कफ विकार दूर कर मानसिक समस्याओं में राहत देता है नाड़ी शोधन प्राणायाम
नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। विश्व योग दिवस (21 जून) अब बस कुछ ही दिनों की दूरी पर है। इस बीच भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने नाड़ी शोधन प्राणायाम को विशेष रूप से रेखांकित किया है। यह प्राणायाम मन की शांति, एकाग्रता और शारीरिक संतुलन का आसान और बेहद प्रभावशाली तरीका माना जाता है।
मंत्रालय के अनुसार, इसके नियमित अभ्यास से न सिर्फ मानसिक समस्याएं दूर होती हैं बल्कि कफ संबंधी विकारों में भी राहत मिलती है। नाड़ी शोधन प्राणायाम को वैकल्पिक नासिका श्वास प्राणायाम भी कहा जाता है। यह योग की मूलभूत और सबसे सुरक्षित प्रक्रियाओं में से एक है। इसमें एक नासिका छिद्र से सांस ली जाती है और दूसरे से छोड़ी जाती है। इसकी तकनीक इतनी आसान है कि शुरुआती अभ्यासी भी आसानी से इसे कर सकते हैं।
आयुष मंत्रालय के ‘योग फॉर हेल्दी एजिंग’ संकल्प के तहत इस प्राणायाम को बढ़ावा दिया जा रहा है। ऐसे में योग एक्सपर्ट बताते हैं कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, चिंता और मानसिक अस्थिरता को दूर करने में नाड़ी शोधन बेहद उपयोगी सिद्ध होता है। इसका नियमित अभ्यास मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को संतुलित करता है, जिससे गहरी एकाग्रता बढ़ती है।
इसके प्रमुख लाभ को देखें तो यह मन को शांत और स्थिर बनाता है और तनाव - चिंता के स्तर को काफी कम करता है। इसके अभ्यास से एकाग्रता और स्मरण शक्ति बढ़ती है और कफ विकारों जैसे सर्दी, खांसी, बलगम संबंधी समस्याएं में भी राहत मिलती है। साथ ही आंतरिक ऊर्जा के प्रवाह को बेहतर बनाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सुबह खाली पेट 10-15 मिनट का अभ्यास ही काफी फायदेमंद होता है। धीरे-धीरे समय बढ़ाकर 20-30 मिनट तक किया जा सकता है। यह प्राणायाम उन लोगों के लिए खासतौर पर उपयोगी है जो ऑफिस वर्क, पढ़ाई या मानसिक दबाव वाली दिनचर्या में व्यस्त रहते हैं।
योग गुरुओं के मार्गदर्शन में सही तरीके से अभ्यास करने पर इसके बेहतर परिणाम देखने को मिलते हैं।
--आईएएनएस
एमटी/एएस
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बेरहम बेटे ने की सरेआम पिता की पिटाई, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने किया अरेस्ट, जानें फिर क्या हुआ
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है. एक ओर जहां एक बेटे पर अपने बुजुर्ग पिता के साथ मारपीट करने का आरोप लगा है, वहीं दूसरी ओर वही पिता अब पुलिस से अपने बेटे को छोड़ने की गुहार लगा रहे हैं. यह मामला केवल एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि रिश्तों की जटिलता और माता-पिता के निस्वार्थ प्रेम को भी सामने लाता है.
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली. वीडियो में बेटे की कथित हरकतों ने कई लोगों को भावुक और आक्रोशित दोनों कर दिया.
सड़क पर हुई मारपीट का वीडियो वायरल
जानकारी के अनुसार, घटना सहारनपुर के कुतुबशेर थाना क्षेत्र के मानकमऊ इलाके की है. वायरल वीडियो में बुजुर्ग हाजी तहसीन और उनके बेटे गुल्फिशान के बीच विवाद दिखाई देता है. वीडियो में बेटे को अपने पिता के साथ अभद्र व्यवहार करते और मारपीट करते हुए देखा जा सकता है.
In Saharanpur, a heartless son slapped his father several times; the father kept crying, but the son's heart did not melt. pic.twitter.com/o4nLfDmJAc
— FighterPunch (@Fighter_Punchh) June 8, 2026
क्या बोले प्रत्यक्षदर्शी
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घरेलू विवाद के चलते दोनों के बीच कहासुनी हुई थी, जो बाद में हिंसक झगड़े में बदल गई. घटना के दौरान आसपास मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप करने की कोशिश भी की, लेकिन तब तक विवाद काफी बढ़ चुका था.
सोशल मीडिया पर उठी कार्रवाई की मांग
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी. कई लोगों ने बुजुर्ग के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार की निंदा करते हुए आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.
मामले ने तेजी से तूल पकड़ लिया और स्थानीय पुलिस तक भी शिकायतें पहुंचने लगीं. इसके बाद पुलिस ने तत्काल संज्ञान लेते हुए आरोपी बेटे को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी.
पिता का बयान बना चर्चा का विषय
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे भावुक पहलू तब सामने आया जब बुजुर्ग पिता ने स्वयं पुलिस से अपने बेटे को छोड़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि उनका बेटा गलत नहीं है और उसे जेल में नहीं रखा जाना चाहिए.
पिता की यह अपील लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई. कई लोगों ने इसे एक पिता के असीम प्रेम और क्षमा की भावना का उदाहरण बताया, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार के मामलों में कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित नहीं होना चाहिए.
समाज के सामने बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक परिवार का विवाद नहीं है, बल्कि समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है. बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव और पारिवारिक मूल्यों में आ रहे बदलावों के बीच बुजुर्गों के सम्मान और सुरक्षा का मुद्दा लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है.
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. लेकिन इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि माता-पिता का प्रेम कितना निस्वार्थ होता है, जो अपमान और पीड़ा के बाद भी अपने बच्चों के लिए माफी और दया की ही कामना करता है.
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