Tuesday Gold Rate: सोने में फिर आया उछाल, जानें 22K और 24K सोने का 10 ग्राम का ताजा भाव
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और डॉलर के उतार-चढ़ाव के बीच 9 जून 2026 को भारतीय सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में फिर उछाल देखने को मिला है। घरेलू बाजार में शुद्ध सोने (24 कैरेट) की कीमतों में प्रति 10 ग्राम एक हजार रुपये से अधिक की तेजी दर्ज की गई है, जिसके बाद सोने का भाव लगभग 1,52,580 से 1,53,600 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है। वहीं, आभूषण बनाने के लिए सबसे ज्यादा मांग में रहने वाले 22 कैरेट सोने की कीमत 1,39,760 से 1,41,990 रुपये प्रति 10 ग्राम दर्ज की गई है।
इसके अलावा, 18 कैरेट सोने का भाव 1,14,430 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बना हुआ है।औद्योगिक मांग और मजबूत निवेश के कारण चांदी के दाम में प्रति किलो 1,300 रुपये से अधिक की बढ़त हुई है। इस तेजी के साथ बाजार में 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत 2,45,600 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई है। कुछ प्रमुख खुदरा बाजारों में स्थानीय करों और भौगोलिक कारणों की वजह से चांदी के भाव 2,59,900 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास पहुंच गए हैं।
अमेरिकी आर्थिक (रोजगार) आंकड़े मजबूत होने के बाद ग्लोबल मार्केट में डॉलर इंडेक्स तेजी से बढ़कर 100 के आसपास पहुंच गया। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर के मजबूत होने से अन्य देशों की मुद्राओं (जैसे भारतीय रुपया) के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर वैश्विक और घरेलू मांग पर पड़ता है और कीमतें प्रभावित होती हैं।
कच्चे तेल के महंगे होने से वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ने का भी खतरा बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव वैश्विक बाजार में 92.24 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड का भाव भी 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है। फिलहाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होकर 95.18 रुपए से 95.50 रुपए प्रति डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।
रुपए में आ रही इस गिरावट से भारत के लिए कच्चे तेल और सोने का आयात करना लगातार महंगा होता जा रहा है जिसका असर देश के चालू खाता घाटे पर पड़ रहा है, जिससे घरेलू स्तर पर महंगाई बढ़ने का खतरा और गहरा गया है। इससे केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना या उन्हें लंबे समय तक ऊंचा रखने की आशंका भी बढ़ गई है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मध्यस्थता के बाद अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की उम्मीद बढ़ गई है
बाजार विश्लेषकों की मानें तो पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक केंद्रीय बैंकों द्वारा लगातार की जा रही सोने की खरीदारी से कीमतों को बल मिल रहा है। फिलहाल अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर आने वाले बयानों और महंगाई के आंकड़ों पर निवेशकों की नजरें टिकी हुई हैं। निवेशक भारी निवेश करने से बच रहे हैं और वेट एंड वॉच (रुको और देखो) की नीति अपना रहे हैं। जब तक वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों और डॉलर की स्थिति साफ नहीं होती, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव का यह दौर जारी रह सकता है।
ध्यान रहे कि ऊपर दिए गए सोने-चांदी के भावों में राज्यों के जीएसटी (GST) और ज्वैलरी के मेकिंग चार्ज शामिल नहीं हैं, इसलिए राज्यवार खुदरा दुकान पर अंतिम रेट अलग हो सकते हैं। स्थानीय टैक्स, परिवहन लागत और ज्वेलर्स के मेकिंग चार्ज के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल सकता है। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है इसे निवेश की सलाह ना मानें। हम किसी भी कंटेंट की सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी या ज़िम्मेदारी नहीं लेते हैं। बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी प्रकार के निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या बाजार विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।
MP में सीएम डॉ. मोहन यादव की 1033 घोषणाओं में सिर्फ 185 पूरी: उमंग सिंघार का तंज- एक और घोषणावीर मुख्यमंत्री मिला
मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रस्तुत आंकड़ों का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच मुख्यमंत्री द्वारा की गई 1033 घोषणाओं में से सिर्फ 185 ही पूरी हो सकी हैं। उन्होंने सरकार पर घोषणाओं और जमीनी कामकाज के बीच बड़े अंतर का आरोप लगाया है।
सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में उमंग सिंघार ने सुप्रसिद्ध कवि अदम गोंडवी का शेर उद्धृत करते हुए कहा “तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आँकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है।” उन्होंने कहा कि यह पंक्तियां मुख्यमंत्री की घोषणाओं की वास्तविक स्थिति को दर्शाती हैं।
मुख्यमंत्री की अधिकांश घोषणाएं अधूरी, उमंग सिंघार ने घेरा
उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर निशाना साधते हुए कहा है कि उनकी सरकार की घोषणाएं सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गई हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि” लगता है मध्य प्रदेश को एक और “घोषणावीर मुख्यमंत्री” मिल गया है। घोषणावीर मुख्यमंत्री रिटर्न।”
कांग्रेस नेता ने विधानसभा में उपलब्ध जानकारी का उद्धरण देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई कुल घोषणाओं में से लगभग 18 प्रतिशत ही पूरी हो पाई हैं, जबकि 82 प्रतिशत घोषणाएं अब भी अमल में आने का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि अधिकांश घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर सकीं तो फिर उनका उद्देश्य जनता को लाभ पहुंचाना था या बीजेपी सिर्फ सुर्खियां बटोरना चाहती थी।
विधानसभा के आंकड़ों का हवाला देते हुए किए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कुछ सरकारी विभागों के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया है कि लोक निर्माण विभाग में 144 घोषणाओं में से सिर्फ 4 पूरी हुई हैं। जल संसाधन विभाग में 46 में से 1, पर्यटन विभाग में 39 में से 1, स्वास्थ्य विभाग में 65 में से 6, नगरीय प्रशासन विभाग में 133 में से 12 तथा उद्योग विभाग में 20 में से सिर्फ 2 घोषणाएं पूरी हो सकीं। इन आंकड़ों के आधार पर उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
बता दें कि विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार दिसंबर 2023 से जनवरी 2026 के बीच मुख्यमंत्री द्वारा कुल 1033 घोषणाएं दर्ज की गईं। इनमें से 185 को पूर्ण बताया गया है, जबकि 848 घोषणाएं विभिन्न स्तरों पर लंबित हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार कई प्रमुख विभागों में घोषणाओं की संख्या अधिक है, लेकिन उनपर उस गति से अमल होता कम दिख रहा है। कांग्रेस नेता ने इन आंकड़ों को मुद्दा बनाते हुए बीजेपी सरकार को घेरा है।
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