया निर्णय का उल्लेख किया। कहा कि गाजियाबाद कमिश्नरेट में भी इसी प्रकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे। उस फैसले में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि ऐसे मामलों में केवल व्यक्तिगत बंधपत्र लिया जाए। गैरजरूरी हिरासत से बचा जाए। 24 घंटे से ज्यादा अवैध हिरासत होने पर प्रतिदिन 25 हजार रुपए मुआवजा दिया जाए। हाईकोर्ट ने साफ किया कि मुआवजा देने के बाद राज्य सरकार एसीपी बारा के खिलाफ विभागीय जांच कराएगी। अगर जांच में उनकी जिम्मेदारी तय होती है, तो मुआवजे की यह राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूल की जाएगी। कोर्ट ने कहा- प्रयागराज पुलिस कमिश्नरेट में स्थिति चिंताजनक है। पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेटी शक्तियां दी गई हैं, लेकिन उनका दुरुपयोग किया जा रहा है। शांति भंग की आशंका के नाम पर लोगों को लंबे समय तक जेल भेजा जा रहा है। जबकि कानून इसकी इजाजत नहीं देता। पुलिस कमिश्‍नर प्रयागराज को 14 सितंबर, 2026 तक इस आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट सौंपनी होगी। हाईकोर्ट ने चेक किए रिकॉर्ड हाईकोर्ट ने प्रयागराज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के सौंपे गए रिकॉर्ड की भी जांच की। इन रिकॉर्ड्स से पता चला कि इसी तरह के प्रावधानों के तहत 2024 में 283, 2025 में 1,321 और 2026 में अब तक 721 लोगों को हिरासत में लिया गया था। कुल मिलाकर 2,325 लोगों को हिरासत में रखा गया। बेंच के अनुसार, इनमें से कई लोगों को एक हफ्ते से लेकर 20 दिनों तक हिरासत में रखा गया। पहले भी हाईकोर्ट ने ऐसा ही आदेश दिया था इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा था कि पुलिस अफसर लगातार नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं, यह सोचकर कि उनके गलत कामों पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा। उन्हें लगता है कि हजारों उल्लंघनों में से शायद ही कोई नागरिक अपने अधिकारों को लागू करवाने और उन्हें जवाबदेह ठहराने के लिए आगे आएगा। इस कड़ी टिप्पणी के साथ जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार की बेंच ने एक व्यक्ति को 25,000 रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता मतंबर मिश्रा को एक घरेलू झगड़े के कारण 24 घंटे तक पुलिस हिरासत (लॉकअप) में गैर-कानूनी तरीके से रखा गया था। बेंच ने अपने 16 पन्नों के आदेश में कहा था- जब कोई नागरिक अपने अधिकार को लागू करवाने के लिए आगे आता है और इस कोर्ट में आता है, तो यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उस अधिकार को लागू करें जो संविधान, कानूनों, राज्य सरकार की नीति और हमारी व्याख्या के तहत पहले से ही उसका अधिकार है। आखिरकार, चारों ओर ऐसे अधिकारी हैं जो मानते हैं कि उल्लंघन पर अक्सर किसी का ध्यान नहीं जाएगा। दरअसल, 26 नवंबर, 2022 को प्रयागराज के रहने वाले और मतंबर मिश्रा अपने खेतों से घर लौटे। तभी एक पुलिस चौकी के तत्कालीन प्रभारी सब-इंस्पेक्टर सूर्य प्रकाश दुबे उनके घर में घुसे और उन्हें घसीटते हुए बाहर ले गए। जबकि उन्होंने सिर्फ लुंगी और कुर्ता पहना हुआ था। बिना कोई कारण बताए मतंबर मिश्रा को पुलिस स्टेशन ले जाया गया और 24 घंटे के लिए लॉकअप में बंद कर दिया गया। इस दौरान, SI सूर्य प्रकाश दुबे ने उन्हें छोड़ने के बदले 20,000 रुपए की रिश्वत मांगी। यह पुलिस कार्रवाई मतंबर मिश्रा के भाई की बहू की दर्ज कराई गई घरेलू हिंसा की शिकायत पर की गई। ------------------------- ये खबर भी पढ़िए- रामभद्राचार्य बोले- आशुतोष महाराज का आपराधिक इतिहास जानकर कांप रहा:आशुतोष ने कहा था- जगद्गुरु की हत्या हो सकती है, मेरे पास सबूत तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज के बयान पर पलटवार किया है। सोमवार को उन्होंने वीडियो जारी कर कहा- आशुतोष ब्रह्मचारी मेरी और मेरे उत्तराधिकारी की छवि खराब करना चाहता है। वह साजिश रच रहा है। मुझे उसका आपराधिक इतिहास जानकर डर लगने लगा है, मैं कांप रहा हूं। पढ़ें पूरी खबर…

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  Sports

ENG vs NZ: 996 गेंद में खत्म हुआ टेस्ट, 2 दिन में गिरे 33 विकेट; ICC ने लॉर्ड्स की पिच पर सुना दिया बड़ा फैसला

क्रिकेट के सबसे मशहूर मैदानों में गिने जाने वाले लॉर्ड्स को पहली बार आईसीसी की नाराजगी का सामना करना पड़ा। इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए पहले टेस्ट के बाद ICC ने यहां की पिच को 'अनसैटिस्फैक्टरी' यानी खराब करार दिया। इसके साथ ही मैदान के खाते में एक डिमेरिट पॉइंट भी जोड़ा गया।

इंग्लैंड ने यह टेस्ट 115 रन से जीता था, लेकिन मुकाबला उम्मीद से काफी जल्दी खत्म हो गया। बारिश के कारण खेल कई बार रुका, फिर भी मैच चौथे दिन सुबह ही खत्म हो गया। पूरे टेस्ट में 40 विकेट सिर्फ 996 गेंदों में गिर गए। यह करीब 140 साल में लॉर्ड्स पर खेला गया सबसे छोटा पूरा टेस्ट मैच रहा।

आईसीसी मैच रेफरी एंडी पाइक्रॉफ्ट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पिच पर गेंद जरूरत से ज्यादा हिल रही थी। कई बार गेंद बहुत नीचे रह गई, जबकि कई बार उछाल अलग-अलग रहा। ऐसे में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना काफी मुश्किल हो गया।

पहले दिन 16 विकेट गिरे जबकि दूसरे दिन 17 बल्लेबाज आउट हुए। पाइक्रॉफ्ट का मानना है कि पिच ने गेंदबाजों को जरूरत से ज्यादा मदद दी और बल्लेबाजों के लिए हालात बहुत कठिन बना दिए। इसी वजह से मैच में गेंद और बल्ले के बीच सही मुकाबला देखने को नहीं मिला।

आईसीसी ने अपनी रिपोर्ट इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड को भेज दी है। बोर्ड चाहे तो 14 दिनों के भीतर इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है। हालांकि लॉर्ड्स का संचालन करने वाले एमसीसी ने माना है कि पिच उम्मीद के मुताबिक नहीं रही।

एमसीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रॉब लॉसन ने कहा कि हाल के वर्षों में पिच और आउटफील्ड को बेहतर बनाने के लिए काफी काम किया गया है। लेकिन मई की तेज गर्मी और मैच से पहले हुई बारिश ने मैदानकर्मियों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दीं।

इंग्लैंड के कप्तान बेन स्टोक्स भी पिच से खुश नहीं दिखे। उन्होंने कहा कि टेस्ट क्रिकेट पांच दिन का खेल है और अगर मैच इतनी जल्दी खत्म हो जाए तो यह खेल के लिए अच्छी बात नहीं है। स्टोक्स ने कहा कि ऐसे विकेट टेस्ट क्रिकेट के भविष्य के लिए मददगार नहीं हैं।

न्यूजीलैंड के कप्तान टॉम लैथम ने भी माना कि मैच का इतना जल्दी खत्म होना दुर्भाग्यपूर्ण रहा। इस बीच आईसीसी ने पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के बीच लाहौर के गद्दाफी स्टेडियम में खेले गए तीसरे वनडे की पिच को भी खराब रेटिंग दी है। वहां की पिच को भी एक डिमेरिट पॉइंट मिला है। आईसीसी का कहना है कि पिच बहुत धीमी थी और स्पिन गेंदबाजों को जरूरत से ज्यादा मदद मिल रही थी। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि लॉर्ड्स और गद्दाफी स्टेडियम भविष्य में अपनी पिचों को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

Tue, 09 Jun 2026 18:59:33 +0530

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