Explainer: Karnataka Politics में आखिर सिद्धारमैया और शिवकुमार पर कांग्रेस क्यों नहीं ले पा रही फैसला? जानें कौन सी चुनौतियां बन रहीं बाधा
Karnataka Politics: कर्नाटक में कार्यकाल का आधे से ज्यादा समय पूरा हो चुका है। अब शुरूआती शर्त के अनुसार, डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को बचे हुए कार्यकाल के लिए कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया जाना है। शिवकुमार इसके लिए कई बार हाईकमान से कह चुके हैं। लेकिन कांग्रेस इसको लेकर फैसला क्यों नहीं ले पा रही हैं, आखिर अपनी ही शर्त पूरी करने के लिए पार्टी के सामने क्या क्या चुनौतियां। आइए विस्तार से समझते हैं।
कर्नाटक में सीएम बदलने को लेकर उठापटक चल रही है। सीएम सिद्धारमैया की जगह डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार बचे कार्यकाल के लिए मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कांग्रेस हाईकमान ने दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाया। कई घंटों के मैराथन के बाद राहुल गांधी के साथ अलग से बैठक हुई। कहा जा रहा है कि फैसला हो चुका है। बस औपचारिक घोषणा बाकी है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि सिद्धारमैया सीएम कुर्सी छोड़ने के लिए तैयार हो गए हैं। 28 मई को वह औपचारिक रूप से इस्तीफा दे देंगे। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब सीएम कुर्सी को लेकर विवाद हो रहा हो।
कार्यकाल की शुरूआत में ही तय हुआ था 50-50 का फॉर्मूला
डीके शिवकुमार के समर्थकों का दावा है कि 2023 में कांग्रेस आलाकमान ने मुख्यमंत्री पद के लिए ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला तय किया था। लेकिन अशोक गहलोत और भूपेश बघेल की तरह सिद्धारमैया भी पिछले 6 महीने से इसे नजरअंदाज कर रहे हैं। सिद्धारमैया कांग्रेस नेतृत्व को चेतावनी दे चुके हैं कि उन्हें हटाने पर कर्नाटक में पार्टी टूट सकती है। दलील है कि सिद्धारमैया को 50 से 70 विधायकों का समर्थन हासिल है।
क्यों नहीं सुलझ रहा डीके और सिद्धारमैया विवाद?
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच का मामला इसलिए नहीं सुलझ पा रहा है क्योंकि दोनों ही नेता राज्य में बेहद मजबूत जनाधार और राजनीतिक कद रखते हैं। पार्टी आलाकमान के लिए दोनों में से किसी एक को नाराज करना भारी राजनीतिक जोखिम का कारण बन सकता है।
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कांग्रेस के लिए क्या हैं मुसीबतें?
दोनों नेताओं का बड़ा जनाधार
सिद्धारमैया एक स्थापित जन नेता हैं जिनकी ओबीसी, दलित और मुस्लिम वोट बैंक यानी अहिंदा समीकरण पर मजबूत पकड़ है। वहीं, डीके शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं और पार्टी संगठन तथा चुनावी रणनीति-वित्तपोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
50-50 या 'रोटेशन फॉर्मूला'
शिवकुमार गुट के मुताबिक 2023 में CM पद के लिए ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला तय हुआ था। गुट वादा पूरा करने पर जोर दे रहा है, पर सिद्धारमैया कुर्सी छोड़ने को राजी नहीं हैं।
जाति का गणित गड़बड़ाने और वोट घटने की चिंता:
अगर सिद्धारमैया को हटाकर डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाता है, तो पार्टी को आशंका है कि ओबीसी वोटबैंक खिसक सकता है और वोक्कालिगा वोट जेडी(एस) की तरफ जा सकते हैं।
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मजबूत विकल्प का अभाव
आलाकमान यानी मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी इस गतिरोध को खत्म करने के लिए सिद्धारमैया को दिल्ली में बड़ी राष्ट्रीय भूमिका या राज्यसभा की पेशकश कर डीके शिवकुमार को CM की कुर्सी सौंपना चाहता है। लेकिन सिद्धारमैया आसानी से पद छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जिससे पार्टी असमंजस में है।
अब क्या होगा?
कल यानी 28 मई को उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार कल सुबह 9 बजे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के कावेरी स्थित आवास पर आयोजित नाश्ते की बैठक में शामिल होंगे।
सिद्धारमैया पर कांग्रेस का NO-रिस्क!
दिल्ली में मौजूद एक कांग्रेस नेता ने द हिंदू को बताया कि मौजूदा हालात में आलाकमान सिद्धारमैया को तुरंत हटाने का जोखिम नहीं लेना चाहता। AHINDA यानी अल्पसंख्यक, पिछड़ा और दलित वोटबैंक पर सिद्धारमैया की पकड़ और ओबीसी समुदाय में उनका प्रभाव उनकी सबसे बड़ी ताकत है। इसी वजह से कांग्रेस हर कदम सोच-समझकर उठा रही है। नेता के मुताबिक, कर्नाटक में नेतृत्व बदलाव तभी होगा जब सिद्धारमैया खुद राहुल गांधी की सलाह पर CM पद छोड़ने को राजी हों।
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CM रेस में क्यों पीछे हैं डीके शिवकुमार?
डीके शिवकुमार अब भी कांग्रेस की कमजोर कड़ी बने हुए हैं। चुनाव के बाद उनके मुख्यमंत्री नहीं बन पाने की वजह उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी रहे। वहीं, सिद्धारमैया अपनी साफ छवि से लेकर कर्नाटक की सामाजिक संरचना में फिट बैठने तक, हर मोर्चे पर भारी पड़े थे।
सिद्धारमैया को क्या मिल सकती है भूमिका?
चर्चा है कि सिद्धारमैया ने साफ कर दिया है कि वो डीके शिवकुमार के नीचे काम नहीं करेंगे। यही वजह है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे उन्हें दिल्ली में अहम भूमिका देने का ऑफर दे रहे हैं। इसमें राज्यसभा भेजना या पार्टी में अहम भूमिका देना शामिल हो सकता है।
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क्या था पिछले चुनाव का परिणाम
साल 2023 में कर्नाटक में विधान सभा चुनाव हुए थे। इसमें कांग्रेस ने 135 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। सीटों और वोट शेयर दोनों लिहाज से यह 1989 के बाद कर्नाटक में पार्टी की सबसे बड़ी जीत है। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (सेक्युलर) ने हार मान ली और क्रमशः दूसरे और तीसरे नंबर पर रहीं।
बिहार एनडीए की तर्ज पर होगा फैसला?
अगर सिद्धारमैया सीएम कुर्सी छोड़ने और राज्य सभा के लिए राजी होते हैं तो बिहार के पूर्व सीएम नीतीश कुमार की तर्ज पर राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन भर सकते हैं। साथ ही इस्तीफे का ऐलान भी कर सकते हैं। चर्चा है कि नीतीश की तरह सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र को भी मंत्री पद का ऑफर मिला है। राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खड़गे का कार्यकाल खत्म हो रहा है, और अगर वो दोबारा नहीं जाते तो विपक्ष के नेता का पद सिद्धारमैया को मिल सकता है। फिलहाल सिद्धारमैया ने प्रस्ताव पर विचार के लिए समय मांगा है, और फैसले के लिए सिर्फ एक दिन बचा है। हालांकि अब 28 मई को सिद्धारमैया की प्रेस कॉफ्रेंस के बाद ही सब कुछ तय होगा।
बांग्लादेश के अस्पताल में एसी गैस लीक से छह नवजातों की मौत, जांच शुरू
ढाका, 27 मई (आईएएनएस)। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के मोघबाजार स्थित अद-दीन अस्पताल में मंगलवार देर रात एक बड़ा हादसा पेश आया। एक वार्ड में एयर कंडीशनिंग सिस्टम से गैस लीक होने के चलते छह नवजातों की मौत हो गई। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।
ढाका ट्रिब्यून ने रामना डिवीजन के डिप्टी पुलिस कमिश्नर शेख जाहिदुल इस्लाम के हवाले से इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि हादसे की जांच शुरू कर दी गई है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अस्पताल के एक वार्ड में एसी सिस्टम में खराबी आने के बाद गैस रिसाव हुआ, जिसके बाद वहां भर्ती नवजातों की हालत बिगड़ती चली गई और छह की मौत हो गई।
अस्पताल प्रशासन ने बताया कि वार्ड में कुल 11 महिलाएं और उनके नवजात बच्चे भर्ती थे। शुरुआत में कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें एनआईसीयू में ले जाया गया, लेकिन बाद में उन्हें वापस वार्ड में शिफ्ट किया गया।
मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि रात में पर्याप्त डॉक्टर और नर्स मौजूद नहीं थे और समय पर बच्चों को जरूरी चिकित्सा नहीं मिल पाई।
मृतक नवजात की एक परिजन ने ढाका ट्रिब्यून से कहा कि उन्हें बताया गया था कि बच्ची आईसीयू में है, लेकिन घंटों इंतजार के बाद पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है।
ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (डीएमपी) आयुक्त ने कहा कि शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि एसी बंद और फिर दोबारा चालू किए जाने के दौरान स्थिति बिगड़ी, जिसके बाद कई बच्चों की हालत गंभीर हो गई।
फिलहाल क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) की टीम मौके पर जांच कर रही है, और घटना के कारणों की विस्तृत पड़ताल जारी है।
बांग्लादेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था की गवाही खसरे का बढ़ता प्रकोप भी दे रहा है। खसरे और इससे मिलते-जुलते लक्षणों के कारण बच्चों की मौत का सिलसिला जारी है। 15 मार्च 2026 से 26 मई (सुबह 8 बजे) तक कुल मौतों की संख्या 555 हो गई है। स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशालय (डीजीएचएस) इसे लेकर रोज शाम को आंकड़ा जारी करता है। बच्चों की मौत पर यूनिसेफ भी फिक्र जताता रहा है।
--आईएएनएस
केआर/
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