पुराने समय में कुंए पर लकड़ी व लोहे की लगाई जाती थी गड़ारी, हजारों लीटर पानी निकालने के लिए होता था प्रयोग, जाने
पहले जब नल,टोटी आदि नहीं होता था तो कुएं का इस्तेमाल किया जाता था और कुएं में एक गड़ारी लगाई जाती थी. यह गड़ारी गोल आकृति में होती थी और इसके ऊपर हल्का ढाल होता था और दोनों किनारो पर इसके सगरे उठे होते थे और इसी के बीच रस्सी फंसाई जाती थी और इसी गड़ारी के ऊपर लगी रस्सी को जब खींचा जाता था तो यह गोल-गोल घूमती थी और नीचे से बाल्टी में भरा पानी ऊपर की ओर ले आती थी. ऐसे में आज हम जानेंगे कि विलुप्त हो रही है इस गड़ारी यंत्र का क्या काम होता था और अब यह क्यों विलुप्त हो रही है.
शिबू सोरेन की सीट पर परिवार नहीं, बैद्यनाथ राम क्यों? हेमंत सोरेन ने तोड़ा 'मिथक' और लगा दिया मास्टरस्ट्रोक
Rajya Sabha Election Jharkhand: राजनीति में कई फैसले चुनाव जीतने के लिए लिए जाते हैं और कुछ फैसले भविष्य की राजनीति लिखने के लिए. झारखंड मुक्ति मोर्चा ने शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई राज्यसभा सीट पर बैद्यनाथ राम को उम्मीदवार बनाकर शायद दूसरा रास्ता चुना है. जिस सीट पर परिवार के किसी सदस्य की दावेदारी सबसे मजबूत मानी जा रही थी, वहां एक आदिवासी नेता के नाम का ऐलान हुआ. पहली नजर में यह एक साधारण राजनीतिक फैसला दिखता है, लेकिन इसके भीतर गहरी राजनीतिक तैयारी की कई परतें छिपी हुई हैं.
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