POK में बढ़ता असंतोष: शाहबाज सरकार और पाकिस्तानी सेना के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, भारत ने भी पाक को किया बेनकाब
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक असंतोष खुलकर सामने आया है. हाल के दिनों में मुजफ्फराबाद से लेकर रावलकोट तक हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि क्षेत्र की जनता लंबे समय से आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रही है, लेकिन उनकी समस्याओं की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा.
इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ाई है, बल्कि पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व के सामने भी नई चुनौती खड़ी कर दी है.
आर्थिक संकट बना गुस्से की बड़ी वजह
पीओके में बढ़ती महंगाई और बिजली संकट को लेकर लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ रही है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में बिजली उत्पादन होने के बावजूद उन्हें महंगी बिजली खरीदनी पड़ रही है. इसके अलावा खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि ने आम लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है.
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद क्षेत्र को उसका उचित लाभ नहीं मिल रहा. यही कारण है कि जनता अब अपने अधिकारों की मांग को लेकर खुलकर आवाज उठा रही है.
#WATCH | Anti-Pakistan protestors gather in large numbers in Barnala, Bhimber of Pakistan-occupied Jammu and Kashmir. pic.twitter.com/BAaSvVOBM5
— ANI (@ANI) June 9, 2026
प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव
विरोध प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई. प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरें भी सामने आईं. स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों ने बल प्रयोग किया, जिससे माहौल और अधिक गरमा गया.
हालांकि प्रशासन की ओर से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कही गई, लेकिन प्रदर्शनकारियों का दावा है कि उनकी शांतिपूर्ण मांगों को दबाने की कोशिश की जा रही है. इस घटनाक्रम ने क्षेत्र में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है.
सरकार और सेना पर उठ रहे सवाल
पीओके में हो रहे प्रदर्शनों के दौरान लोगों ने पाकिस्तान सरकार और सेना दोनों की नीतियों पर सवाल उठाए. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विकास, रोजगार और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने के बजाय राजनीतिक नियंत्रण पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है.
विश्लेषकों का मानना है कि यदि जनता की शिकायतों का समय रहते समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में असंतोष और व्यापक रूप ले सकता है. इससे क्षेत्र की राजनीतिक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है.
#WATCH | Delhi | MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "As we have stated earlier, if any foreign national residing in India is doing so legally, then any action taken against them will be in accordance with our existing laws. About some people being in 'no-man's-land',… pic.twitter.com/GERdJQCwfg
— ANI (@ANI) June 9, 2026
भारत ने भी किया पाक को बेनकाब
वहीं PoK उपजे संघर्ष को लेकर भारत की ओर से भी रिएक्शन सामने आया है. विदेश मंत्रालय की ओर से इस पर प्रतिक्रिया दी गई. प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान लगातार अपनी नापाक हरकतों से मानवाधिकारों का उल्लंघन करता आया है. आतंकवाद को बढ़ावा देना हो या फिर लाचार लोगों पर गोलियां बरसाना.
यही नहीं जायसवाल ने ये भी कहा कि, 'PoK में पुलिस की ओर से की गई गंभीर बर्बरता की खबरें आई हैं, जिसमें कई लोग मारे गए हैं और कई घायल हुए हैं. हम इस संदर्भ में लगातार पाकिस्तान की ओर से आने वाली फर्जी खबरों और वीडियो का एक पैटर्न देख रहे हैं. एमईए प्रवक्ता के मुताबिक यह पाकिस्तान की ओर से अपनी खुद की विफलताओं को छिपाने और मानवाधिकारों के उल्लंघन से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है.'
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केंद्र ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में डिफेंस की जमीन पर पहले बड़े सोलर पावर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी
नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। रक्षा मंत्रालय की खाली पड़ी रक्षा भूमि के अधिकतम उपयोग की पहल के तहत, केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश के सीतापुर में सोलर पावर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। यह जानकारी रक्षा मंत्रालय की ओर से मंगलवार को दी गई।
मंत्रालय ने बताया कि उत्तर प्रदेश के सीतापुर (पूर्व छावनी क्षेत्र) में लगभग 850 एकड़ रक्षा मंत्रालय की खाली पड़ी जमीन पर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (बीईएसएस) सहित 250 मेगावाट के सोलर पावर प्रोजेक्ट की स्थापना सरकारी कंपनी एनटीपीसी के माध्यम से की जाएगी।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, यह पहल स्वच्छ ऊर्जा, सतत विकास और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। रक्षा बलों के लिए दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के अलावा, इस परियोजना से रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए पारंपरिक ग्रिड बिजली की खरीद पर होने वाले खर्च में काफी कमी आने की उम्मीद है। इससे परियोजना की अवधि के दौरान सरकारी खजाने में बचत होगी।
एनटीपीसी लिमिटेड रक्षा प्रतिष्ठानों के लिए सबसे अनुकूल ऊर्जा मूल्य निर्धारण और बचत सुनिश्चित करने हेतु प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के माध्यम से इस परियोजना को कार्यान्वित कर रही है। यह परियोजना रक्षा मंत्रालय (सेना) के एकीकृत मुख्यालय और रक्षा संपदा महानिदेशालय (डीजीडीई) के साथ बेहतर समन्वय में कार्यान्वित की जाएगी। यह परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और पर्यावरणीय स्थिरता का संगम है, जो रणनीतिक हितों की रक्षा करते हुए राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों के समर्थन में अपनी संपत्तियों का लाभ उठाने के लिए रक्षा मंत्रालय की प्रतिबद्धता को उजागर करती है।
परियोजना पूरी होने पर सीतापुर सोलर पावर प्रोजेक्ट रक्षा भूमि पर स्थापित देश की सबसे महत्वपूर्ण रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में से एक के रूप में उभरेगी और परियोजना के रक्षा क्षेत्र में भविष्य की सौर-सह-भंडारण परियोजनाओं के लिए एक मानदंड स्थापित करने की उम्मीद है।
इस परियोजना के लिए रक्षा मंत्रालय, एनटीपीसी, रक्षा मंत्रालय (सेना) का मुख्यालय और डीजीडीई परियोजना के समय पर कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए बेहतर समन्वय में कार्य करेंगे।
--आईएएनएस
एबीएस
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
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