PoK में भड़की हिंसा: विरोध प्रदर्शन के दौरान 11 की मौत, जानिए पाकिस्तान सरकार के खिलाफ क्यों सड़कों पर उतरे लोग?
PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इन दिनों हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। सरकार द्वारा 'ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी' (JAAC) नामक नागरिक समूह पर प्रतिबंध लगाने के बाद क्षेत्र में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। इस दौरान हुई हिंसक झड़पों में अब तक 11 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 70 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में सुरक्षा बल के जवान और प्रदर्शनकारी दोनों शामिल हैं।
क्यों शुरू हुआ यह हिंसक प्रदर्शन?
हिंसा की शुरुआत तब हुई जब JAAC के समर्थक एक अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर जमा हुए थे, जहाँ एक कार्यकर्ता का शव लाया गया था। इस दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ को हटाने की कोशिश की, जिससे स्थिति बेकाबू हो गई और फायरिंग की घटना हुई। इसके बाद प्रशासन ने क्षेत्र में इंटरनेट सेवाओं को बाधित कर दिया है और बड़ी सभाओं पर रोक लगा दी है।
Rawalakot, PoK: Reports of casualties and injuries have emerged amid ongoing protests. Some reports allege that security forces opened fire, though official details remain unclear. pic.twitter.com/qYV65tZ2rq
— Thought to Thought ???????????? (@T2TVerse) June 9, 2026
JAAC पर प्रतिबंध और जनता का आक्रोश
क्षेत्रीय प्रशासन ने पिछले सप्ताह JAAC को आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह समूह आम लोगों के हितों की आवाज उठा रहा था, जबकि सरकार ने इसे गैरकानूनी करार दिया है। इस प्रतिबंध ने स्थानीय जनता में सरकार के खिलाफ और अधिक गुस्सा भर दिया है।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
प्रदर्शनकारियों की मांगों के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण हैं, जिनमें सबसे प्रमुख मुद्दा विधानसभा सीटों का आरक्षण है। प्रशासन द्वारा 45 सदस्यीय विधानसभा में से 12 सीटों को उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया गया है, जो कश्मीर से बाहर पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रह रहे हैं। स्थानीय निवासियों और प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि यह कदम उनकी राजनीतिक भागीदारी को कमजोर करेगा और स्थानीय लोगों की आवाज को विधानसभा में कम कर देगा।
इसके अलावा, यह विरोध प्रदर्शन पिछले दो वर्षों से चल रही आर्थिक तंगी और प्रशासनिक उपेक्षा का परिणाम है। क्षेत्र में लगातार बढ़ती महंगाई, बिजली की भारी कटौती, बेरोजगारी और बढ़ती उपयोगिता लागत (utility costs) ने आम जनजीवन को प्रभावित किया है। लोगों का आरोप है कि सरकार स्थानीय स्तर पर इन बुनियादी समस्याओं को सुलझाने में पूरी तरह विफल रही है, जिसके कारण जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
अंत में, प्रदर्शनकारी सरकार द्वारा की गई कठोर कार्रवाइयों और JAAC पर लगाए गए प्रतिबंध का भी पुरजोर विरोध कर रहे हैं। आंदोलनकारी इंटरनेट सेवाओं पर लगी पाबंदियों और अपने नेताओं की मौत को भी अपनी मांगों का एक मुख्य आधार बना रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना है कि वे इन आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर सरकार की उदासीनता को और अधिक समय तक बर्दाश्त नहीं करेंगे और अपने अधिकारों की प्राप्ति तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
मानवाधिकार आयोग ने उठाए सवाल
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने इस हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने JAAC को आतंकी कानून के तहत बैन करने के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि लोगों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार होना चाहिए। आयोग स्थिति का जायजा लेने के लिए एक फैक्ट-फाइंडिंग टीम भेजने की योजना बना रहा है।
आगे क्या होगा?
JAAC नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकारी दबाव और दमन के बावजूद पीछे नहीं हटेंगे। संगठन ने इंटरनेट बंद करने और अपने नेताओं की मौत के खिलाफ अपना आंदोलन जारी रखने का संकल्प लिया है। इस बीच, 27 जुलाई को होने वाले चुनावों के मद्देनजर सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका असर दिख रहा है, जहां ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों ने अपने नागरिकों के लिए ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर दी है।
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