' 21 साल बाद टूटी शादी, मां को हुआ कैंसर', Arjun Rampal ने सुनाई जिंदगी के भयानक दौर की कहानी
Arjun Rampal on His Darkest Phase: बॉलीवुड एक्टर अर्जुन रामपाल इन दिनों अपनी फिल्म 'धुरंधर 2' को लेकर सुर्खियों में हैं. धुरंधर फिल्म में मेजर इकबाल के किरदार में उनकी एक्टिंग की काफी तारीफ हो रही है. हालांकि इस बार चर्चा सिर्फ उनकी प्रोफेशनल लाइफ को लेकर नहीं, बल्कि उनकी निजी जिंदगी से जुड़े उन दर्दनाक अनुभवों को लेकर भी हो रही है, जिनका जिक्र उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में किया है.
कई बड़े झटकों की वजह से टूट गए थे एक्टर
अर्जुन रामपाल ने अपनी जिंदगी के उस दौर को याद किया है जब एक साथ कई बड़े झटकों ने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया था. 21 साल पुरानी शादी का टूटना, मां की गंभीर बीमारी, पिता को खोने का दुख और करीबी रिश्तों का बिखरना इन सबने उन्हें मानसिक और भावनात्मक रूप से बेहद कमजोर कर दिया था. उन्होंने स्वीकार किया कि वो समय उनकी जिंदगी का सबसे डार्क दौर था.
'मैं लोगों से नहीं, खुद से दूर हो गया था'
एक बातचीत के दौरान अर्जुन रामपाल ने कहा कि अकेलापन हमेशा लोगों की कमी से नहीं आता, बल्कि कई बार इंसान खुद से ही दूर हो जाता है. उनके मुताबिक, उनके जीवन का सबसे कठिन समय वही था जब वो अपने आप से जुड़ाव खो चुके थे. अर्जुन ने कहा, "मुझे लगता है कि मैंने अपनी जिंदगी में सबसे ज्यादा अकेलापन तब महसूस किया, जब मैं खुद से उस तरह जुड़ा हुआ नहीं था जैसा आज हूं. बाहर से सब कुछ नार्मल दिखाई दे सकता था, लेकिन अंदर से मैं बिखर रहा था." उन्होंने बताया कि उस दौरान उनकी शादी भी मुश्किल दौर से गुजर रही थी और रिश्ते में पहले जैसी समझ और संतुलन नहीं बचा था.
'प्यार स्थिर नहीं होता, लोग बदलते हैं'
अपनी शादी और रिश्तों पर बात करते हुए अर्जुन रामपाल ने कहा कि जिंदगी में कुछ भी स्थायी नहीं होता. इंसान समय के साथ बदलता है और कई बार रिश्ते उसी गति से आगे नहीं बढ़ पाते. उन्होंने कहा, "ये दुखद था क्योंकि मैं मानता हूं कि प्यार कोई स्थिर चीज नहीं है. जीवन लगातार बदलता रहता है. हम भी बदलते हैं. कभी-कभी दो लोग साथ रहते हुए भी एक जैसी दिशा में विकसित नहीं हो पाते और यही दूरी धीरे-धीरे रिश्ते को प्रभावित करने लगती है."
21 साल लिया था तलाक
गौरतलब है कि अर्जुन रामपाल ने साल 1998 में सुपरमॉडल मेहर जेसिया से शादी की थी. दोनों की दो बेटियां हैं. करीब 21 साल साथ रहने के बाद दोनों ने अलग होने का फैसला किया और 2019 में उनका तलाक हो गया. हालांकि दोनों ने अपने रिश्ते को सम्मानजनक तरीके से खत्म किया और आज भी बच्चों की जिम्मेदारियों को लेकर परिपक्व रवैया अपनाते हैं.
जब मां कैंसर से लड़ रही थीं...
अर्जुन रामपाल ने बताया कि शादी टूटने का दर्द ही उनकी जिंदगी की एकमात्र चुनौती नहीं था. उसी दौरान उनकी मां गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं. उन्होंने कहा, "वो शायद मेरी जिंदगी का सबसे अंधेरा दौर था क्योंकि उसी समय मेरी मां कैंसर से लड़ रही थीं और मैं धीरे-धीरे उन्हें खो रहा था." एक्टर ने बताया कि अपनी मां की तकलीफ को करीब से देखना उनके लिए बेहद कठिन था. एक बेटे के रूप में वो असहाय महसूस करते थे क्योंकि चाहकर भी वो उनकी पीड़ा को कम नहीं कर सकते थे.
पिता को खोने का दर्द भी था ताजा
अर्जुन ने ये भी बताया कि मां की बीमारी से पहले ही वो अपने पिता को खो चुके थे. पिता के निधन का दुख अभी पूरी तरह कम भी नहीं हुआ था कि जिंदगी ने उन्हें एक के बाद एक कई और झटके दे दिए. उन्होंने कहा, "मैं अपने करीबी लोगों को खो रहा था. तीन साल पहले मैंने अपने पिता को खोया था. इसके बाद मां की बीमारी, रिश्तों का टूटना और दोस्तों से दूरियां सब कुछ एक साथ हो रहा था." उनके मुताबिक, ऐसा लग रहा था जैसे उन्होंने जिन चीजों को बनाने और बचाने के लिए पूरी जिंदगी मेहनत की थी, वो सब धीरे-धीरे उनसे दूर होती जा रही थीं.
'जब सब कुछ खो जाता है, तब इंसान खुद को खोजता है'
अर्जुन रामपाल का मानना है कि जिंदगी के सबसे कठिन दौर अक्सर इंसान को खुद के बारे में सबसे ज्यादा सिखाते हैं. उन्होंने कहा कि जब उनके पास कोई जवाब नहीं बचा, तब उन्होंने अपने भीतर झांकना शुरू किया. एक्टर ने कहा, "जब आप सब कुछ खो देते हैं तो आपके सामने सिर्फ एक रास्ता बचता है आत्मनिरीक्षण. तब आपको खुद से सवाल पूछने पड़ते हैं. आपको समझना पड़ता है कि आप कौन हैं, क्या बन गए हैं और आपकी क्या गलतियां रही हैं." उनका मानना है कि हर मुश्किल अनुभव इंसान को अपनी कमजोरियों और कमियों को समझने का मौका देता है, बशर्ते वह ईमानदारी से खुद का सामना करने को तैयार हो.
'दूसरों को दोष देने से नहीं मिलती राहत'
अर्जुन रामपाल ने बातचीत के दौरान ये भी कहा कि जिंदगी की परेशानियों के लिए हमेशा दूसरों को जिम्मेदार ठहराना आसान होता है, लेकिन इससे कोई समाधान नहीं निकलता. उन्होंने कहा, "अगर आप हर बात के लिए दूसरों को दोष देते हैं तो आप खुद को पीड़ित बना लेते हैं. इससे आपकी तकलीफ और बढ़ जाती है. असली विकास तब होता है जब आप अपनी गलतियों को स्वीकार करते हैं और उनसे सीखते हैं." अर्जुन के मुताबिक, आत्मस्वीकृति और आत्मनिरीक्षण ही किसी भी इंसान को मानसिक रूप से मजबूत बनाते हैं और उसे जीवन में आगे बढ़ने की ताकत देते हैं.
मुश्किल दौर के बाद मिली नई शुरुआत
आज अर्जुन रामपाल अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं. मेहर जेसिया से अलग होने के बाद वो मॉडल गैब्रिएला डेमेट्रिएड्स के साथ रिश्ते में हैं. दोनों लंबे समय से साथ हैं और दो बेटों के माता-पिता भी हैं. हालांकि अर्जुन का कहना है कि जिंदगी के सबसे कठिन अनुभवों ने उन्हें पहले से कहीं ज्यादा परिपक्व, मजबूत और आत्मविश्वासी बनाया है. यही वजह है कि आज वो अपने अतीत को दर्द के रूप में नहीं, बल्कि एक सीख के रूप में देखते हैं.
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लिवर और किडनी के लिए बेहद लाभकारी मंडूकासन, तनाव को भी करता है कम
नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। आधुनिक जीवन की भागदौड़ और अनियमित जीवनशैली ने मानव के खान-पान और रहन-सहन को पूरी तरह बदल दिया है। इस बदलाव का सीधा और सबसे प्रतिकूल प्रभाव हमारे आंतरिक अंगों पर पड़ता है, जिनमें मुख्य रूप से लिवर और किडनी सर्वाधिक प्रभावित होते हैं। जहां लिवर शरीर से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने (डिटॉक्सिफिकेशन) का कार्य करता है, वहीं किडनी रक्त को शुद्ध (फिल्टर) करती है।
इन दोनों अंगों की कार्यप्रणाली प्रभावित होने पर शरीर कई गंभीर रोगों की चपेट में आ जाता है। यही कारण है कि लोग अब अपनी सेहत को दुरुस्त रखने के लिए फिर से योग का रुख कर रहे हैं। कई योगासनों में एक आसन है मंडूकासन, जिसके बारे में कहा जाता है कि यह लिवर और किडनी के लिए काफी फायदेमंद होता है।
मंडूकासन बेहद आसान है। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले वज्रासन में बैठना होता है और फिर दोनों हाथों की मुट्ठी इस तरह बनाए कि अंगूठा उंगलियों के अंदर हो। अब दोनों हाथों की मुट्ठी को पेट के पास रखे और आगे की तरफ झुके। यह आसन पेट पर हल्का दबाव डालता है। इस स्थिति में कुछ समय तक रहे और फिर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आ जा जाएं।
मंडूकासन करने के दौरान जो पेट के हिस्से पर हल्का दबाव बनता है, इससे पेट के अंदर मौजूद अंगों में खून का बहाव बेहतर होता है। बेहतर खून के बहाव से अंगों तक ज्यादा ऑक्सीजन और पोषण पहुंचता है। इसी प्रक्रिया को लिवर और किडनी के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि इससे उनका काम करने का तरीका बेहतर होता है।
लिवर के मामले में यह आसन इसलिए उपयोगी माना जाता है क्योंकि लिवर हमारे शरीर से गंदगी और जहरीले तत्वों को साफ करता है। जब पेट पर हल्का दबाव पड़ता है तो लिवर के आसपास की नसें और रक्त प्रवाह सक्रिय होते हैं। इससे लिवर को अपना काम करने में आसानी होती है। साथ ही पाचन क्रिया भी बेहतर होती है, क्योंकि लिवर पाचन रस बनाने में भी मदद करता है। जब पाचन अच्छा होता है तो लिवर पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता।
किडनी के लिए भी मंडूकासन को लाभकारी माना जाता है। किडनी का काम खून को छानना और शरीर से गंदगी को पेशाब के रास्ते बाहर निकालना होता है। जब इस योगासन में पेट और कमर के निचले हिस्से में हल्का दबाव पड़ता है, तो वहां खून का बहाव बढ़ता है। इससे किडनी को अपना काम बेहतर तरीके से करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही शरीर में पानी और नमक का संतुलन भी ठीक रखने में सहायता मिलती है।
इस योगासन का एक और फायदा यह है कि यह तनाव कम करने में मदद करता है। जब व्यक्ति गहरी सांस लेकर इस स्थिति में रहता है, तो शरीर और दिमाग दोनों शांत होते हैं। तनाव कम होने से शरीर के अंदरूनी अंगों पर भी अच्छा असर पड़ता है।
--आईएएनएस
पीके/एएस
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