Ukraine Targets Russian Fuel | रूस की 'इकोनॉमिक लाइफलाइन' पर यूक्रेन का प्रहार! क्रीमिया के तेल प्रतिष्ठानों में आग लगी | Ukraine Russia War
यूक्रेन और रूस के बीच चल रहा युद्ध अब एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ जहां यूक्रेन ने रूस के भीतर और कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों में मौजूद तेल प्रतिष्ठानों (Oil Facilities) पर ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे चल रही कूटनीति का भी बड़ा खुलासा हुआ है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पहली बार आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि रूसी अरबपति और प्रीमियर लीग टीम चेल्सी के पूर्व मालिक रोमन अब्रामोविच दोनों देशों के बीच मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहे हैं।
जेलेंस्की ने ‘स्काई न्यूज’ को बताया कि प्रीमियर लीग टीम चेल्सी के पूर्व मालिक अब्रामोविच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का संदेश लेकर कीव गए थे। जेलेंस्की ने कहा कि अब्रामोविच यह संदेश लेकर आए थे कि रूसी पक्ष ‘‘यह समझना चाहता है कि हम क्या करने के लिए तैयार हैं’’।
उन्होंने यह भी कहा कि अब्रामोविच ने पुतिन तक उनका जवाब पहुंचाने का प्रस्ताव दिया था। इस बीच, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा कि रूस के खिलाफ प्रस्तावित नए प्रतिबंधों में रूस के ‘‘सैन्य औद्योगिक परिसर, मानवाधिकार उल्लंघनकर्ताओं और प्रचारकों’’ को लक्ष्य कर बनाए गए 80 बिंदु शामिल हैं। यूरोपीय संघ के रक्षा मंत्रियों की सोमवार को हुई बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में काजा कल्लास ने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों से रूस को अब तक अनुमानित 1.2 से 1.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान हो चुका है।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेनाओं ने सोमवार तड़के 310 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए, जिनमें मॉस्को क्षेत्र, पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी रूस, रूसी-अधिकृत क्रीमिया और काला सागर और आजोव सागर के ऊपर से गुजरने वाले ड्रोन भी शामिल हैं।
रूसी वायु सेना के अनुसार, रूस ने 155 ड्रोन का इस्तेमाल कर यूक्रेन को निशाना बनाया जिनमें से यूक्रेनी वायु रक्षा ने 124 ड्रोन को मार गिराया या निष्क्रिय कर दिया। यूक्रेन के जनरल स्टाफ ने कहा कि यूक्रेनी सेना ने रात भर रूस के क्रास्नोदार क्राई क्षेत्र पर हमला किया, जिसमें नोवोरोस्सियस्क के पास स्थित ग्रुशोवाया तेल ट्रांसशिपमेंट बेस को निशाना बनाया गया। रूसी क्षेत्रीय अधिकारियों ने पुष्टि की कि एक यूक्रेनी ड्रोन के कारण केंद्र में आग लगी और कहा कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है। उन्होंने नुकसान की सीमा पर कोई टिप्पणी नहीं की लेकिन उन्होंने कहा कि आग बुझाने में 130 बचावकर्मी लगे हुए थे।
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क्रीमिया में ईंधन संकट को लेकर ‘क्रेमलिन’ (रूसी राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) की चिंता के बारे में पूछे जाने पर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि ऊर्जा मंत्रालय और अन्य एजेंसियां स्थिति से निपटने के लिए उपायों पर काम कर रही हैं। जनरल स्टाफ ने कहा कि वोल्गोग्राद क्षेत्र में स्थित क्रास्नी यार का एक संयंत्र भी प्रभावित हुआ। बयान के अनुसार, केंद्र पर आग लग गई। रूसी गवर्नर आंद्रेई बोचारोव ने यह स्पष्ट नहीं किया कि संयंत्र में क्या उत्पादन होता है, लेकिन उन्होंने कहा कि कोई घायल नहीं हुआ है।
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यूक्रेन ने रविवार रात को रूस के कब्जे वाले क्रीमिया प्रायद्वीप में स्थित सेमिकोलोडेजकाया के एक तेल संयंत्र पर भी हमले किए जिससे संयंत्र में आग लग गई। ‘टेलीग्राम’ पर जारी बयान के अनुसार, इस संयंत्र का उपयोग रूसी सेना को ईंधन की आपूर्ति के लिए किया जाता है। जनरल स्टाफ ने बताया कि यूक्रेनी सेना ने क्रीमिया के फियोडोसिया के पास एक तेल डिपो पर भी हमला किया।
जेलेंस्की ने कहा कि उनका संदेश यही है कि पह पुतिन से रूस या बेलारूस को छोड़कर किसी भी स्थान पर ‘‘कभी भी’’ मुलाकात कर सकते हैं चाहे यह मुलाकात द्विपक्षीय रूप से हो या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूरोपीय नेताओं की भागीदारी के साथ हो। उन्होंने कहा कि यूक्रेन डोनबास क्षेत्र को नहीं छोड़ेगा, जिसका कुछ हिस्सा वर्तमान में रूस के कब्जे में है। पुतिन ने पिछले सप्ताह कहा था कि एक रूसी व्यवसायी (जिसका उन्होंने नाम नहीं बताया) पिछले महीने कीव गए थे, जिसमें दोनों नेताओं के बीच मुलाकात का प्रस्ताव रखा गया था, हालांकि रूसी नेता ने मुलाकात के प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्हें इसमें कोई फायदा नहीं दिखता।
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कोयला कारोबार में बड़ा बदलाव: भारत में कोल एक्सचेंज स्थापित करने का रास्ता हुआ साफ, बनेगा पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बाजार
नई दिल्ली, 9 जून (आईएएनएस)। सरकार ने देश में कोल एक्सचेंज स्थापित करने का रास्ता साफ कर दिया है। यह कदम भारत की कोयला आपूर्ति व्यवस्था को आधुनिक बनाने और पारदर्शी तथा बाजार-आधारित ट्रेडिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है।
कोयला मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि हाल ही में लागू खनिज और खनन (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2025 के तहत पहली बार मिनरल एक्सचेंज की अवधारणा पेश की गई है। इसके जरिए केंद्र सरकार को कोयले और उसके प्रसंस्कृत उत्पादों सहित विभिन्न खनिजों के पारदर्शी और प्रभावी व्यापार को बढ़ावा देने का अधिकार मिला है।
मंत्रालय के अनुसार, इस कानून को लागू करने के लिए सरकार ने इसी महीने कोल एक्सचेंज नियम, 2026 को अधिसूचित किया है।
इस पहल को आगे बढ़ाने के लिए सरकार ने दिसंबर 2025 में कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन (सीसीओ) को वह प्राधिकरण नियुक्त किया था, जो कोल एक्सचेंजों के पंजीकरण और नियमन की जिम्मेदारी संभालेगा।
मंत्रालय ने बताया कि पात्र संस्थाओं को सीसीओ की ओर से कोल एक्सचेंज स्थापित करने और संचालित करने की अनुमति दी जाएगी। ये संस्थाएं बाजार के नियम और उपनियम तैयार करेंगी तथा कोयले के व्यापार को सुगम बनाने का काम करेंगी।
सरकार के अनुसार, कोल एक्सचेंज का पंजीकरण 25 वर्षों के लिए मान्य होगा।
मंत्रालय ने कहा कि कोल एक्सचेंज की शुरुआत कोयला विपणन व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित होगी। इससे अब तक चल रही पारंपरिक एक विक्रेता से कई खरीदार व्यवस्था की जगह कई विक्रेता और कई खरीदार वाले प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म का विकास होगा।
नए ढांचे के तहत कोयले की कीमतों का निर्धारण अधिक पारदर्शी और बाजार आधारित तरीके से हो सकेगा। इससे कारोबार की दक्षता बढ़ेगी और वाणिज्यिक तथा कैप्टिव खदान संचालकों सहित सभी कोयला उत्पादकों को अधिक संख्या में खरीदारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
इसके अलावा, सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियां भी इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर अपनी बाजार भागीदारी को और मजबूत कर सकेंगी।
कोयला मंत्रालय ने एक बयान में कहा, कोल एक्सचेंज पहल सरकार की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पारदर्शिता बढ़ाने और आधुनिक तथा आत्मनिर्भर ऊर्जा तंत्र विकसित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
मंत्रालय के मुताबिक, अधिक प्रतिस्पर्धी और प्रभावी कोयला बाजार बनने से देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। साथ ही यह भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ऊर्जा क्षेत्र के विकास और टिकाऊ आर्थिक प्रगति को भी समर्थन देगा।
--आईएएनएस
डीबीपी
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