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शेफाली जरीवाला की मौत के बाद बिखरे पराग त्यागी, श्मशान में सुनीं रहस्यमयी आवाजें

Parag Tyagi vlog: पराग त्यागी ने श्मशान घाट में किस तरह के अनुभव महसूस करने का दावा किया? भगवान कृष्ण की पेंटिंग देखकर पराग ने क्या कहा? पराग के श्मशान घाट वाले वीडियो पर लोगों का क्या है रिएक्शन?

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क्या होता है अंपायर्स कॉल? क्यों है ये क्रिकेट का सबसे विवादित नियम, जानिए इससे जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी

What Is Umpires Call Rule: क्रिकेट को जेन्टलमेन गेम कहा जाता है. इस खेल के नियम ही इसे और रोमांचक बनाते हैं. क्रिकेट की शुरुआत तो टेस्ट फॉर्मेट से हुई थी, लेकिन फिर वनडे और अब तो टी-20 फॉर्मेट की धूम है. हालांकि, तीनों ही फॉर्मेट की अपनी एक यूएसपी है. जैसे टेस्ट क्रिकेट खिलाड़ियों को सेट होने और उनका नेचुरल गेम खेलने की इजाजत देता है, तो वहीं टी-20 फॉर्मेट खिलाड़ियों को आक्रामक बनाता है. जहां, बल्लेबाज हर गेंद को बाउंड्री पार भेजने को देखते हैं और गेंदबाज हर विकेट पर विकेट तलाशते हैं. जैसा कि आप सभी जानते हैं कि क्रिकेट के खेल में सैंकड़ों नियम हैं... मगर ये कहना गलत नहीं होगा कि अंपायर्स कॉल का नियम सबसे विवादिहत नियमों में शुमार है. जहां एक तपका इसे हटाने की मांग करता है, तो वहीं दूसरा तपका इसे मैदान पर मौजूद अंपायर की भूमिका बनाए रखने के लिए यह नियम जरूरी है. तो आइए इस आर्टिकल में हम आपको अंपायर्स कॉल नियम के बारे में विस्तार से बताते हैं... अंपायर्स कॉल क्या है? ये कैसे काम करता है? 

  • अंपायर्स कॉल नियम क्या है?
  • अंपायर्स कॉल क्यों है सबसे विवादित नियम?
  • कैसे काम करता है अंपायर्स कॉल का नियम?
  • पहली बार कब हुआ अंपायर्स कॉल का इस्तेमाल?
  • अंपायर्स कॉल से जुड़ी अन्य बातें

क्या है अंपायर्स कॉल?

अंपायर्स कॉल DRS का एक खास नियम है, जिसके तहत मैदान पर मौजूद अंपायर के मूल फैसले को बरकरार रखा जाता है, जब तकनीकी सबूत पूरी तरह निर्णायक नहीं होते. आसान भाषा में समझें तो अगर तकनीक यह स्पष्ट रूप से साबित नहीं कर बता पाती है कि अंपायर का फैसला गलत था, तो अंपायर का फैसला कायम रहता है. इसे ही अंपायर्स कॉल कहा जाता है.

अंपायर्स कॉल क्यों है सबसे विवादित नियम?

अंपायर्स कॉल को लेकर LBW (लेग बिफोर विकेट) के मामलों में काफी विवाद देखने को मिलता है. दरअसल, जब कोई बल्लेबाज LBW आउट दिया जाता है या नॉट आउट दिया जाता है और वह DRS लेता है, तब बॉल-ट्रैकिंग तकनीक यह दिखाती है कि गेंद विकेट को कितनी हद तक हिट कर रही थी.

यदि गेंद का केवल एक हिस्सा स्टंप्स को छू रहा हो और पूरी तरह विकेट पर नहीं लग रहा हो, तो अंपायर्स कॉल लागू हो सकती है. यही वजह है कि अक्सर क्रिकेट के गलियारों में अंपायर्स कॉल के नियमों के लेकर विवाद होता है और इस बात में कोई दोराय नहीं है कि जब तक इस नियम में बदलाव नहीं होते, तब तक इसे लेकर विवाद होता ही रहेगा.

अंपायर्स कॉल नियम Photograph: (Image Source: AI)

कैसे काम करता है अंपायर्स कॉल का नियम?

अंपायर्स कॉल को उदाहरण से समझिए कि अगर मैदान पर अंपायर ने बल्लेबाज को आउट दिया है. लेकिन बल्लेबाज अंपायर के इस फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह DRS का इस्तेमाल करता है. बॉल-ट्रैकिंग में पता चलता है कि गेंद विकेट के किनारे से टकरा रही थी. ऐसे में तकनीक इसे पूरी तरह गलत फैसला साबित नहीं कर पाती और अंपायर का फैसला बरकरार रहता है और अंपायर्स कॉल लागू होता है.

वहीं, अगर बल्लेबाज को नॉटआउट दिया गया हो और गेंदबाजी टीम अंपायर के इस फैसले से नाखुश हो, तो वह रिव्यू लेता है और गेंद केवल स्टंप्स के किनारे को छू रही हो, तब भी बल्लेबाज नॉट आउट ही रहता है और इस मामले में भी अंपायर्स कॉल लागू होता है.

ऑन-फील्ड अंपायर ने OUT दिया था → फैसला OUT रहेगा

ऑन-फील्ड अंपायर ने NOT OUT दिया था → फैसला NOT OUT रहेगा

पहली बार कब हुआ अंपायर्स कॉल का इस्तेमाल?

इंटरनेशनल क्रिकेट में 'अंपायर्स कॉल' का नियम पहली बार आधिकारिक तौर पर 2009 में इस्तेमाल किया गया, जब अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डिसीजन रिव्यू सिस्टम (DRS) की शुरुआत हुई थी. वहीं, भारतीय क्रिकेट में पहली बार 1 अक्टूबर 2016 को लागू किया गया था. भारत में पहली बार इस नियम का इस्तेमाल नवंबर 2016 में इंग्लैंड के खिलाफ खेली गई घरेलू टेस्ट सीरीज (राजकोट टेस्ट) के दौरान हुआ था. DRS का उपयोग हसीब हमीद के खिलाफ किया गया था, जो इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाज थे. उन्हें रविचंद्रन अश्विन की गेंद पर LBW आउट दिया गया था.

अंपायर्स कॉल से जुड़ा सबसे बड़ा विवाद

क्रिकेट के गलियारों में अंपायर्स कॉल का नियम हमेशा विवादों से घिरा रहता है. मगर, भारतीय क्रिकेट में सबसे विवादित "अंपायर्स कॉल" की बात करें, तो वो 2024 में देखने को मिला था, जब भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट सीरीज खेली गई थी. दरअसल, इस सीरीज में कई LBW फैसले अंपायर्स कॉल के कारण चर्चा का विषय बने और इंग्लैंड कप्तान बेन स्टोक्स ने भी सार्वजनिक रूप से इस नियम पर सवाल उठाए थे और जो रूट के खिलाफ गए लिए गए कुछ फैसलों पर काफी बहस हुई थी. हालांकि, फिर वक्त के साथ ये मुद्दा ठंडा पड़ गया.

उठ रही है नियम को बदलने की मांग

अंपायर्स कॉल क्रिकेट के सबसे चर्चित और विवादित नियमों में से एक है. जब भी किसी बल्लेबाज को अंपायर्स कॉल के चलते आउट या नॉटआउट दिया जाता है, तो अपने आप ही एक नया विवाद पैदा हो जाता है. इस नियमों को लेकर दिग्गजों का खेमा दो गुटों में बंटा हुआ है. एक तपका मानता है कि यदि तकनीक उपलब्ध है तो फैसला पूरी तरह तकनीक के आधार पर होना चाहिए. जबकि दूसरा तपका मानता है कि मैदान पर मौजूद अंपायर की भूमिका बनाए रखने के लिए यह नियम जरूरी है.

क्या ICC करेगी इस नियम में बदलाव?

क्रिकेट को बेहतर बनाने के लिए इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल हमेशा ही नियमों में संशोधन करती रहती है. हालांकि, अब तक आईसीसी ने अंपायर्स कॉल नियम में संशोधन को लेकर कोई जानकारी साझा नहीं की है. मगर, ये कहना गलत नहीं होगा कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल भविष्य में इस नियम में संशोधन के बारे में सोच सकती है. मगर, तब तक क्रिकेट के गलियारों में इस नियम को लेकर बहस जारी रहने वाली है.

ये भी पढ़ें: EXPLAINER : टेस्ट क्रिकेट में क्या होता है फॉलोऑन? कब और कैसे होता है इसका इस्तेमाल, जानें सब-कुछ

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  Sports

Bangladesh Cricket में बवाल, लिटन दास ने World Cup से बाहर होने पर Board को घेरा

बांग्लादेश के टी20 विश्व कप 2026 में हिस्सा न लेने को लेकर शुरू हुआ विवाद कई महीने बाद भी शांत होता नजर नहीं आ रहा है। अब टीम के कप्तान लिटन दास ने एक बार फिर इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी है और पूर्व अंतरिम खेल सलाहकार आसिफ नजरुल के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि खिलाड़ियों और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने मिलकर टूर्नामेंट में हिस्सा न लेने का फैसला किया था।

गौरतलब है कि यह विवाद उस समय शुरू हुआ था जब भारत में आयोजित होने वाले टी20 विश्व कप को लेकर बांग्लादेश ने सुरक्षा संबंधी चिंताएं जताई थीं। मौजूद जानकारी के अनुसार बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद से अनुरोध किया था कि टीम के मुकाबलों को भारत से बाहर किसी अन्य देश में ट्रांसफर किया जाए।

हालांकि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट और उपलब्ध जानकारी का मूल्यांकन करने के बाद यह माना कि भारत में खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर कोई विशेष खतरा नहीं है। इसके बाद परिषद ने मुकाबलों के कार्यक्रम में बदलाव करने से इनकार कर दिया था। जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी स्थिति पर कायम रहे, तब बांग्लादेश को प्रतियोगिता से बाहर कर दिया गया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया था।

अब बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र ‘प्रोथम आलो’ से बातचीत में लिटन दास ने कहा है कि खिलाड़ियों को इस फैसले में वास्तव में कोई भूमिका नहीं दी गई थी। उन्होंने बताया कि जनवरी में सरकारी अधिकारियों के साथ हुई बैठक को भी खिलाड़ियों ने एक औपचारिक कार्यक्रम के रूप में ही देखा था।

लिटन दास के अनुसार खिलाड़ियों से उनकी राय जरूर पूछी गई थी, लेकिन यह कोई वास्तविक विचार-विमर्श नहीं था। उन्होंने कहा कि वहां ऐसा कोई सवाल ही नहीं था, जिसमें खिलाड़ियों से फैसला लेने के लिए कहा गया हो। उनके मुताबिक खिलाड़ी केवल बैठक में शामिल होने और औपचारिक बातचीत के लिए पहुंचे थे।

बता दें कि लिटन दास ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि टीम की इच्छा केवल क्रिकेट खेलने की थी। उनका कहना था कि एक खिलाड़ी के तौर पर सभी की प्राथमिकता मैदान पर उतरना और अपने देश का प्रतिनिधित्व करना होता है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा का मुद्दा उन लोगों द्वारा उठाया गया, जो अंतिम फैसला लेने की स्थिति में थे।

सुरक्षा संबंधी तर्क पर सवाल उठाते हुए लिटन दास ने पाकिस्तान दौरे का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की टीम पहले पाकिस्तान में भी क्रिकेट खेल चुकी है, जहां खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए बेहद कड़े इंतजाम किए जाते थे। उनके अनुसार वहां खिलाड़ियों के कमरों के बाहर तक हथियारबंद सुरक्षा कर्मी तैनात रहते थे।

लिटन ने कहा कि यदि पाकिस्तान जैसे माहौल में टीम क्रिकेट खेल सकती है, तो केवल सुरक्षा के आधार पर भारत में खेलने से इनकार करना खिलाड़ियों की सोच नहीं थी। उन्होंने दोहराया कि अंतिम निर्णय खिलाड़ियों ने नहीं बल्कि अन्य जिम्मेदार पक्षों ने लिया था।

जब उनसे पूर्व अंतरिम खेल सलाहकार आसिफ नजरुल के बयान के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए प्रतिक्रिया दी। लिटन ने कहा कि अब आसिफ नजरुल किसी पद पर नहीं हैं, इसलिए उन्होंने उस समय ऐसी बातें कही थीं।

गौरतलब है कि बांग्लादेश के विश्व कप से बाहर होने का मामला उस समय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में काफी चर्चा का विषय बना था। अब कप्तान लिटन दास के नए बयान के बाद यह बहस फिर से तेज हो गई है कि आखिर उस फैसले की वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी और खिलाड़ियों की भूमिका उसमें कितनी थी।
Tue, 09 Jun 2026 22:07:19 +0530

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