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Bihar News: नीट परीक्षार्थियों के लिए राहत भरी खबर, सम्राट सरकार ने किया मुफ्त बस सेवा का ऐलान

Bihar News: बिहार सरकार ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट में बैठने वाले लाखों छात्र-छात्राओं के लिए एक बेहद राहत भरा फैसला लिया है. राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि परीक्षा में शामिल होने वाले सभी अभ्यर्थियों के लिए बिहार की सरकारी बसों में आना जाना पूरी तरह से मुफ्त रहेगा.

एक्स पर पोस्ट कर दी जानकारी

सीएम ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करके इस बात की जानकारी दी है. सरकार के इस फैसले से उन छात्रों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें अपने घरों से दूर दूसरे शहरों में बने परीक्षा केंद्रों तक जाना पड़ता है. अक्सर परीक्षा के दिनों में यातायात के साधनों की भारी कमी हो जाती है और निजी वाहन चालक मनमाना किराया वसूलते हैं. ऐसे में सरकार की यह मुफ्त बस सेवा गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी.

दूर-दराज के छात्रों की परेशानी होगी दूर

इस महत्वपूर्ण फैसले का सबसे बड़ा उद्देश्य ग्रामीण और दूर दराज के इलाकों से आने वाले परीक्षार्थियों को समय पर और बिना किसी आर्थिक मानसिक तनाव के परीक्षा केंद्र तक पहुंचाना है. मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा के दौरान छात्रों और उनके माता पिता को बहुत सी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

परिवहन विभाग को भी जारी किए निर्देश

यातायात की समस्या के कारण कई बार छात्र समय पर केंद्र नहीं पहुंच पाते हैं जिससे उनकी सालों की मेहनत बेकार चली जाती है. इस योजना के लागू होने से हजारों अभ्यर्थियों को सीधा फायदा पहुंचेगा. अब छात्र अपने एडमिट कार्ड को दिखाकर राज्य परिवहन की बसों में बिना टिकट लिए यात्रा कर सकेंगे. सरकार ने परिवहन विभाग को भी इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी कर दिए हैं ताकि परीक्षा के दिन बसों की संख्या बढ़ाई जा सके और किसी भी रूट पर छात्रों को भीड़ का सामना न करना पड़े.

रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर विशेष इंतजाम

भीषण गर्मी के इस मौसम को देखते हुए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केवल मुफ्त बस सेवा ही नहीं बल्कि छात्रों के खाने पीने के लिए भी विशेष निर्देश दिए हैं. उन्होंने राज्य के सभी जिला प्रशासनों को मुस्तैद रहने को कहा है. इसके साथ ही उन्होंने बिहार के सभी प्रमुख मठ मंदिरों और सामाजिक संस्थाओं से भी इस नेक काम में सहयोग करने की भावुक अपील की है.

ठंडे पेयजल, सत्तू जैसी व्यवस्थाएं की जाए

मुख्यमंत्री का कहना है कि बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन और मुख्य चौराहों पर परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों के लिए ठंडे पेयजल और सत्तू जैसी पारंपरिक चीजों की व्यवस्था की जाए. सत्तू गर्मी के दिनों में शरीर को ठंडक देता है और भूख भी मिटाता है. सरकार चाहती है कि परीक्षा के तनाव के बीच किसी भी बच्चे या उसके माता पिता को धूप और गर्मी के कारण परेशान न होना पड़े. इसके लिए हर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है.

मुख्यमंत्री ने छात्रों को दी शुभकामनाएं

इस बड़े एलान के साथ ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षा की तैयारी में जुटे सभी छात्र छात्राओं को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं भी दी हैं. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बिहार के युवाओं के भविष्य को संवारने और उन्हें हर संभव बेहतर सुविधाएं देने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है. मुख्यमंत्री ने छात्रों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि वे बिना किसी चिंता के पूरे मन से अपनी परीक्षा दें, उनकी सुरक्षा और सुविधा की जिम्मेदारी राज्य सरकार की है.

हर तरफ हो रही सराहना

सरकार के इस संवेनदशील कदम की चारों तरफ खूब सराहना हो रही है. सोशल मीडिया पर भी लोग इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं. खासकर छात्र और उनके अभिभावक इस बात से बेहद खुश हैं कि सरकार ने उनकी जमीनी दिक्कतों को समझा और समय रहते एक बेहतरीन व्यवस्था सुनिश्चित की है. इस कदम से परीक्षा के दिन राज्य की सड़कों पर अव्यवस्था की स्थिति भी नहीं बनेगी.

यह भी पढ़ें: Bihar News: दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए होगा स्पेशल लो-फ्लोर बसों का संचालन, कई सुविधाओं से होंगी लैस

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पर्यावरण दिवस पर जनता को मिलेगा हरियाली का मार्ग, 'पीपल की छांव में ' बाबा ने साझा किया दशकों का अनुभव

पपील बाबा के नाम से मशहूर स्वामी प्रेम परिवर्तन एक पर्यावरणविद् हैं. उन्होंने अपनी टीम के साथ अब तक 18 राज्यों में ढाई करोड़ से अधिक पेड़ लगाए हैं.  वे लोगों के प्रेरणासोत्र बन चुके है. इस बार 5 जून को पर्यावरण दिवस के दिन वह अपनी पुस्तक का विमोचन करने वाले हैं. उन्होंने अपनी पु​स्तक ‘पीपल की छाँव में’ का जिक्र करते हुए कहा, हर आंदोलन का बीज विश्वास होता है. इसकी शुरुआत एक फुसफुसाहट से होती है, कुछ अच्छा करने की इच्छा से और यह एक जंगल में इसलिए तब्दील हो जाता है, क्योंकि दूसरे भी उसी भावना को महसूस करते हैं. मेरे मन में इस किताब का विचार 2012 में आया. इसे पूरा करने के लिए समय और शांति पाने में एक दशक से अधिक का वक्त लग गया. नवंबर 2024 में एक सड़क दुर्घटना हो गई.

2.70 लाख हेक्टेयर में वनस्पति को पुनर्स्थापित किया

लगभग पांच दशकों तक जमीनी स्तर पर काम करने के लिए 2.70 लाख हेक्टेयर में वनस्पति को पुनर्स्थापित किया. ढाई करोड़ पेड़ और उतनी ही झाड़ियां लगाने का काम किया. पीपल बाबा का कहना है, मैंने नाममात्र का ही बदलाव किया है, लेकिन मैंने कोशिश तो की है. यही मायने रखता है. ‘पीपल की छाँव में’ केवल कहानियां नहीं हैं. वे हमारी भारतीय मानसिकता के प्रतीक हैं. वे हमारे सामूहिक डीएनए का हिस्सा हैं. पीपल के पेड़ ने मुझे बचपन से ही आकर्षित करते रहे. मैंने इस अहम प्रजाति   के पौधारोपण, संरक्षण और प्रचार-प्रसार में 48 वर्ष लगा दिए हैं. यह पुस्तक उस लंबे साथ को साझा करने का मेरा तरीका है. 

दुनिया को उसके वास्तविक स्वरूप में देखें 

पीपल बाबा का कहना है कि नानी की बदौलत उनका उत्तराखंड के जंगलों, कॉर्बेट, राजाजी, हरिद्वार, ऋषिकेश, नरेंद्र नगर, टिहरी, उत्तरकाशी, नैनीताल और अल्मोड़ा परिचय हुआ. यह समर्पण के बारे में है. उन्होंने कहा, वे बस यह दिखाना चाहते हैं कि हरियाली और जैव विविधता से प्रेम करना कितना आसान है, छोटे-छोटे, सुंदर कदम उठाना कितना मायने रखता है. उन्होंने हमेशा अपने लिए लिखा है. उन्हें अपनी डायरी पढ़ना और पुरानी यादों को ताजा करना बेहतर लगता था. 

बाद छोटे परिवार का तबादला हिमाचल प्रदेश के डलहौजी में हुआ. दशकों बाद महामारी के दौरान लगे लॉकडाउन में वह दीवारों में कैद नहीं रहे. वे पौधों को पानी देते, अपनी पीठ पर धूप महसूस करते, हवा से ऐसे बात करता जैसे वह उनकी कोई पुरानी दोस्त हो. प्रकृति ने हमें कैद में रहने के लिए नहीं बनाया. उसने खुला आसमान बनाया और उसे घर कहा.

कैंब्रियन हॉल स्कूल उनकी औपचारिक कक्षा बनी. उससे पहले, वे कोलकाता, डलहौजी और चंडीगढ़ में एक-एक साल पढ़ाई कर चुके थे. यह एक छोटे लड़के के लिए काफी चुनौतीपूर्ण पाठ्यक्रम था. 

हमारे घर की बागडोर संभालने आई थीं नानी 

पीपल बाबा ने बताया, मेरी नानी मेरे जन्म के समय मेरी मां की मदद करने आई थीं, लेकिन सच तो यह है कि वे हमारे घर की बागडोर संभालने आई थीं. डलहौजी, कोलकाता और देहरादून होते हुए, अंत में अपने सबसे छोटे बेटे के साथ वह इलाहाबाद चली गईं. वे जन्म से लेकर स्नातक होने तक (1966-1986) तक हमेशा उनकी उपस्थिति में रहे. बाबा ने बताया, मिट्टी का वह टुकड़ा पर्यावरण के बारे में मेरी पहली शिक्षा थी. वहां उन्होंने सीखा कि धरती सुनती है, पानी का भी मिजाज होता है. बीज एक ऐसा वादा है जो कभी नहीं भूलता. 
 
पीपल बाबा का कहना है कि पर्यावरणीय परिवर्तन केवल संस्थानों या नीतियों से नहीं होने वाला. इसके लिए साधारण नागरिकों को बीड़ा उठना होगा. हर वह समाज जिसने अपने प्राकृतिक संसाधनों का सफलतापूर्वक संरक्षण किया है. भूमि, जल और पौधों के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा औ निभाया है. स्वयंसेवक किसी भी पर्यावरणीय आंदोलन की जीवंत नींव तरह हैं.

सालाना 70,000 रुपये की बचत

बाबा कहना है कि अगर आप उस छाया का मूल्य का आकलन करने लगें, तो आप हैरान रह जाएंगे. एक छायादार पेड़ की छांव से एक विक्रेता को रोजाना का किराया, लगभग 200 रुपये प्रतिदिन, देने से मुक्ति मिल सकती है. इस तरह सालाना 70,000 रुपये की बचत हो सकती है. पीपल के पत्ते की अपनी एक अलग खुशबू होती है. हल्की राल जैसी, मिट्टी जैसी, जिसमें हरी चाय और बारिश की हल्की-सी महक भी होती है. आयुर्वेद में पीपल के पत्तों का पाउडर अस्थमा के लिए और इसका काढ़ा हृदय    रोगों के लिए उपयोग में किया जाता है. पवित्र शब्द ने मेरे लिए कई द्वार खोले. उन्होंने अपने नर्सरी के गमलों के साथ एक तीर्थयात्री की तरह प्रवेश कर गया. मराठवाड़ा में लोग नीम को बहुत पसंद करते थे, इसलिए मैंने उनकी गलियों को नीम से भर दिया. राजस्थान और गुजरात में अरावली की कठोर प्रजातियां चाहते थे- लसोड़ा, चामरोड़, बहेड़ा, निर्गुंडी, वज्रदंती, मेहंदी, करौंदा. औषधीय, सूखा-सहनशील, गर्वित छोटी प्रजातियां जो उस भीषण गर्मी में भी टिकी रह सकती हैं, जहां उम्मीद भी मुरझा जाती है. उन्होंने बताया कि चर्चित किताब, पेंग्विन प्रकाशन की ओर से लॉन्च की जा रही है तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म अमेजन आदि पर मिल सकती है. 

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जोफ्रा आर्चर को ऊपर क्यों भेजा? प्लेऑफ में पहुंचने के बाद संगकारा ने किया रणनीति का खुलासा

kumar Sangakkara reveals rajasthan royals strategy: राजस्थान रॉयल्स के क्रिकेट निदेशक कुमार संगकारा ने दबाव के पलों में संयम बनाए रखने और अपनी योजनाओं पर टिके रहने के लिए गेंदबाजों की जमकर तारीफ की. उन्होंने मैच के दौरान जोफ्रा आर्चर को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजने के रणनीतिक फैसले का बचाव करते हुए उन्हें टीम के प्रति समर्पित खिलाड़ी बताया. इसके साथ ही, संगकारा ने अनुभवी बल्लेबाजों के सामने शांत रहकर शानदार गेंदबाजी करने वाले युवा स्पिनर यश राज पुंजा के प्रदर्शन को भी सराहा. Sun, 24 May 2026 22:38:53 +0530

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