व्यापारी की जेब में बम की तरह फटा चाइनीज मोबाइल,VIDEO:पैंट में आग लगी, पैर-अंगुलियां बुरी तरह जले, दुकान में धुआं भरा
जोधपुर में किराना व्यापारी की पैंट की जेब में रखा मोबाइल अचानक बम की तरह ब्लास्ट हो गया। इसके बाद मोबाइल में आग लग गई। व्यापारी के घुटने के ऊपर (जांघ) का हिस्सा और हाथ की अंगुलियां गंभीर रूप से झुलस गईं। चमड़ी तक उधड़ गई है। तड़पते हुए व्यापारी ने खुद को बचाने के लिए जेब से जलता हुआ फोन बाहर निकालने की कोशिश की, तो उनके हाथ की अंगुलियां जल गईं। घायल व्यापारी गोपाल सोनी (39) को तुरंत मंडोर के सैटेलाइट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। हालत गंभीर होने के कारण मंगलवार को परिजन उन्हें महात्मा गांधी अस्पताल की बर्न यूनिट में शिफ्ट करेंगे। यह घटना मंडोर कृषि मंडी इलाके में सोमवार दोपहर में हुई। हादसे की PHOTOS… ऐसा लगा जैसे जोरदार करंट लगा हो लाल सागर इलाके के रहने वाले व्यापारी गोपाल सोनी ने हॉस्पिटल से भास्कर को बताया कि सोमवार दोपहर करीब 3:30 बजे वे मंडी स्थित अपनी किराना दुकान पर बैठे थे। उन्होंने बताया- मैं हमेशा अपना मोबाइल शर्ट की ऊपर वाली जेब में रखता हूं। सोमवार को टी-शर्ट पहनी थी, इसलिए फोन पैंट की जेब में था। मैं काउंटर की दराज (ड्रॉवर) में कुछ चेक कर रहा था कि अचानक तेज धमाका हुआ और पैंट में आग लग गई। एक पल के लिए मुझे लगा कि पास रखे लैपटॉप से मुझे करंट लगा है। लेकिन जैसे ही नीचे देखा, जेब से धुंआ और आग निकल रही थी। मैं दर्द के मारे चिल्लाता हुआ टेबल से दूर भागा। जेब से जलता फोन निकाला तो उंगलियां भी जल गईं। फोन न ओवरहीट था, न 100% चार्ज... फिर क्यों फटा? इस हादसे ने स्मार्टफोन यूजर्स की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि गोपाल के मुताबिक फोन में ब्लास्ट होने का कोई शुरुआती संकेत नहीं मिला था। गोपाल सोनी ने बताया- 2 साल पहले वीवो (Vivo) कंपनी का मोबाइल खरीदा था। आमतौर पर माना जाता है कि 100% से ज्यादा चार्ज होने या रातभर चार्जिंग पर छोड़ने से फोन फटते हैं, लेकिन हादसे के वक्त मोबाइल सिर्फ 87% चार्ज था। पीड़ित के अनुसार, ब्लास्ट से ठीक पहले फोन बिल्कुल नॉर्मल था। न तो वह गर्म (Heat) हुआ था और न ही उसमें कोई खराबी का संकेत दिख रहा था। अचानक हुए इस ब्लास्ट से दुकान में मौजूद अन्य व्यापारी भी सहम गए। हादसे के बाद दुकान में मची अफरा-तफरी धमाके के साथ ही गोपाल की पैंट की जेब से तेज धुंआ और आग की लपटें उठने लगीं। गोपाल दर्द से चीखते हुए दुकान में ही इधर-उधर भाग रहे थे। चिल्लाने की आवाज सुनकर कृषि मंडी के अन्य व्यापारी और पड़ोसी तुरंत दुकान की तरफ दौड़े। व्यापारियों ने तुरंत गोपाल को संभाला, उन्हें कुर्सी पर बैठाया और झुलसी हुई हालत में मंडोर के सैटेलाइट हॉस्पिटल पहुंचाया। जांघ का हिस्सा गंभीर रूप से जलने के कारण अब उन्हें स्पेशल बर्न वार्ड में ले जाया जा रहा है। --- ये खबर भी पढ़ें… मोबाइल चार्जिंग पॉइंट के पास रखी पेट्रोल बोतल में ब्लास्ट:आग लगने से युवक 40 प्रतिशत झुलसा, खाना खाते समय चला रहा था फोन अलवर में मोबाइल चार्जिंग पॉइंट में स्पार्किंग के कारण उसके पास रखी पेट्रोल से भरी बोतल में ब्लास्ट हो गया। चार्जिंग पर लगा मोबाइल युवक के हाथ में था। विस्फोट के कारण आग लगने से युवक गंभीर रूप से झुलस गया। (पूरी खबर पढ़ें)
अकेलेपन से खड़ा हुआ हजारों करोड़ का कारोबार:चीन में साथ घूमने, खाने-पीने के लिए किराए पर मिल रहे साथी
चीन में बढ़ते अकेलेपन के चलते युवा और शहरी उपभोक्ता अब केवल दोस्ती या रिश्तों के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा की गतिविधियों में साथ देने के लिए भी लोगों को किराए पर ले रहे हैं। कोई ट्रैकिंग पर जाने, हॉटपॉट खाने, फिल्म देखने, शॉपिंग करने या शहर घूमने के लिए साथी बुक कर रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऐसे लोगों को जोड़ रहे हैं जो कुछ घंटों के लिए भुगतान लेकर साथ निभाते हैं, लेकिन यह सेवा आमतौर पर रोमांटिक या यौन संबंधों से अलग रखी जाती है। इस प्रवृत्ति ने एक नए और तेजी से बढ़ती ‘कंपैनियनशिप इकोनॉमी’ को जन्म दिया है, जिसका आकार 70 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रवृत्ति चीन में बढ़ती एकल जीवनशैली, देर से विवाह, कम जन्मदर और सामाजिक अलगाव को दर्शाती है। कई युवा व्यस्त जीवन, काम के दबाव और सीमित सामाजिक दायरे के कारण अस्थायी साथ की तलाश कर रहे हैं। यह उद्योग आधुनिक चीन में बदलते सामाजिक संबंधों और भावनात्मक जरूरतों का एक नया आर्थिक रूप बनकर उभरा है। चीन के बड़े शहरों में युवा अब ट्रैकिंग, हॉटपॉट खाने, फिल्म देखने, शॉपिंग करने, संग्रहालय घूमने या किसी कार्यक्रम में जाने के लिए अस्थायी साथी बुक कर रहे हैं। दक्षिणी चीनी शहर गुइलिन के एक छात्र, 24 वर्षीय तांग जुनक्सिंग के मुताबिक कुछ माह पहले उसे पता चला कि लोगों के साथ यात्रा पर जाकर भी पैसे कमाए जा सकते हैं। तांग अब साथी बनकर आमतौर पर प्रति माह 50 से 70 हजार रुपए तक कमा लेता है। सामाजिक बदलाव के कारण यह ट्रेंड बढ़ रहा है? इसके पीछे कई सामाजिक बदलाव हैं। विवाह की औसत आयु बढ़ रही, जन्मदर घट रही है और अकेले रहने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। बड़ी संख्या में युवा नौकरी या पढ़ाई के लिए अपने गृह नगरों से दूर रहते हैं। लंबे कामकाजी घंटे और सीमित सामाजिक दायरा भी भावनात्मक रूप से अलग-थलग महसूस कराता है। कुछ घंटों के लिए भी किसी का साथ मिलना कई लोगों के लिए मानसिक राहत का माध्यम बन रहा है।
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