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“अब मात्र एक कमरे तक ही सिमट कर रह गई..” INDIA गठबंधन की बैठक पर भाजपा का तंज, विपक्षी एकता पर उठाए सवाल

दिल्ली में इंडिया गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक आज संपन्न हुई है, जिसके बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्षी एकता और उनके राजनीतिक इरादों पर तीखा प्रहार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने विपक्षी दलों के इस समूह को निशाने पर लिया है।

पात्रा ने इंडिया गठबंधन को ऐसे राजनीतिक दलों का समूह बताया है, जिन्हें देश की जनता चुनावों में लगातार नकार रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इन दलों की जमीनी पकड़ अब कमजोर पड़ चुकी है और वे जनमानस से दूर होते जा रहे हैं। प्रवक्ता पात्रा ने इंडिया गठबंधन की बैठकों के स्वरूप में आए बदलाव पर भी तंज कसा है। उन्होंने याद दिलाया कि एक समय था जब इस गठबंधन की बैठकें बड़े-बड़े स्टेडियमों में आयोजित की जाती थीं और नेता बड़े प्रदर्शनों के साथ हाथ पकड़कर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते थे। हालांकि, वर्तमान में हालात ऐसे हो गए हैं कि ये बैठकें अब मात्र एक कमरे तक ही सिमट कर रह गई हैं, जो उनकी घटती प्रासंगिकता का संकेत है।

संबित पात्रा ने विपक्षी एकता पर उठाए सवाल

संबित पात्रा ने यह भी स्पष्ट किया कि गठबंधन में शामिल दल न केवल विभिन्न राज्यों में एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं, बल्कि उनके बीच कोई वैचारिक एकरूपता भी दिखाई नहीं देती है। उनके अनुसार, यह गठबंधन केवल अपने राजनीतिक अस्तित्व को बचाने की एक बेताब कोशिश करता दिखाई देता है, जिसमें कोई ठोस वैचारिक आधार नहीं है। भाजपा प्रवक्ता ने विपक्षी दलों को पहले अपने घर संभालने की नसीहत दी। उन्होंने हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के भीतर गहरा असंतोष देखने को मिल रहा है। इसी प्रकार, राजस्थान में कांग्रेस भी अंदरूनी चुनौतियों और गुटबाजी से लगातार जूझ रही है। पात्रा ने कहा कि इन विपक्षी दलों को पहले अपने-अपने घरों की व्यवस्था को दुरुस्त करना चाहिए, उसके बाद ही राष्ट्रीय स्तर पर एकजुटता की बात करनी चाहिए, क्योंकि उनकी आंतरिक कमजोरियां स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रही हैं।

खरगे के SIR और वोट चोरी के सवालों पर भाजपा का पलटवार

इंडिया गठबंधन की बैठक के उपरांत कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा एसआईआर (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर उठाए गए सवालों पर भी भाजपा ने पलटवार किया है। संबित पात्रा ने खरगे के इस रुख को ‘दोहरी राजनीति’ करार दिया। उन्होंने तर्क दिया कि जिन राज्यों में कांग्रेस या उसके सहयोगी दल सत्ता में हैं, वहां इस चुनाव प्रक्रिया पर कोई प्रश्न नहीं उठाया जाता है। यह दर्शाता है कि विपक्ष अपने राजनीतिक लाभ के अनुसार मुद्दों को उठाता है। प्रवक्ता ने महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर विपक्षी दलों के रवैये की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने एसआईआर मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक की मांग की है, लेकिन जब महिला आरक्षण जैसे राष्ट्रव्यापी महत्व के विषय पर सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई थी, तब विपक्षी दलों ने उसमें गंभीरता का प्रदर्शन नहीं किया था। पात्रा ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि कुछ नेता तो मोबाइल फोन के माध्यम से ही उस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए थे, जो उनकी उदासीनता को दर्शाता है।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने अपने कटाक्ष को जारी रखते हुए कहा कि देश की जनता ने इन विपक्षी दलों को राजनीतिक रूप से पूरी तरह से निष्क्रिय कर दिया है। उन्होंने कहा कि जनता ने इन्हें पूरी तरह से नकार दिया है और अब ये दल केवल खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय दिखने की कोशिश कर रहे हैं। यह उनकी राजनीतिक हताशा को दर्शाता है, क्योंकि वे जनता का विश्वास खो चुके हैं।

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Telecom Sector को बड़ी राहत! Bombay High Court ने Airtel-Vi का अतिरिक्त Spectrum शुल्क किया रद्द

टेलीकॉम क्षेत्र की दो बड़ी कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए बंबई उच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार के उन फैसलों को रद्द कर दिया है, जिनके तहत उनसे अतिरिक्त स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क के रूप में बड़ी रकम वसूलने की कोशिश की जा रही थी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस विवाद से जुड़े मामलों में कंपनियों द्वारा जमा कराई गई बैंक गारंटी को अब आगे जारी रखने की आवश्यकता नहीं है।

बता दें कि यह मामला वर्ष 2008 से 2012 के बीच दूरसंचार कंपनियों को आवंटित अतिरिक्त स्पेक्ट्रम से जुड़ा हुआ था। केंद्र सरकार ने बाद में वर्ष 2012 में हुए स्पेक्ट्रम आवंटन की ऊंची दरों को आधार बनाकर पूर्व अवधि के लिए भी अतिरिक्त शुल्क लगाने का फैसला किया था। इसी आधार पर भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया को मांग नोटिस जारी किए गए थे।

मौजूद जानकारी के अनुसार न्यायमूर्ति मनीष एम पितले और न्यायमूर्ति श्रीराम वी शिरसाट की खंडपीठ ने दोनों कंपनियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि सरकार द्वारा पूर्व प्रभाव से अतिरिक्त शुल्क लगाने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार प्रस्तुत नहीं किया जा सका है।

सुनवाई के दौरान भारती एयरटेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे और डेरियस खंबाटा ने पक्ष रखा, जबकि वोडाफोन आइडिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अस्पी चिनॉय पेश हुए थे। कंपनियों का तर्क था कि भारतीय तार अधिनियम या लाइसेंस समझौतों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत सरकार पूर्व प्रभाव से इस प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लगा सके। इसलिए यह मांग कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने नवंबर और दिसंबर 2012 में मंत्रिमंडल स्तर पर दो महत्वपूर्ण फैसले लिए थे। इन्हीं फैसलों के आधार पर दूरसंचार विभाग ने कंपनियों को अतिरिक्त भुगतान के नोटिस जारी किए थे। हालांकि अदालत ने अब इन दोनों मंत्रिमंडलीय निर्णयों और उनसे जुड़े सभी मांग नोटिसों को रद्द कर दिया है।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सरकार भारतीय टेलीग्राम अधिनियम की धारा 4 के तहत अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी वित्तीय बोझ नहीं डाल सकती है। न्यायालय के अनुसार किसी भी कार्रवाई के लिए स्पष्ट कानूनी अधिकार और कॉन्ट्रैक्चुअल आधार होना आवश्यक है।

बता दें कि अदालत ने लाइसेंस समझौतों की भी विस्तार से समीक्षा की है। इसके बाद न्यायालय इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि सरकार सार्वजनिक हित का हवाला देकर समझौते की शर्तों से अलग नहीं जा सकती है और न ही बाद में नई वित्तीय जिम्मेदारियां जोड़ सकती है।

न्यायालय ने यह भी उल्लेख किया कि राष्ट्रीय दूरसंचार नीति 1999 का मूल उद्देश्य दूरसंचार सेवाओं को आम लोगों तक सुलभ और किफायती बनाना था। इसका उद्देश्य केवल अधिकतम राजस्व जुटाना नहीं था। ऐसे में सार्वजनिक हित की व्याख्या प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर की जानी चाहिए।

मौजूद जानकारी के अनुसार अदालत ने यह भी पाया कि अतिरिक्त शुल्क लगाने से पहले लाइसेंस समझौतों में कोई औपचारिक संशोधन नहीं किया गया था। न ही ऐसा कोई नया समझौता हुआ था जो पुराने अनुबंध का स्थान लेता। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने एकतरफा तरीके से अतिरिक्त शुल्क लागू कर दिया था।

इस फैसले को दूरसंचार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भविष्य में सरकारी नीतियों और लाइसेंस संबंधी विवादों में कॉन्ट्रैक्चुअल शर्तों तथा कानूनी अधिकारों की भूमिका और अधिक स्पष्ट हो सकती है।

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वॉशिंगटन, 9 जून (आईएएनएस)। अल्टीमेट फाइटिंग चैंपियनशिप (यूएफसी) व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अपना पहला इवेंट आयोजित करने की तैयारी कर रही है। इसी बीच, अमेरिकी विदेश विभाग (स्टेट डिपार्टमेंट) द्वारा मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स की इस दिग्गज कंपनी के साथ स्पोर्ट्स डिप्लोमेसी साझेदारी शुरू करने का फैसला यह दिखाता है कि यह संगठन खेल, संस्कृति और राजनीति के क्षेत्र में कितनी बड़ी ताकत बन गया है। Tue, 9 Jun 2026 08:51:03 +0530

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