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क्या होता है अंपायर्स कॉल? क्यों है ये क्रिकेट का सबसे विवादित नियम, जानिए इससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी

What Is Umpires Call Rule: क्रिकेट को जेन्टलमेन गेम कहा जाता है. इस खेल के नियम ही इसे और रोमांचक बनाते हैं. क्रिकेट की शुरुआत तो टेस्ट फॉर्मेट से हुई थी, लेकिन फिर वनडे और अब तो टी-20 फॉर्मेट की धूम है. हालांकि, तीनों ही फॉर्मेट की अपनी एक यूएसपी है. जैसे टेस्ट क्रिकेट खिलाड़ियों को सेट होने और उनका नेचुरल गेम खेलने की इजाजत देता है, तो वहीं टी-20 फॉर्मेट खिलाड़ियों को आक्रामक बनाता है. जहां, बल्लेबाज हर गेंद को बाउंड्री पार भेजने को देखते हैं और गेंदबाज हर विकेट पर विकेट तलाशते हैं. जैसा कि आप सभी जानते हैं कि क्रिकेट के खेल में सैंकड़ों नियम हैं... मगर ये कहना गलत नहीं होगा कि अंपायर्स कॉल का नियम सबसे विवादिहत नियमों में शुमार है. जहां एक तपका इसे हटाने की मांग करता है, तो वहीं दूसरा तपका इसे मैदान पर मौजूद अंपायर की भूमिका बनाए रखने के लिए यह नियम जरूरी है. तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको अंपायर्स कॉल नियम के बारे में विस्तार से बताते हैं... अंपायर्स कॉल क्या है? ये कैसे काम करता है? 

  • अंपायर्स कॉल नियम क्या है?
  • अंपायर्स कॉल क्यों है सबसे विवादित नियम?
  • कैसे काम करता है अंपायर्स कॉल का नियम?
  • पहली बार कब हुआ अंपायर्स कॉल का इस्तेमाल?
  • अंपायर्स कॉल से जुड़ी अन्य बातें

क्या है अंपायर्स कॉल?

अंपायर्स कॉल DRS का एक खास नियम है, जिसके तहत मैदान पर मौजूद अंपायर के मूल फैसले को बरकरार रखा जाता है, जब तकनीकी सबूत पूरी तरह निर्णायक नहीं होते. आसान भाषा में समझें तो अगर तकनीक यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर बता पाती है कि अंपायर का फैसला गलत था, तो अंपायर का फैसला कायम रहता है. इसे ही अंपायर्स कॉल कहा जाता है.

अंपायर्स कॉल क्यों है सबसे विवादित नियम?

अंपायर्स कॉल को लेकर LBW (लेग बिफोर विकेट) के मामलों में काफी विवाद देखने को मिलता है. दरअसल, जब कोई बल्लेबाज LBW आउट दिया जाता है या नॉट आउट दिया जाता है और वह DRS लेता है, तब बॉल-ट्रैकिंग तकनीक यह दिखाती है कि गेंद विकेट को कितनी हद तक हिट कर रही थी.

यदि गेंद का केवल एक हिस्सा स्टंप्स को छू रहा हो और पूरी तरह विकेट पर नहीं लग रहा हो, तो अंपायर्स कॉल लागू हो सकती है. यही वजह है कि अक्सर क्रिकेट के गलियारों में अंपायर्स कॉल के नियमों के लेकर विवाद होता है और इस बात में कोई दोराय नहीं है कि जब तक इस नियम में बदलाव नहीं होते, तब तक इसे लेकर विवाद होता ही रहेगा.

अंपायर्स कॉल नियम Photograph: (Image Source: AI)

कैसे काम करता है अंपायर्स कॉल का नियम?

अंपायर्स कॉल को उदाहरण से समझिए कि अगर मैदान पर अंपायर ने बल्लेबाज को आउट दिया है. लेकिन बल्लेबाज अंपायर के इस फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह DRS का इस्तेमाल करता है. बॉल-ट्रैकिंग में पता चलता है कि गेंद विकेट के किनारे से टकरा रही थी. ऐसे में तकनीक इसे पूरी तरह गलत फैसला साबित नहीं कर पाती और अंपायर का फैसला बरकरार रहता है और अंपायर्स कॉल लागू होता है.

वहीं, अगर बल्लेबाज को नॉटआउट दिया गया हो और गेंदबाजी टीम अंपायर के इस फैसले से नाखुश हो, तो वह रिव्यू लेता है और गेंद केवल स्टंप्स के किनारे को छू रही हो, तब भी बल्लेबाज नॉट आउट ही रहता है और इस मामले में भी अंपायर्स कॉल लागू होता है.

ऑन-फील्ड अंपायर ने OUT दिया था → फैसला OUT रहेगा

ऑन-फील्ड अंपायर ने NOT OUT दिया था → फैसला NOT OUT रहेगा

पहली बार कब हुआ अंपायर्स कॉल का इस्तेमाल?

इंटरनेशनल क्रिकेट में 'अंपायर्स कॉल' का नियम पहली बार आधिकारिक तौर पर 2009 में इस्तेमाल किया गया, जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) की शुरुआत हुई थी. वहीं, भारतीय क्रिकेट में पहली बार 1 अक्टूबर 2016 को लागू किया गया था. भारत में पहली बार इस नियम का इस्तेमाल नवंबर 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई घरेलू टेस्ट सीरीज (राजकोट टेस्ट) के दौरान हुआ था. DRS का उपयोग हसीब हमीद के खिलाफ किया गया था, जो इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज थे. उन्हें रविचंद्रन अश्विन की गेंद पर LBW आउट दिया गया था.

अंपायर्स कॉल से जुड़ा सबसे बड़ा विवाद

क्रिकेट के गलियारों में अंपायर्स कॉल का नियम हमेशा विवादों से घिरा रहता है. मगर, भारतीय क्रिकेट में सबसे विवादित "अंपायर्स कॉल" की बात करें, तो वो 2024 में देखने को मिला था, जब भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज खेली गई थी. दरअसल, इस सीरीज में कई LBW फैसले अंपायर्स कॉल के कारण चर्चा का विषय बने और इंग्लैंड कप्तान बेन स्टोक्स ने भी सार्वजनिक रूप से इस नियम पर सवाल उठाए थे और जो रूट के खिलाफ गए लिए गए कुछ फैसलों पर काफी बहस हुई थी. हालांकि, फिर वक्त के साथ ये मुद्दा ठंडा पड़ गया.

उठ रही है नियम को बदलने की मांग

अंपायर्स कॉल क्रिकेट के सबसे चर्चित और विवादित नियमों में से एक है. जब भी किसी बल्लेबाज को अंपायर्स कॉल के चलते आउट या नॉटआउट दिया जाता है, तो अपने आप ही एक नया विवाद पैदा हो जाता है. इस नियमों को लेकर दिग्गजों का खेमा दो गुटों में बंटा हुआ है. एक तपका मानता है कि यदि तकनीक उपलब्ध है तो फैसला पूरी तरह तकनीक के आधार पर होना चाहिए. जबकि दूसरा तपका मानता है कि मैदान पर मौजूद अंपायर की भूमिका बनाए रखने के लिए यह नियम जरूरी है.

क्या ICC करेगी इस नियम में बदलाव?

क्रिकेट को बेहतर बनाने के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल हमेशा ही नियमों में संशोधन करती रहती है. हालांकि, अब तक आईसीसी ने अंपायर्स कॉल नियम में संशोधन को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है. मगर, ये कहना गलत नहीं होगा कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल भविष्य में इस नियम में संशोधन के बारे में सोच सकती है. मगर, तब तक क्रिकेट के गलियारों में इस नियम को लेकर बहस जारी रहने वाली है.

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Vastu Tips For Roti: फ्रिज में रखे आटे की कभी न खाएं रोटियां! घर आती है दरिद्रता, जानें सही नियम

Vastu Tips For Roti: वास्तु शास्त्र में घर और रसोई घर के बारे में खासतौर पर बताया है. खाने के तरीकों से लेकर खाना परोसने के तरीकों के बारे में वास्तु के नियम है. माना जाता है कि रसोई घर माता अन्नपूर्णा का वास होता है. इसलिए, वास्तु के मुताबिक, खाना परोसने के तरीके से भी हमारी आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है. ये सुख-समृद्धि पर असर डाल सकता है. इसके अलावा, आपसी संबंधों पर भी प्रभाव डालता है. आइए जानते हैं वास्तु के अनुसार रोटी के नियम.

वास्तु से जुड़े रोटी के नियम

1.बासी आटे की रोटी

आजकल यह ट्रेंड बन गया है कि लोग फ्रिज में गूंथा हुआ आटा रखते हैं. अगले दिन उसी को फ्रिज से निकालकर रोटियां बनाते हैं. ये आम बात हो गई है लेकिन यह एक तरह से बासी रोटी हो जाती है. शास्त्रों में किसी को बासी रोटी थाली में देना सही नहीं होता है. बासी आटे का संबंध राहु-केतु से होता है. ऐसे आटे की रोटी खाने से हमेशा घर में बीमारियां और नकारात्मक ऊर्जा आती है.

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2.पहली और आखिरी रोटी 

वास्तु और ज्योतिष, दोनों में आटे की पहली और आखिरी रोटी के नियम बने हुए हैं. यह एक विशेष नियम है जिसे हर किसी को अपनाना चाहिए. खाने की पहली रोटी हमेशा गाय के लिए बनाई जाती है जबकि तवे की आखिरी रोटी कुत्ते को डाली जाती है. गाय को रोटी खिलाने से देवी-देवता और पितर प्रसन्न होते हैं. वहीं, कुत्ते को रोटी खिलाने से राहु-केतु शांत होते हैं.

3.मेहमानों को बैठकर परोसे रोटी

खाना खाने वाले शख्स का आसन सही होना चाहिए. इसलिए, जब भी उन्हें खाना परोसे तो वह बैठे हुए होने चाहिए. भोजन करने वाले का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए. दक्षिण दिशा को खाना खाने के लिए वर्जित माना जाता है.

4.थाली में कभी न परोसे 3 रोटियां

वास्तु शास्त्र में थाली की मान्यता बहुत अधिक होती है. थाली में मान्यता है कि 3 रोटियां परोसना शुभ नहीं माना जाता है. हिंदी धर्म में 3 अंक को शुभ नहीं माना जाता है. कहा जाता है कि 3 नंबर नकारात्मकता लेकर आता है. इसलिए, यदि 3 रोटियां साथ में परोसने से मना किया जाता है. अगर आप खाना भी चाहते हैं तो पहले 2 रोटियां दें और फिर 1 रोटी खा सकते हैं.

5.हाथ में रोटी परोसना

अक्सर लोग रोटियां जल्दबाजी में तवे से उठाकर सीधे हाथ में परोस देते हैं. ऐसा करना गलत होता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार, हाथ में रोटियां देने से वास्तुदोष लगता है. नियम है कि रोटी को हमेशा प्लेट में रखना चाहिए. इसके बाद सम्मानपूर्वक थाली में परोसना चाहिए. हाथ में रोटी देने से बरकत नहीं होती है और खर्चे बढ़ते हैं.

रोटी से जुड़े कुछ अन्य नियम

1.गिनकर रोटी बनाना- कुछ लोग रोटियां गिनकर पकाते हैं, जो बिल्कुल सही नहीं होता है.

2.तवे की सफाई- अगर तवे पर रोटी जल जाती है तो तुरंत तवे को साफ करें और फिर रोटी बनाएं.

3.बची हुई रोटी फेंकना- रात में बची हुई रोटियों को फेंकने के बजाय जरूरतमंदों, पशु-पक्षियों को देना अधिक शुभ माना जाता है.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए प्रदान की गई है. News Nation इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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