Vastu Tips For Roti: फ्रिज में रखे आटे की कभी न खाएं रोटियां! घर आती है दरिद्रता, जानें सही नियम
Vastu Tips For Roti: वास्तु शास्त्र में घर और रसोई घर के बारे में खासतौर पर बताया है. खाने के तरीकों से लेकर खाना परोसने के तरीकों के बारे में वास्तु के नियम है. माना जाता है कि रसोई घर माता अन्नपूर्णा का वास होता है. इसलिए, वास्तु के मुताबिक, खाना परोसने के तरीके से भी हमारी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है. ये सुख-समृद्धि पर असर डाल सकता है. इसके अलावा, आपसी संबंधों पर भी प्रभाव डालता है. आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार रोटी के नियम.
वास्तु से जुड़े रोटी के नियम
1.बासी आटे की रोटी
आजकल यह ट्रेंड बन गया है कि लोग फ्रिज में गूंथा हुआ आटा रखते हैं. अगले दिन उसी को फ्रिज से निकालकर रोटियां बनाते हैं. ये आम बात हो गई है लेकिन यह एक तरह से बासी रोटी हो जाती है. शास्त्रों में किसी को बासी रोटी थाली में देना सही नहीं होता है. बासी आटे का संबंध राहु-केतु से होता है. ऐसे आटे की रोटी खाने से हमेशा घर में बीमारियां और नकारात्मक ऊर्जा आती है.
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2.पहली और आखिरी रोटी
वास्तु और ज्योतिष, दोनों में आटे की पहली और आखिरी रोटी के नियम बने हुए हैं. यह एक विशेष नियम है जिसे हर किसी को अपनाना चाहिए. खाने की पहली रोटी हमेशा गाय के लिए बनाई जाती है जबकि तवे की आखिरी रोटी कुत्ते को डाली जाती है. गाय को रोटी खिलाने से देवी-देवता और पितर प्रसन्न होते हैं. वहीं, कुत्ते को रोटी खिलाने से राहु-केतु शांत होते हैं.
3.मेहमानों को बैठकर परोसे रोटी
खाना खाने वाले शख्स का आसन सही होना चाहिए. इसलिए, जब भी उन्हें खाना परोसे तो वह बैठे हुए होने चाहिए. भोजन करने वाले का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए. दक्षिण दिशा को खाना खाने के लिए वर्जित माना जाता है.
4.थाली में कभी न परोसे 3 रोटियां
वास्तु शास्त्र में थाली की मान्यता बहुत अधिक होती है. थाली में मान्यता है कि 3 रोटियां परोसना शुभ नहीं माना जाता है. हिंदी धर्म में 3 अंक को शुभ नहीं माना जाता है. कहा जाता है कि 3 नंबर नकारात्मकता लेकर आता है. इसलिए, यदि 3 रोटियां साथ में परोसने से मना किया जाता है. अगर आप खाना भी चाहते हैं तो पहले 2 रोटियां दें और फिर 1 रोटी खा सकते हैं.
5.हाथ में रोटी परोसना
अक्सर लोग रोटियां जल्दबाजी में तवे से उठाकर सीधे हाथ में परोस देते हैं. ऐसा करना गलत होता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, हाथ में रोटियां देने से वास्तुदोष लगता है. नियम है कि रोटी को हमेशा प्लेट में रखना चाहिए. इसके बाद सम्मानपूर्वक थाली में परोसना चाहिए. हाथ में रोटी देने से बरकत नहीं होती है और खर्चे बढ़ते हैं.
रोटी से जुड़े कुछ अन्य नियम
1.गिनकर रोटी बनाना- कुछ लोग रोटियां गिनकर पकाते हैं, जो बिल्कुल सही नहीं होता है.
2.तवे की सफाई- अगर तवे पर रोटी जल जाती है तो तुरंत तवे को साफ करें और फिर रोटी बनाएं.
3.बची हुई रोटी फेंकना- रात में बची हुई रोटियों को फेंकने के बजाय जरूरतमंदों, पशु-पक्षियों को देना अधिक शुभ माना जाता है.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहीं तो पेट्रोल-डीजल और महंगे हो सकते हैं: एचएसबीसी की प्रांजुल भंडारी (आईएएनएस इंटरव्यू)
नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। एचएसबीसी की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने मंगलवार को कहा कि अगर वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं और भारत का तेल आयात बिल लगातार बढ़ता है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी की जा सकती है।
न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में भंडारी ने कहा कि हाल के महीनों में भारत में आयातित कच्चे तेल की वास्तविक लागत (लैंडेड कॉस्ट) करीब 110 डॉलर प्रति बैरल रही है। उनके अनुसार, इस स्तर पर तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) पर भारी वित्तीय दबाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, पिछले एक महीने में भारत में तेल आयात की लागत लगभग 110 डॉलर प्रति बैरल रही है। इन स्तरों पर तेल वितरण कंपनियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरकार ने इस बोझ का बड़ा हिस्सा अपने ऊपर लिया है और तेल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में कटौती की है।
भंडारी ने कहा कि तेल की ऊंची वैश्विक कीमतों का पूरा बोझ केवल सरकार नहीं उठा सकती और इसका कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं को भी वहन करना होगा।
उन्होंने कहा, इस बोझ का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं को भी उठाना चाहिए। खुदरा ईंधन कीमतों में पहले ही 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, लेकिन मुझे लगता है कि इसमें थोड़ी और बढ़ोतरी की जा सकती है।
उन्होंने आगे कहा कि उनकी राय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 10 से 12 रुपए प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी उचित होती, क्योंकि इससे वैश्विक तेल कीमतों के झटके का बोझ सरकार और उपभोक्ताओं के बीच अधिक संतुलित तरीके से बंटता।
प्रांजुल भंडारी ने संकेत दिया कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी से इनकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा, अगर यह संकट जारी रहता है और भारत का आयातित तेल बिल इसी तरह ऊंचा बना रहता है, तो यहां से ईंधन कीमतों में कुछ और बढ़ोतरी संभव है।
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वैश्विक कच्चे तेल बाजार में लगातार अस्थिरता बनी हुई है और इससे ऊर्जा आयात की लागत पर दबाव बढ़ रहा है।
इस सप्ताह की शुरुआत में सरकार ने भी बताया था कि देश की तेल विपणन कंपनियां अभी भी भारी वित्तीय दबाव का सामना कर रही हैं। कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 600 से 700 करोड़ रुपए का अंडर-रिकवरी (कम वसूली) नुकसान हो रहा है, जिसमें एलपीजी बिक्री पर होने वाला घाटा भी शामिल है।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव प्रवीण खन्नूजा ने कहा कि यह नुकसान मुख्य रूप से खुदरा बिक्री कीमतों और अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों के बीच बढ़ते अंतर के कारण हो रहा है।
उनके अनुसार, वैश्विक बाजार में ईंधन की ऊंची कीमतों और घरेलू स्तर पर नियंत्रित खुदरा कीमतों के चलते तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है।
--आईएएनएस
डीबीपी
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