ईरान और इजराइल के बीच तीसरा युद्ध होने का खतरा बढ़ गया है. 8 जून की स्ट्राइक के बाद दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव में इजाफा हुआ है. वार पलटवार के जरिए आईआरजीसी और आईडीएफ ने अपनी सैन्य ताकत का एहसास कराया है. इस घटना से हालात कैसे बिगड़ गए हैं और आने वाला वक्त में कितना खतरनाक हो सकता है. मिडिल ईस्ट में बारू बवंडर का सबसे भयानक दौर शुरू होने वाला है. ईरान और इजराइल की तीसरी जंग छिड़ने की आशंका बढ़ गई है. 8 जून को हुए वार पलटवार के बाद तनाव चरम पर पहुंच चुका है.
दुनिया के सामने यह मैसेज दिया
चुनौतियां इसलिए ज्यादा है क्योंकि कुछ घंटों तक चली स्ट्राइक का नतीजा कुछ नहीं निकला. ऐसे में जंग की चिंगारी अभी भी धधक रही है और किसी भी वक्त विनाशक शोलों में तब्दील हो सकती है. 40 दिनों के जंग में ईरान ने दुनिया के सामने यह मैसेज दिया कि जीत उसकी ही हुई है. क्योंकि आईआरजीसी ने इजराइल और अमेरिका की शक्तिशाली सेनाओं का सामना किया. इस दौरान ईरान ने जिस तरह दुश्मन को जवाब दिया उससे कॉन्फिडेंस काफी हद तक उसका बढ़ गया.
हर साजिश का मुंह तोड़ जवाब
अब 8 जून को ईरान ने इजराइल पर हमला करके यह दिखा दिया कि वो डरने वाला नहीं है बल्कि दुश्मन की हर साजिश का मुंह तोड़ जवाब देने को तैयार है. ईरान पुख्ता रणनीति के साथ आगे भी ऑपरेशन जारी रखने की चेतावनी दे रहा. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मनाही के बावजूद ईरानी मिसाइल हमलों को इजराइल अनदेखा नहीं कर सकता था. ऐसा करने से ना केवल स्थिति बदल जाती बल्कि ईरान को यह एहसास होता कि आईआरजीसी के हमले रोकने में इजराइल नाकाम है और अब आईजीएफ के पास काउंटर अटैक की ताकत नहीं बची. इसीलिए इजराइल ने ईरान के हमलों का जवाब देना जरूरी समझा. सीज फाइट के दौरान अचानक भड़की जंग में आईआरडीसी और आईडीएफ ने कुछ अलग प्लान के साथ ऑपरेशन चलाए. जिससे दोनों ने ही एक दूसरे को चौंका दिया.
F15 और F35 की मदद की
ईरान ने बैलस्टिक मिसाइल से घातक हमले किए. अलग रणनीति अपनाते हुए प्रसीजन स्ट्राइक पर फोकस किया. ईरान ने मिसाइल अटैक जानबूझकर देश के पश्चिमी हिस्से से किया क्योंकि यहां से इजराइल की दूरी कम है. इजराइल ने ईरान के उन ठिकानों को ज्यादा निशाना बनाया जो ईरान की सैनी क्षमताओं के लिहाज से अहम है. ईरान ने कम वक्त में ज्यादा हमले किए, जिससे इजराइली डिफेंस सिस्टम को रिएक्ट करने के लिए बेहद कम वक्त मिला. वहीं इजराइल ने अपनी स्ट्राइक के लिए एडवांस फाइटर जेट्स का F15 और F35 की मदद की. इसे बेहद कम वक्त में टारगेट तक पहुंचने में कामयाबी मिली. ईरान ने इस बार अपनी रणनीति में इसलिए बदलाव किया ताकि मिसाइल्स को कम दूरी तय करनी पड़े और वो तेजी के साथ अपना टारगेट हिट कर सके. इस प्लान में उसे कुछ हद तक कामयाबी मिली. यही वजह है कि इजराइल के कुछ एयरबेस पर नुकसान होने की खबर है. इजराइल ने अपनी स्ट्राइक के दौरान सबसे पहले ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया. अलग-अलग ठिकानों पर लड़ाकू विमानों से बम बरसाए.
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