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सुरों के सरताज लक्ष्मीकांत : 'प्यारेलाल' की दोस्ती ने बनाया सुपरहिट संगीतकार
मुंबई, 24 मई (आईएएनएस)। "चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे, धीरे-धीरे..." या फिर "हंसता हुआ नूरानी चेहरा..." आज भी जब बजता है, तो उन दो संगीतकारों की याद आती है जिन्होंने भारतीय फिल्म संगीत को उसका सबसे सुरीला 'स्वर्ण युग' दिया। हम बात कर रहे हैं लक्ष्मीकांत शांताराम कुडालकर की। प्यारेलाल के साथ मिलकर उन्होंने लगभग साढ़े तीन दशकों तक भारतीय सिनेमा पर राज किया।
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