सपना टूट चुका था, तभी मिला बड़ा ब्रेक:चेतना पांडे पर विक्रम भट्ट ने भरोसा जताया, मिमोह बोले- फिल्म मिली, पापा गर्व से मुस्कुराए
फिल्म हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट के कलाकार मिमोह चक्रवर्ती और चेतना पांडे ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने संघर्ष, फिल्म और निजी अनुभव साझा किए। चेतना ने बताया कि वह एक्टिंग का सपना लगभग छोड़ चुकी थीं, लेकिन विक्रम भट्ट के एक फोन ने उनकी जिंदगी बदल दी। मिमोह ने फिल्म की कहानी को इसकी सबसे बड़ी ताकत बताया। दोनों कलाकारों ने शूटिंग के किस्से, हॉरर फिल्मों के अनुभव, मिथुन चक्रवर्ती से मिली सीख और फिल्म की खासियतों पर बात की। सवाल: ‘हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट’ तक पहुंचने का आपका सफर कैसा रहा? जवाब/चेतना पांडे: इस फिल्म से मेरा जुड़ाव किस्मत जैसा है। मुंबई आए मुझे काफी समय हो गया है और मेरी संघर्षभरी यात्रा रही है। आउटसाइडर होने पर बहुत मेहनत और ऑडिशन देने के बाद भी कई बार लगता है कि बड़े सपने पूरे नहीं होंगे। मैं नैनीताल से हूं। इंडस्ट्री में आने के बाद समझ आया कि यहां जगह बनाना आसान नहीं है। मैंने छोटे-छोटे रोल किए, जैसे शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले में काम किया। कई बार लगा कि अब वह मौका नहीं मिलेगा, जिसका मैं इंतजार कर रही हूं। लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। करीब तीन साल पहले मेरी मुलाकात विक्रम भट्ट सर से हुई थी। उस समय मैं लगभग अपने सपने छोड़ चुकी थी। मैंने उनसे कहा था कि मैंने बहुत मेहनत की है, लेकिन अब लगता है कि मुझे वह मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि मैं टैलेंटेड हूं और एक दिन बड़ा काम करूंगी। फिर करीब एक साल तक हमारी बात नहीं हुई। मैं खतरों के खिलाड़ी सीजन 12 कर रही थी, तभी उनका फोन आया। उन्होंने कहा कि मुझसे मिलो, मेरे पास तुम्हारे लिए कुछ है। उस समय हॉन्टेड 3डी: इकोस ऑफ द पास्ट की शूटिंग शुरू हो चुकी थी और दूसरी अभिनेत्री फिल्म कर रही थी। विक्रम सर ने मेरी तस्वीर देखी और उन्हें लगा कि उन्हें उनकी ‘सुनहरी’ मिल गई है। अगले दिन उन्होंने मुझे बुलाया और मेरा कॉन्ट्रैक्ट साइन हो गया। दूसरे दिन से मैंने शूटिंग शुरू कर दी। पहले दिन के बाद सर ने मेरी तारीफ की। तभी मुझे लगा कि यह फिल्म मुझे ही करनी थी। सवाल: मिमोह, आप पहले भी हॉन्टेड का हिस्सा रह चुके हैं। इस फिल्म की कौन-सी बात आपको सबसे खास लगी? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: सबसे खास इसकी कहानी लगी। ‘हॉन्टेड 3डी’ 15 साल पहले आई थी और भारत की पहली स्टीरियोस्कोपिक 3डी फिल्म थी। उसके गाने और कहानी दर्शकों को पसंद आए थे। जब विक्रम सर ने मुझे इसके सीक्वल की कहानी सुनाई तो मुझे तुरंत समझ आ गया कि दर्शकों को यह फिल्म पसंद आएगी। इसमें हॉरर, शानदार गाने और मजबूत कहानी है। मुझे लगता है कि इस फिल्म का असली हीरो इसकी कहानी है। हमने कलाकारों के तौर पर अपना सौ प्रतिशत देने की कोशिश की है, लेकिन दर्शकों को सबसे ज्यादा इसकी कहानी पसंद आएगी। इसी वजह से मैंने तुरंत फिल्म के लिए हां कर दी। सवाल: चेतना को फिल्म में लेने से पहले तीन दिन की शूटिंग किसी और अभिनेत्री के साथ हो चुकी थी। फिर सब कुछ दोबारा शूट करना पड़ा। उस समय क्या महसूस हुआ? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: विक्रम सर इस फिल्म को लेकर कोई समझौता नहीं करना चाहते थे। हॉन्टेड के प्रशंसकों की उम्मीदें बड़ी हैं। लोग आज भी पूछते हैं कि क्या यह पहली फिल्म जैसी होगी, इसके गाने कैसे होंगे और प्रेम कहानी कैसी होगी। विक्रम सर के दिमाग में ‘सुनहरी’ का किरदार पूरी तरह साफ था। जब चेतना ने पहला सीन किया, तब हम सभी को लगा कि हमें हमारी सुनहरी मिल गई है। सवाल: चेतना, फिल्म का सबसे मुश्किल सीन कौन-सा था? जवाब/चेतना पांडे: वह सीन टीजर में भी दिखाया गया है। उसमें मेरी पहली मुलाकात देव से होती है। उस सीन में मुझे बिना कुछ बोले आंखों और एक्सप्रेशंस से बताना था कि क्या हो रहा है और सामने वाले को कैसे व्यवहार करना है, क्योंकि वहां एक भूत मौजूद होता है। यह मेरे लिए चुनौतीपूर्ण सीन था। सवाल: शूटिंग के दौरान कौन-सा सीन सबसे डरावना था और किस सीन में सबसे ज्यादा हंसी आई? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: हंसी वाला किस्सा एक गाने की शूटिंग के दौरान हुआ था। एक सीन में मुझे चेतना को देखते हुए बाहर निकलना था और कैमरे से नजर नहीं हटानी थी। मैं सीन में इतना डूबा था कि दीवार पर ध्यान नहीं गया। बाहर निकलते ही सीधे दीवार से टकरा गया और सिर लग गया। चेतना ने यह देखा तो जोर-जोर से हंसने लगीं। फिर पूरे सेट पर हंसी का माहौल बन गया। पूरे दिन हम लोग हंसते रहे। मजेदार बात यह थी कि हम हॉरर फिल्म शूट कर रहे थे, लेकिन उस दिन कॉमेडी ज्यादा हो गई। जहां तक डरावने सीन की बात है, हमारी फिल्म सिर्फ जंप स्केयर पर निर्भर नहीं करती। इसमें डर का एहसास माहौल और कहानी से आता है। फिल्म देखते समय दर्शकों को लगातार लगेगा कि कुछ बुरा होने वाला है और यही इसकी खासियत है। सवाल: चेतना, आपके लिए ‘सुनहरी’ का किरदार कितना चुनौतीपूर्ण था? जवाब/चेतना पांडे: मेरे लिए इस फिल्म का हर सीन चुनौतीपूर्ण था। मुझे नहीं लगता कि जिंदगी में फिर कभी इतना मुश्किल और परतदार किरदार मिलेगा। असल जिंदगी में मैं बहुत बातूनी और चंचल हूं, लेकिन सुनहरी बिल्कुल अलग है। वह शांत है, कम बोलती है और उसकी भावनाएं चेहरे और आंखों में नजर आती हैं। मैंने विक्रम सर से कई बार पूछा कि उन्होंने मुझमें ऐसा क्या देखा। उन्होंने कहा कि मेरे अंदर जो है, शायद मैं खुद भी नहीं जानती, लेकिन वह उसे देख सकते हैं। यह बात मेरे लिए बहुत खास थी। सवाल: क्या आप भूत-प्रेत या अलौकिक शक्तियों पर विश्वास करती हैं? जवाब/चेतना पांडे: पहले मैं इन चीजों पर ज्यादा विश्वास नहीं करती थी, लेकिन मेरे पिता ने अपने कुछ अनुभव बताए। उन्होंने कहा कि एक बार उनके साथ ऐसी घटना हुई थी, जिसमें उन्हें कुछ समय तक याद नहीं रहा कि क्या हुआ था। पहाड़ों में ऐसी कई कहानियां सुनने को मिलती हैं। मैंने आसपास भी कुछ घटनाएं देखी हैं, इसलिए अब मैं इन चीजों पर विश्वास करती हूं। हालांकि मेरे साथ अभी तक ऐसा कोई अनुभव नहीं हुआ है। सवाल: अगर सच में किसी भूत से सामना हो जाए, तो उससे क्या मांगेंगे? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: मैं उससे कुछ नहीं मांगूंगा, मैं तो वहां से भाग जाऊंगा। (हंसते हुए) मेरी जिंदगी बहुत अच्छी चल रही है, मुझे उससे कुछ लेने की जरूरत नहीं है। लोग कहते हैं कि काश ऐसा अनुभव हो, लेकिन सच में अगर सामने भूत आ जाए तो हालत खराब हो जाएगी। फिल्म में मैं भूत से लड़ रहा हूं, लेकिन रियल लाइफ में भूत दिख गया तो सबसे पहले मैं ही भागूंगा। सवाल: चेतना, अगर आपको किसी हॉन्टेड जगह पर जाना पड़े, तो अपने साथ किसे लेकर जाएंगी? जवाब/चेतना पांडे: मैं विक्रम भट्ट सर को अपने साथ लेकर जाऊंगी। (हंसते हुए) क्योंकि अगर वहां सच में कोई हॉरर घटना होने लगी, तो सर तुरंत कहेंगे- "ये तो बहुत रियल है, इस पर एक और फिल्म बनाते हैं।" वहीं नई फिल्म की तैयारी शुरू हो जाएगी। सवाल: विक्रम भट्ट की कौन-सी फिल्म आपको सबसे ज्यादा पसंद है? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: मुझे विक्रम सर की लगभग सभी फिल्में पसंद हैं। गुलाम मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है। हॉन्टेड भी मुझे पसंद थी। बचपन में मैं अपने पिता के साथ हॉरर फिल्में देखता था और बहुत डर जाता था। कई बार आंखें बंद करके उंगलियों के बीच से स्क्रीन देखता था। तब सोचता था कि कलाकार ऐसे सीन कैसे शूट करते होंगे। अब हॉरर फिल्म करने के बाद समझ आया कि यह कितना मुश्किल काम है। सवाल: अगर इस फिल्म का कोई सीन दोबारा शूट करने का मौका मिले तो कौन-सा सीन करना चाहेंगे? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: देव और सुनहरी के लगभग सभी सीन खास हैं। उनकी प्रेम कहानी सीधी-सादी नहीं है। जितना वे करीब आना चाहते हैं, हालात उतना ही उन्हें दूर धकेलते हैं। अगर मौका मिले तो मैं गुफा वाला सीन दोबारा करना चाहूंगा। वह खूबसूरत और भावनात्मक सीन था। चेतना पांडे: उस दिन मिमोह के पिता मिथुन चक्रवर्ती भी सेट पर मौजूद थे। मैं बहुत नर्वस थी, लेकिन सीन खत्म होने के बाद उन्होंने और विक्रम सर ने हमारी तारीफ की। वह पल मैं कभी नहीं भूलूंगी। सवाल: मिथुन चक्रवर्ती आपको काम को लेकर क्या सलाह देते हैं? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: पापा हमेशा कहते हैं कि जो भी किरदार निभाओ, पूरी ईमानदारी से निभाओ। अगर आप किरदार के प्रति ईमानदार नहीं होंगे तो दर्शक तुरंत पकड़ लेंगे। वह कहते हैं कि सेट पर मिमोह नहीं, सिर्फ किरदार नजर आना चाहिए। यही उनकी सबसे बड़ी सीख है, जिसे मैं हमेशा याद रखता हूं। सवाल: अपने पिता मिथुन चक्रवर्ती से जुड़ी कोई खास याद साझा करना चाहेंगे? जवाब/मिमोह चक्रवर्ती: मेरे लिए सबसे खास याद वह है, जब मुझे हॉन्टेड की पहली फिल्म मिली थी। मैं विक्रम भट्ट सर से मिला था। उसी शाम घर लौटते समय उनका मैसेज आया कि मैं फिल्म का हीरो हूं। पहले मुझे यकीन नहीं हुआ। मैंने सर को फोन करके पूछा कि क्या सच में मैं ही फिल्म कर रहा हूं। उन्होंने कहा, "कल ऑफिस आओ और कॉन्ट्रैक्ट साइन करो।" जब मैं घर पहुंचा, तो मां और पापा दोनों वहीं थे। मैंने उन्हें बताया कि मुझे फिल्म मिल गई है और मैं उसका हीरो हूं। उस पल उनके चेहरे की खुशी मैं कभी नहीं भूल सकता। खासकर पापा की आंखों में जो गर्व और खुशी थी, वह मेरे लिए बहुत मायने रखती है। उन्होंने ज्यादा कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा। आज भी उनकी वह मुस्कान मुझे याद है। मेरे लिए वह किसी भी अवॉर्ड से बड़ी बात थी। पापा से जुड़ी यादें सिर्फ इसी एक पल तक सीमित नहीं हैं। बचपन में मैं उनसे काफी डरता था। उनकी पर्सनैलिटी इतनी मजबूत है कि उनके सामने हर कोई थोड़ा नर्वस हो जाता है। लेकिन समय के साथ हमारा रिश्ता बदल गया। आज वह सिर्फ मेरे पिता नहीं, बल्कि मेरे दोस्त भी हैं। हम ऊटी में होटल बिजनेस भी साथ संभालते हैं। कई फैसले मिलकर लेते हैं और जिंदगी की कई बातें शेयर करते हैं। वह अब मुझसे दोस्त की तरह बात करते हैं, सलाह देते हैं और अपने अनुभव साझा करते हैं। इसलिए मेरे लिए कोई एक याद चुनना मुश्किल है, लेकिन हॉन्टेड मिलने के बाद उनके चेहरे पर जो गर्व और खुशी मैंने देखी थी, वह पल मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत और भावुक यादों में हमेशा शामिल रहेगा।
अमीषा पटेल@51, जन्म पर देखने पहुंचीं इंदिरा गांधी:दादा के नाम पर रोड, कभी झगड़े में ममता कुलकर्णी ने कहा- तुम्हारी औकात क्या है, जानिए करियर स्टोरी
9 जून 1975 अमीषा पटेल का जन्म गुजरात के रईस बिजनेसमैन अमित पटेल और पंजाबी NRI मां आशा के घर हुआ। मां और पिता का नाम जोड़कर उन्हें अमीषा नाम दिया गया। 5 की उम्र में उन्हें भरतनाट्यम की ट्रेनिंग दिलवाई गई। उनके दादाजी रजनी पटेल मशहूर बैरिस्टर और कांग्रेस के बड़े राजनेता थे। उनके नाम पर 1986 में मुंबई की रोड का नाम बैरिस्टर रजनी पटेल मार्ग रखा गया है। मनीष पॉल के पॉडकास्ट में अमीषा ने बताया था कि उनके दादाजी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री तक बनने वाले थे। वो इंदिरा गांधी के करीबी थे। इंदिरा गांधी, अमीषा पटेल के पेरेंट्स की शादी में भी पहुंची थीं। उन्होंने खुद शादी ऐसी डेट पर रखी, जिस दिन वो काम में व्यस्त न हों और शादी अटेंड कर सकें। यहां तक की जब अमीषा का जन्म हुआ, इंदिरा गांधी वो पहली शख्स थीं, जो अस्पताल पहुंची थीं। 16 साल की उम्र में अमीषा अपने पिता के साथ सहेली के संगीत में पहुंची थीं। वहां पिता के साथ बोर्डिंग स्कूल में पढ़ चुके बचपन के दोस्त राकेश रोशन भी पहुंचे थे। जब अमीषा ने बिंदास अंदाज में डांस करना शुरू किया तो राकेश रोशन की उन पर नजर पड़ गई। वो सीधे उनके पिता के पास पहुंचे और पूछा- ये कौन है। गर्लफ्रेंड? जवाब मिला- नहीं राकेश, ये मेरी बेटी है अमीषा। अभी अभी बोस्टन से पढ़ाई कर लौटी है। राकेश ने उनसे कहा- जब मैं अपने बेटे ऋतिक को लॉन्च करूंगा, तो तुम्हारी बेटी को हीरोइन बनाऊंगा। पिता ने कहा- नहीं, वो तो पढ़ाई के लिए बॉस्टन जा रही है। फिल्मों में काम करने का तो सवाल ही नहीं उठता। शुरुआती पढ़ाई के बाद अमीषा ने बोस्टन की TUFT यूनिवर्सिटी से बायो जेनेटिक इंजीनियरिंग की और बाद में इकॉनोमिक्स की पढ़ाई की। अमीषा के पिता अमित पटेल का अक्सर फिल्मी दुनिया के लोगों के साथ उठना-बैठना होता था। एक दिन उन्होंने बॉस्टन में रह रहीं अमीषा को कॉल कर बताया कि विनोद अंकल (विनोद खन्ना) चाहते हैं कि तुम उनके बेटे अक्षय खन्ना की डेब्यू फिल्म हिमालय पुत्र से फिल्मों में डेब्यू करो, लेकिन हमने इनकार कर दिया। हम नहीं चाहते कि तुम्हारी पढ़ाई पर असर पड़े। अमीषा ने इस बात कर ध्यान नहीं दिया, क्योंकि फिल्मों में आने का उन्होंने खुद भी कभी सोचा नहीं था। कुछ दिन बीते, तो पिता ने फिर बताया फिरोज खान ने भी उन्हें बेटे फरदीन खान की फिल्म प्रेम अगन ऑफर की है, लेकिन इस बार भी उन्होंने इनकार कर दिया। जब वो फाइनल ईयर में बॉम्बे लौटीं, तो एक दिन राकेश रोशन ने उन्हें लंच पर इनवाइट किया। अमीषा पिता-मां के साथ गईं। वहां राकेश के बेटे ऋतिक भी मौजूद थे। उन्होंने पढ़ाई की खूब बातें कीं, अमीषा ने अपना सीवी और अमेरिका के मॉर्गन स्टेनली बैंक से मिली जॉब का लेटर भी दिखाया। कुछ देर बाद जब अमीषा वॉशरूम गईं तो राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक से पूछा कि क्या उन्हें अपकमिंग फिल्म कहो न प्यार है में कास्ट करना चाहिए। ऋतिक की हामी मिलने पर राकेश ने अमीषा के आते ही उन्हें फिल्म ऑफर कर दी। दरअसल, उस समय राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक रोशन और करीना कपूर के साथ फिल्म कहो न प्यार है शुरू की थी, लेकिन करीना ने राकेश रोशन और मां बबीता की अनबन होने पर फिल्म छोड़ दी थी। ऑफर मिलने पर अमीषा ने पूछा- आपकी फिल्म में तो हीरोइन फाइनल हो चुकी है। इस पर राकेश ने कहा- नहीं, मैं तुम्हें हीरोइन बनाना चाहता हूं। ये सुनकर अमीषा ने हामी भर दी। उन्होंने सोचा कि अगर पहली फिल्म फ्लॉप हुई, तो वो इकोनॉमिक्स में नौकरी शुरू कर देंगी, लेकिन खुशकिस्मती से फिल्म सुपरहिट रही और अमीषा पटेल एक स्टार बन गईं और आज भी फिल्मों से जुड़ी हुई हैं। आज अमीषा पटेल 51 साल की हो चुकी है। उनके बर्थडे के खास मौके पर जानिए, उनकी जिंदगी से जुड़ी रोचक कहानी, कुछ मजेदार किस्सों के साथ- कहो न प्यार है करते हुए मिली गदर, 12 घंटों तक दिया स्क्रीनटेस्ट अमीषा पटेल ने कुछ दिनों की एक्टिंग ट्रेनिंग लेने के बाद कहो न प्यार है की शूटिंग शुरू की। इसी समय उन्हें अनिल शर्मा की फिल्म गदर के ऑडिशन की जानकारी मिली। वो ऑडिशन के लिए गईं, जिसके लिए पहले ही 500 लड़कियां ऑडिशन दे चुकी थीं। 22 लड़कियों को स्क्रीनटेस्ट के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था, जिनमें अमीषा भी शामिल हुईं। उनका स्क्रीनटेस्ट 12 घंटे तक चला। आखिरकार अनिल शर्मा ने उन्हें गदर में कास्ट कर लिया। सिलेक्शन के बाद अमीषा पटेल को गदर साइन करने पर ताने मिले। सभी का मानना था कि करियर की शुरुआत में अमीषा को मां का रोल नहीं करना चाहिए, लेकिन वो ये रोल करने पर अड़ी थीं। अमीषा ने एक साथ कहो न प्यार है और गदर की शूटिंग की। एक फिल्म में वो चुलबुली लड़की थीं और दूसरी में एक भारत-पाकिस्तान के बीच हुए दंगों की सर्वाइवर। सबसे पहले उनकी फिल्म कहो न प्यार है रिलीज हुई। हर किसी ने राकेश रोशन को सलाह दी कि वो न्यूकमर ऋतिक और अमीषा की इस फिल्म को शाहरुख खान की फिल्म फिर भी दिल है हिंदुस्तानी और आमिर खान की फिल्म मेला के आसपास रिलीज न करें। कहो न प्यार है 14 जनवरी 2000 में रिलीज हुई, जबकि मेला 7 जनवरी 2000 और फिर भी दिल है हिंदुस्तानी 21 जनवरी 2000 को रिलीज हुई। बड़े क्लैश के बावजूद कहो न प्यार है ब्लॉकबस्टर रही और उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी। इसके बाद रिलीज हुई अमीषा पटेल की फिल्म गदर भी ब्लॉकबस्टर रही और उनकी गिनती टॉप एक्ट्रेस में होने लगी। गदर में अमीषा ने पाकिस्तानी सकीना का किरदार निभाया, जिसमें सनी देओल ने तारा सिंह का किरदार निभाया था। दोनों की जोड़ी काफी पसंद की गई थी। कुछ सालों बाद अमीषा पटेल को सनी देओल के भाई बॉबी देओल के साथ हमराज फिल्म मिली। फिल्म के क्लाइमैक्स सीन में अमीषा को अक्षय खन्ना को गोली मारकर, बॉबी से गले लगना था। फिल्म की शूटिंग जयपुर के किले में हुई, जहां शूटिंग देखने के लिए भारी भीड़ जमा थी। जैसे ही अमीषा ने बॉबी को गले लगाया, वैसे ही दर्शकों की भीड़ ने चिल्लाना शुरू किया। भीड़ के लोग चिल्लाकर बॉबी देओल से कह रहे थे- सकीना को छोड़ दे, वो तेरे भाई तारा सिंह की अमानत है। उसे छोड़ दे। ये सुनते ही सेट पर मौजूद पूरी टीम जोर से हंस पड़ी और सीन दोबारा करना पड़ा। कहो न प्यार है और गदर जैसी शुरुआती फिल्मों ने अमीषा को स्टार बनाया, लेकिन बाद में उनकी बैक-टु-बैक कई फिल्में फ्लॉप होने लगीं। इनमें आप मुझे अच्छे लगने लगे, क्रांति शामिल रहीं। ह्यूमर देख आमिर खान ने ऐश्वर्या को हटाकर किया अमीषा को कास्ट अमीषा की फ्लॉप हो रहीं फिल्मों के बीच एक रोज आमिर खान ने उनका बीबीसी को दिया एक इंटरव्यू देखा, जिसमें वो बेहतरीन अंदाज में ह्यूमरस जवाब दे रही थीं। आमिर को उनका ह्यूमर इतना पसंद आया कि उन्होंने तुरंत अपने प्रोड्यूसर को कॉल कर कहा कि उनकी अपकमिंग फिल्म मंगल पांडेः द राइजिंग में अमीषा को कास्ट किया गया। जबकि उस समय फिल्म में पहले ही ऐश्वर्या राय की कास्टिंग हो चुकी थी। ऐश्वर्या को रिप्लेस करने पर अमीषा चर्चा में रही थीं। ये फिल्म एवरेज रही, हालांकि आगे भी उनकी फिल्में जमीर, वादा, हमको तुमसे प्यार है, अनकही, आप की खातिर फ्लॉप होती रहीं और उन पर फ्लॉप एक्ट्रेस का ठप्पा लग गया। विक्रम भट्ट को किया डेट, परिवार को भेजा लीगल नोटिस 2002 में आई फिल्म आप मुझे अच्छे लगने लगे की शूटिंग के दौरान अमीषा पटेल और डायरेक्टर विक्रम भट्ट रिलेशनशिप में आ गए। अमीषा का परिवार इस रिश्ते से नाखुश था। समय के साथ अमीषा के परिवार से उनकी अनबन शुरू हो गई। विवाद तब बढ़ा, जब अमीषा ने 2004 में पिता को लीगल नोटिस भेजकर उनपर कमाई का गलत तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। नोटिस के अनुसार, अमीषा के पिता ने बिजनेस में नुकसान होने पर बिना इजाजत अमीषा की सारी जमापूंजी अपने बिजनेस में लगा दी। उन्होंने 12 करोड़ की रकम वापस भी मांगी। अमीषा ने घर छोड़ दिया और अकेले रहने लगीं। इसी समय खबरें रहीं कि अमीषा, विक्रम से शादी करने वाली हैं, लेकिन 2008 में अचानक दोनों अलग हो गए। इसी समय अमीषा के परिवार ने उनसे सुलह करनी चाही। विक्रम से ब्रेकअप के ठीक बाद अमीषा का नाम मार्च 2008 में अमेरिकन बिजनेसमैन कनव पुरी से जुड़ा। 2009 से अमीषा और परिवार से रिश्ते सुधरने लगे। कनव पुरी से शादी की खबरों के बीच ही अमीषा ने कनव से भी ब्रेकअप कर लिया और कहा कि वो करियर पर फोकस करना चाहती हैं। एयर इंडिया के कर्मचारी ने एक्ट्रेस के खिलाफ दर्ज करवाई शिकायत अगस्त 2006 में न्यूयॉर्क में होने वाली विक्ट्री परेड में शामिल होने के लिए रवाना हुईं अमीषा विवादों में घिर गईं। उन पर एयर इंडिया की एक कर्मचारी ने बदसलूकी करने के आरोप में शिकायत दर्ज करवाई। भारत लौटने के बाद अमीषा के खिलाफ जांच शुरू हुई और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया गया। शिकायत के अनुसार, उन्होंने अपने साथी को फर्स्ट क्लास की टिकट न दिए जाने पर बदसलूकी की, हालांकि अमीषा ने इस सभी आरोपों को निराधार कहा। साथ ही उन्होंने कहा कि एयरलाइन के कर्मचारी खुद को बचाने के लिए उन्हें फंसा रहे हैं। विवाद तब खत्म हुआ, जब न्यूयॉर्क विक्ट्री परेड के ऑर्गेनाइजर्स ने एक्ट्रेस से माफी मांगते हुए कहा कि गड़बड़ उनकी तरफ से हुई थी। उन्होंने अमीषा के साथ ट्रेवल करने वालों की भी फर्स्ट क्लास में टिकट करवाई थी, लेकिन टेक्निकल दिक्कतों के चलते उनकी टिकट गलत बुक हो गई। ममता कुलकर्णी ने बहस कर कहा- तुम्हारी औकात क्या है 90 के दशक में ममता कुलकर्णी स्टार थीं, जबकि अमीषा पटेल मॉडलिंग किया करती थीं। तब दोनों को एक साथ एक हेयरऑइल का एड मिला था, जिसकी शूटिंग 4-5 दिनों तक मॉरिशियस में हुई थी। शूटिंग के बीच ऑर्गेनाइजर और बजाज सेवाश्रम के मालिक मिस्टर बजाज ने सभी के लिए एक डिनर आयोजित किया। डिनर के समय ममता कुलकर्णी, मिस्टर बजाज, अमीषा और उनकी मां अपनी-अपनी टीम के साथ एक ही टेबल पर बैठे थे। तभी ममता ने बुफे से एक डिश ली, जिसमें कोई नाम नहीं लिखा था। उन्हें चबाने में दिक्कत हुई, तो उन्होंने वेटर को बुलाकर डिश का नाम पूछा। वेटर ने उन्हें बताया कि ये हिरण का मांस है। इस पर ममता चिढ़ गईं और वेटर पर चिल्लाते हुए कहा- हिरण का मांस कौन खाता है, चिकन-मटन खाया जाता है। उन्होंने और उनकी सेक्रेटरी ने वेटर को गालियां देते हुए बदतमीजी की, तभी पास बैठीं अमीषा ने बीच-बचाव करते हुए कहा, यहां सभी लोग एक जैसा खाना खा रहे हैं, तो किसी को नखरे नहीं करना चाहिए। इस पर ममता भड़क गईं और चिल्लाते हुए कहा- तुम यहां हेयर ऑइल के एड के लिए आई हो ना। तुम्हें इसके 1 लाख रुपए मिले हैं और मुझे 15 लाख, तो स्टार कौन है बताओ, तुम्हारी औकात क्या है। इसके बाद अमीषा ने उन्हें जवाब दिया, तो उनकी सेक्रेटरी ने अमीषा से बदसलूकी करते हुए अग्रेसिव होकर उनके पास आने लगीं। तभी अमीषा की मां आशा तुरंत उठीं और सेक्रेटरी का हाथ पकड़कर कहा, मेरी बेटी को छूने की हिम्मत भी मत करना। ये झगड़ा काफी चर्चा में रहा। अमीषा पटेल एक इंटरव्यू में इस पर बात कर चुकी हैं। बीते साल आप की अदालत में पहुंचीं, ममता से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने मामले पर बात जरूर की, लेकिन सफाई में कहा कि उन्होंने सीधे तौर पर अमीषा को अपशब्द नहीं कहे, बल्कि उनकी मैनेजर की उनसे बहस हुई थी। अमीषा पटेल के हाथ से निकलीं ब्लॉकबस्टर तेरे नाम और लगान जैसी फिल्में शुरुआत में आमिर खान की फिल्म लगान अमीषा पटेल को ऑफर हुई थी। उस फिल्म में उन्हें गांव की लड़की का किरदार निभाना था। उनकी डेट्स भी फाइनल हो चुकी थीं, हालांकि बाद में डायरेक्टर आशुतोष गोवारिकर को एहसास हुआ कि एक गांव की लड़की के किरदार के लिए अमीषा अच्छा विकल्प नहीं हैं, क्योंकि वो बेहद खूबसूरत और पढ़ी-लिखी लगती हैं। यही वजह रही कि आखिरी समय में उनकी जगह ग्रेसी सिंह को कास्ट कर लिया गया। बता दें कि फिल्म गदरः एक प्रेम कथा और लगान एक ही दिन 14 जून 2001 को रिलीज हुई थीं। सलमान चाहते थे तेरे नाम करें अमीषा पटेल अमीषा पटेल, सलमान की करीबी दोस्त हैं। जिस समय उन्हें तेरे नाम की स्क्रिप्ट मिली, तब उन्होंने अमीषा को फिल्म ऑफर की थी। उन्होंने अमीषा को तेरे नाम के गाने सुनाए, जो पहले बन चुके थे। हालांकि तब फिल्म की शूटिंग डेट्स तय नहीं थीं और न ही ये तय हुआ था कि फिल्म कौन डायरेक्ट करेगा। जब तक सतीष कौशिक, फिल्म डायरेक्ट करने के लिए फाइनल हुए, तब तक अमीषा दूसरी फिल्मों में बिजी हो चुकी थीं। बाद में उनकी जगह भूमिका चावला को कास्ट किया गया। मुन्नाभाई एमबीबीएस में शाहरुख के साथ किया गया था कास्ट डायरेक्टर विधु विनोद चोपड़ा ने शाहरुख खान और अमीषा के साथ फिल्म मुन्नाभाई एमबीबीएस प्लान की थी। हालांकि शाहरुख दूसरी फिल्मों में बिजी होने पर ये फिल्म नहीं कर सके। बाद में उनकी जगह संजय दत्त आए। जब तक कास्टिंग फाइनल होती, अमीषा भी दूसरी फिल्मों में बिजी हो गईं और उन्होंने ये फिल्म छोड़ दी। एम एफ हुसैन को दादाजी ने दिया था मौका एक दौर में मशहूर पेंटर एम एफ हुसैन, सड़कों पर बिलबोर्ड पेंट करने का काम करते थे। वो अमीषा पटेल के दोस्त थे। शुरुआत में जब एमएफ हुसैन पेंटिंग में करियर बनाने की जद्दोजहद कर रहे थे, तब अमीषा के दादाजी ने उन्हें सपोर्ट किया और उनकी पेंटिंग्स अपने साथियों से खरीदवाई थीं। यही वजह रही कि एम एफ हुसैन का अमीषा के परिवार से करीबी रिश्ता रहा। अमीषा के घर में आज भी एम एफ हुसैन की दी हुईं कई लग्जरी पेंटिंग्स हैं।
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